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बेटियां 25 पीढ़ियों को तारती है: पं. त्रिपाठी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

हाथी कुंड मधुवन में श्रीरामचरित मानस दिव्य ज्ञान महोत्सव के तहत कथा के दौरान पं. रुद्रदेव त्रिपाठी जावद ने शास्त्रों के अनुसार बेटियों के जन्म का महत्व बताया एवं भगवान की शरण में जाने का रास्ता बताया।

पंडित त्रिपाठी ने कहा कि भगवान के शरण में जाने का सरल रास्ता प्रेम मार्ग ही है। माता पार्वती से हमें शिक्षा लेनी चाहिए कि जो करना हो वो बचपन से ही करें, पचपन के भरोसे नहीं रहें। शिव पुराण के अनुसार हिमालय को अपने घर बेटी न होने का दुख था, हिमालय ने पीड़ा नारदजी को बताई, नारद ने बेटी का महत्व बताते हुए कहा कि बेटी पच्चीस पीढ़ी को तारती है, आठ पीढ़ी माता की, आठ पीढ़ी पिता की, चार पीढ़ी सास की चार पीढ़ी ससुर व एक पीढ़ी स्वयं की इस प्रकार पच्चीस पीढ़ी तारती है। जबकि बेटा आठ पीढ़ी को ही तारता है। पं. त्रिपाठी ने कहा कि भगवान का आशीर्वाद माया व वस्तु से नहीं प्राप्त कर सकते हैं, वह सच्चे भाव व तप से ही मिलता है।

रामकथा में सुख की चाह पूरी करने के सूत्र बताए

चित्तौड़गढ़ | शहर के गांधीनगर क्षेत्र में रामकुई मंदिर परिसर में आयोजित श्री रामकथा में शनिवार को व्यासपीठ से दशरथ महाराज ने सुख की चाह पूरी करने के सूत्र बताए।

अयोध्या के रामानुज आश्रम हरिदास नगर से आए आचार्य दशरथ महाराज ने कथा के चौथे दिन प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य अपने जीवन में शरीर के लिए सब कुछ करता है पर आत्मा के लिए कुछ करने पर ध्यान नहीं है। वह सुख की चाह तो रखता है पर यह नहीं सोचता कि नित कर्मों में कौनसा ऐसा काम किया जो इससे प्राप्त होगा। जीवन में शाश्वत सुख चाहते हो तो कर्म भी अच्छे करने होंगे। मनुष्य जीवन कर्मों पर टिका है। कर्मों से ही सुख व दुख की प्राप्ति होती है। संगीतमय रामकथा के दौरान दशरथ महाराज ने यह भी बताया कि गुरु मंत्र जपने से मनुष्य सिद्वी प्राप्त करता है। भगवान भी मनुष्य रूप में ही धरती पर आकर अच्छे कर्म करते हैं। इसलिए हर मनुष्य को अपने कर्मों में सुधार लाना चाहिए। मंदिर के महंत सत्यनारायण दास त्यागी ने बताया कि शनिवार को कथा के दौरान राम जन्म के साथ विभिन्न प्रसंग श्रवण करवाएं गए। यहां कथा प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से शाम साढ़े छह बजे तक चल रही है।

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