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युवाओं ने ली पानी का दुरुपयोग रुकवाने की शपथ, प्रेरित भी करेंगे

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

पानी काे पैसे की तरह खर्च करो वरना कंगाल हो जाओगे। पैसा समाप्त होने पर जिस तरह संकट आता है वैसा ही परेशानी पानी नहीं मिलने पर भी होगी।

इसलिए हमें मिलकर पानी बचाना होगा तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा, ताकि लोग समझ सके कि पानी अमूल्य हैं। यह बात गुरूवार शाम दैनिक भास्कर ऑफिस में जल संरक्षण की शपथ लेने के बाद भास्कर जल मित्रों ने आपसी चर्चा में कही। दैनिक भास्कर की ओर से जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे जल मित्र अभियान में समाजों, संगठनों के साथ ही युवाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। अभियान से प्रेरित होकर गुरूवार शाम सामाजिक सरोकारों के कार्यक्रम में जुटा यूथ फोर चेंज सोसायटी के डेढ़ दर्जन से अधिक युवा पदाधिकारी भास्कर आफिस पहुंचे और जल संरक्षण और बूंद-बूंद पानी को बचाने की शपथ ली। यूथ फोर चेंज सोसायटी के सुभाष शर्मा, सचिव तुषार मलानी, जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा, कॉर्डिनेटर शुभम अजमेरा, मीडिया कॉर्डिनेटर मोहित हाड़ा, सूरज मेनारिया, धीरज कुमार गोयल, अंकित मेहर, हारुन नीलगर, कपिल भटिझा, नितिन त्रिपाठी, चिनसा, युवराजसिंह भाटी, आशुतोष शुक्ला, अजय सुराणा, निखिल भट्ट ने शपथ ली। अन्य संगठनों ने भी इस अभियान में अपनी प्रतिबद्घता जताई।

चित्तौड़गढ़. दैनिक भास्कर कार्यालय में जल संरक्षण की शपथ लेते हुए यूथ फोर चेंज सोसायटी के सदस्य।

इधर 70 वर्षीय बुजुर्ग ने भी जताई चिंता, बोले जमीन में बचे पानी को बचाना है... बेगूं क्षेत्र के काटूंदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सेवानिवृत कर्मचारी सुंदरलाल जैन भी भास्कर के जल संरक्षण अभियान से प्रेरित होकर भास्कर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमें जल की बचत पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। क्योंकि जल पृथ्वी पर कम ही होता जा रहा है। जबकि आबादी बढ़ती जा रही है। जैन ने कहा कि वह जब छोटे थे, तब स्थिति ये थी कि कुएं पानी से पूरे भरे रहते थे। घरों में नल 24 घंटे आते थे। लेकिन आज एक हजार फीट गहराई तक नलकूप से खुदाई कर पानी निकालना पड़ रहा है। लेकिन स्थिति और भयावह होगी, क्योंकि जमीन में भी जल नीचे जा रहा है। कुओं में भी पानी नहीं रहा। इसलिए जो जमीन में पानी बचा है, उसे हमें बचाना होगा। वह खुद उनके परिजनों को समझाते हैं कि जितनी जल की जरूरत हो, उतना ही उपयोग में लो। वह भी ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित भी करते रहते हैं।

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