भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़
निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी का केबिनेट मंत्री होना चुनावी साल में जिला अस्पताल पर भारी पड़ रहा है। जहां के एक मात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ का तबादला निंबाहेड़ा उप जिला अस्पताल में हो गया। ठीक एक महीने पहले यहां के एक पैथोलॉजी विशेषज्ञ को भी निंबाहेड़ा लगा दिया था। नेत्र विशेषज्ञ का तबादला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इस कारण जिले के सरकारी अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे। जिला अस्पताल में नेत्र रोगियों की जांच भी 21 महीने की ट्रेनिंगशुदा चिकित्सा अधिकारी के भरोसे ही होगी।
शासन उपसचिव चिकित्सा विभाग ने 17 मई को जारी आदेश में जिला अस्पताली के कनिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. देवेश शर्मा का तबादला उप जिला अस्पताल निंबाहेड़ा में किया। हालांकि अभी वे रिलीव नहीं हुए हैं। ठीक एक महीने पहले 17 अप्रैल को जिला अस्पताल से पैथोलॉजी कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार गारू का तबादला भी निंबाहेड़ा हुआ था। एक महीने में ही दो डॉक्टरों को जिला अस्पताल से उप जिला अस्पताल में ले जाना चर्चा में है। इन तबादलों का अधिकृत कारण भले कोई नहीं बता पाए पर इसके पीछे राजनीतिक प्रभाव साफ दिखाई देता है। यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी अपने अस्पताल में डॉक्टरों की भरपाई करना चाहते हैं। गत महीने जनसंवाद के लिए आई सीएम वसुंधराराजे के सामने भी यह मांग जोरशोर से उठी। यही कारण है कि जिला मुख्यालय से पैथोलॉजी विशेषज्ञ का तबादला आदेश तब हाथों हाथ निकला और उनको वहां ज्वाइनिंग भी देनी पड़ी।
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी डॉक्टर के दो पद होने से ज्यादा दिक्कत नहीं आई। नेत्र विभाग में वरिष्ठ विशेषज्ञ का पद पहले से रिक्त है। देवेश शर्मा के तबादले से एक मात्र कनिष्ठ विशेषज्ञ पद भी खाली हो गया। इस कारण अब जिलेभर से आने वाले नेत्र रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल पाएगा। इनके रिलीव होते ही नेत्र विभाग की कमान ट्रेनिंगशुदा एमओ डाॅ. अनिल जूनदिया के हाथों में होगी। जो सर्जरी नहीं कर सकते।
परिणाम: 21 महीने की ट्रेनिंग वाले मेडिकल आॅफिसर करेंगे मरीजों की जांच
800 से 1000 नेत्र ऑपरेशन सालभर में होते हैं। अब नहीं हो पाएंगे ... 70-80 नेत्र रोगी प्रतिदिन आउटडोर में आते हैं, उनको विशेषज्ञ सेवा नहीं मिलेगी नेत्र रोगी सरकारी विशेषज्ञ से सलाह के लिए निंबाहेड़ा जाएं या फिर शहर के निजी विशेषज्ञों को दिखाएंगे।
डॉक्टर की भी नहीं जाना चाहते ... डॉ. देवेश शर्मा के अनुसार मुझे जानकारी मिली है कि मेरा तबादला उप जिला अस्पताल निंबाहेड़ा में हुआ है। हालांकि मैंने कहीं तबादले के लिए प्रार्थना पत्र पेश नहीं किया था।
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़
निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी का केबिनेट मंत्री होना चुनावी साल में जिला अस्पताल पर भारी पड़ रहा है। जहां के एक मात्र नेत्र रोग विशेषज्ञ का तबादला निंबाहेड़ा उप जिला अस्पताल में हो गया। ठीक एक महीने पहले यहां के एक पैथोलॉजी विशेषज्ञ को भी निंबाहेड़ा लगा दिया था। नेत्र विशेषज्ञ का तबादला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इस कारण जिले के सरकारी अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे। जिला अस्पताल में नेत्र रोगियों की जांच भी 21 महीने की ट्रेनिंगशुदा चिकित्सा अधिकारी के भरोसे ही होगी।
