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चहेतों को बांटे भूखंड, पूर्व सभापति व आयुक्त, रावतभाटा की पूर्व अध्यक्ष सहित एसडीएम के खिलाफ प्रकरण दर्ज

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

जिले के दो नगर निकायों चित्तौड़गढ़ नगरपरिषद और रावतभाटा नगरपालिका की दो पूर्व महिला चेयरपर्सन के खिलाफ पद के दुरुपयोग करते हुए नियम विपरीत ढंग से भूखंड बांटने को लेकर एसीबी में प्रकरण दर्ज हो गए है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में गत कांग्रेस बोर्ड की सभापति गीतादेवी योगी के साथ तब के आयुक्त दिलीप गुप्ता और रावतभाटा नगरपालिका में 2004-5 की अध्यक्ष भाजपा नेता लीलादेवी शर्मा के साथ तब के एसडीएम के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज हुआ है।

जनप्रतिनिधियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार के मामलों में पूर्व में दर्ज हुए परिवादों की जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने अब मामले दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। चित्तौड़गढ़ एएसपी चिरंजीलाल मीणा ने बताया कि एसीबी ने गुरुवार को दर्ज किए गए तीन मामलों में नगर निकायों की दो महिला जनप्रतिनिधियों सहित तत्कालीन आयुक्त, एक एसडीएम, पूर्व सरपंच, उसके परिजनों सहित अन्य संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों व लाभार्थियों को भी आरोपी बनाया है। हालांकि कई आरोपियों के नाम का खुलासा होना अभी बाकी है।

भ्रष्टाचार| एसीबी ने दोनों मामलों लंबी जांच के बाद कराया मुकदमा

सर्वे की सूची से 11 भूखंड अधिक बांटे,राजीव गांधी पाठशाला की जमीन पर भी दिए गए पट्टे

नगर परिषद के पिछले कांग्रेस बोर्ड का यह भूखंड घोटाला सरकार की आवास योजनाओं में जरूरतमंद लोगों को भूखंड आबंटन व नियमन से जुड़ा है। सन 2012 में पूर्व पार्षद छोटू सिंह शेखावत आदि ने एसीबी में परिवाद दर्ज कराया था। जिसके अनुसार 2010 में वीएसयूपी एवं आईएचएसडीपी योजना में 15 अगस्त 2009 से पूर्व से बसे और सर्वे सूची में शामिल लोगों को राजीव आवास योजना के तहत तय राशि लेकर पट्टे देने थे। आवश्यकता पर मकान निर्माण के लिए राशि देने का भी प्रावधान था। सन 2005 की सर्वे सूची में गांधीनगर भीलों की झोपड़ी के 52 और रामदेवजी का चंदेरिया के 134 लोगों के नाम थे। वर्ष 2009 की संशोधित सूची में भीलों की झोपड़ियों में आठ लोग बढ़ गए तो रामदेवजी का चंदेरिया में छह नाम कम हो गए। यानी अब दोनों जगह क्रमश: 60 व 128 कुल 168 लोगों की पत्रावलियां थी। जांच में पाया गया कि गांधीनगर भीलों की झोपड़ियों में 65 व रामदेवजी का चंदेरिया में 114 पट्टे जारी किए गए। जबकि नगर परिषद रिकार्ड के अनुसार गांधीनगर में 59 और रामदेवजी का चंदेरिया में 109 पत्रावलियां ही संधारित हुई थीं।

राजीव पाठशाला की जमीन पहले से थी, योजना बाद में लांच हुई ... रिकार्ड सीज कर मूल सूची की जांच की गई तो उसमें चौकाने वाली बात यह भी सामने आई गांधीनगर क्षेत्र में राजीव गांधी पाठशाला की जमीन में भी पट्टे दे दिए गए। जबकि पाठशाला के नाम पर जमीन 21 फरवरी 2004 को ही आबंटित हो गई थी। आवासीय योजना बाद में लांच की गई।

लाभार्थियों की जांच जारी... एएसपी मीणा ने बताया कि पट्टाधारियों की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जांच में कुछ अपात्र लोगों को पट्टे देना पाया गया। तत्कालीन नपा अध्यक्ष गीतादेवी योगी, आयुक्त दिलीप गुप्ता व संबंधित सेक्शन कार्मिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। लाभार्थियों की जांच कर रहे हैं।

6 साल लगा दिए जांच में... परिवादी नप में पूर्व नेता प्रतिपक्ष छोटू सिंह शेखावत के अनुसार 41 पट्टे फर्जी जारी हुए हैं। हमने भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए शिकायत की थी, लेकिन जांच में ही छह साल लगा दिए। हमारी पार्टी के ही जयचंद भ्रष्टाचारियों से मिले हुए थे, वर्ना अब तक आरोपी सलाखों के पीछे होते।

परिजनों को बांटे भूखंड, पालिका अध्यक्ष व पूर्व एसडीओ आए लपेटे में

चित्तौड़गढ़ | रावतभाटा नगरपालिका की बालाजीनगर आवासीय योजना में भी चेहते लोगों के लिए भूखंड आबंटन का खेल हुआ था। एसीबी ने तत्कालीन नपाध्यक्ष लीला शर्मा, एसडीएम यशोदानंदन श्रीवास्तव, राजस्व निरीक्षक रामगोपाल गुप्ता, वरिष्ठ लिपिक यसीनानाथ झा सहित अपात्र लाभार्थी व कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एएसपी चिरंजीवलाल मीणा ने बताया कि मामले के अनुसार सन 2004-05 में आईडीएसएमटी योजना के तहत बालाजीनगर में 145 भूखंड काटे गए। इसमें 69 अल्प आय वर्ग, 73 मध्यम वर्ग और तीन उच्च आय वर्ग के भूखंड थे। भूखंड आबंटन में आय वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया। नपा कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम फार्म भरवा दिए। तत्कालीन एसडीएम ने 2015 में जांच की। जिसमें सामने आया कि अधिकारी या कर्मचारी के रिश्तेदारों के नाम से भी फार्म भरे गए। मासिक आय संबंधी कालम नंबर 11 तक खाली छोड़ दिया गया। किराये के मकान संबंधी जानकारी नहीं थी। राशनकार्ड में दर्ज परिवार के नाम की आय भी नहीं बताई गई। शपथ पत्रों में भी आय की जानकारी संतोषप्रद नहीं थी। एक व्यक्ति द्वारा परिवार के दो लोगों के नाम से आवेदन करने पर भी भूखंड आबंटित किए गए। राजकोष को नुकसान पहुंचाने, पद का दुरुपयोग, पात्र लाभार्थी को मिलीभगत कर हक से वंचित करने का मामला दर्ज किया गया है। रावतभाटा में कुल 145 में से 60 पट्टों की जांच एसडीएम ने की थी। नपा में सहायक निरीक्षक व फायरमैन की प|ी के नाम पट्टे जारी होने जैसे उदाहरण आए।

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