शासन उपसचिव चिकित्सा विभाग ने 17 मई को जारी आदेश में जिला अस्पताली के कनिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. देवेश शर्मा का तबादला उप जिला अस्पताल निंबाहेड़ा में किया। हालांकि अभी वे रिलीव नहीं हुए हैं। ठीक एक महीने पहले 17 अप्रैल को जिला अस्पताल से पैथोलॉजी कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार गारू का तबादला भी निंबाहेड़ा हुआ था। एक महीने में ही दो डॉक्टरों को जिला अस्पताल से उप जिला अस्पताल में ले जाना चर्चा में है। इन तबादलों का अधिकृत कारण भले कोई नहीं बता पाए पर इसके पीछे राजनीतिक प्रभाव साफ दिखाई देता है। यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी अपने अस्पताल में डॉक्टरों की भरपाई करना चाहते हैं। गत महीने जनसंवाद के लिए आई सीएम वसुंधराराजे के सामने भी यह मांग जोरशोर से उठी। यही कारण है कि जिला मुख्यालय से पैथोलॉजी विशेषज्ञ का तबादला आदेश तब हाथों हाथ निकला और उनको वहां ज्वाइनिंग भी देनी पड़ी।
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी डॉक्टर के दो पद होने से ज्यादा दिक्कत नहीं आई। नेत्र विभाग में वरिष्ठ विशेषज्ञ का पद पहले से रिक्त है। देवेश शर्मा के तबादले से एक मात्र कनिष्ठ विशेषज्ञ पद भी खाली हो गया। इस कारण अब जिलेभर से आने वाले नेत्र रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल पाएगा। इनके रिलीव होते ही नेत्र विभाग की कमान ट्रेनिंगशुदा एमओ डाॅ. अनिल जूनदिया के हाथों में होगी। जो सर्जरी नहीं कर सकते।
जानिए, क्या असर पड़ेगा इस तबादले का
निंबाहेड़ा में तो अभी ऑपरेशन थियेटर भी नहीं ...नेत्र रोग विशेषज्ञ को जिला मुख्यालय से हटाकर निंबाहेड़ा में लगाने का सरकार का आदेश समझ से परे है। निंबाहेड़ा उप जिला अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर मंजूर तो हो गया पर अभी तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में नेत्र रोग कनिष्ठ विशेषज्ञ वहां ऑपरेशन भी नहीं कर सकते। जबकि जिला अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर है और ऑपरेशन हो रहे हैं।
34 डॉक्टरों के पद खाली, इसमें से 9 विशेषज्ञ के पद .... जिला अस्पताल को अभी भी 34 डॉक्टरों की जरूरत है। विविध कैटेगरी में डॉक्टरों के 91 पद स्वीकृत हैं। इसके मुकाबले अभी 57 ही हैं। वरिष्ठ विशेषज्ञ में मेडिसन, निश्चेतन, चर्म, नेत्र, रेडियोलॉजी एवं पैथोलॉजी का एक-एक पद रिक्त है। कनिष्ठ विशेषज्ञ के भी तीन पद खाली है। अस्पताल में 52 चिकित्साधिकारियों के पद स्वीकृत है। इनमें से 22 पद खाली हैं।
सरकार का आदेश है
चिकित्सा विभाग से डॉ. देवेश शर्मा के तबादले का आदेश प्राप्त हुआ है। सरकार का आदेश है। क्या कर सकते हैं। डॉ. मधुप बक्षी, पीएमओ जिला अस्पताल चित्तौड़गढ़
रुटीन में हो गया, नहीं जाएंगे विशेषज्ञ
जिला अस्पताल से नेत्र रोग विशेषज्ञ का तबादला आदेश रुटीन में निकल गया होगा। वे रिलीव नहीं होंगे। आदेश संशोधित हो जाएगा। चंद्रभानसिंह आक्या, विधायक चित्तौड़गढ़