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290 में से 169 पंचायतों में नहीं मिली सफर की सरकारी सुविधा क्योंकि रोडवेज को Rs. 20 प्रति किमी आय नहीं

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

साढ़े चार पहले भाजपा की सरकार बनते ही हर पंचायत को रोडवेज सेवा से जोड़ने घोषणा की थीं, लेकिन फिर भी जिले की 169 ग्राम पंचायतें रोडवेज बस सेवाओं से नहीं जुड़ पाई है। इस कारण हजारों लोगों को प्राइवेट वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। हालांकि डिपो प्रबंधन कई बार कुछ पंचायतों को डिमांड आने पर रोडवेज सेवा से जोड़ने की कवायद करता है, लेकिन 20 रुपए प्रति किमी से कम इनकम होने के कारण फिर से सेवाएं बंद करनी पड़ती है।

भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जिले में 290 ग्राम पंचायतें है। इसमें 169 ग्राम पंचायतों के लोगों को रोडवेज सेवाओं के लाभ से वंचित है। कई पंचायतों के लोग अपने क्षेत्र के विधायक या जनप्रतिनिधियों से जिला मुख्यालय पर आगार प्रशासन पर दबाव डालकर रोडवेज बसे चलवाते है, लेकिन निगम के निर्धारित मापदंडानुसार अाय नहीं मिलने पर सेवाएं बंद करनी पड़ती है। जिले में तीन साल पहले के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 160 पंचायतों में तो तीन सालों से बस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार ने साढ़े चार साल पहले घोषणा करते हुए प्रदेश की जनता से वादा किया था कि प्रदेश की सभी पंचायतों को रोडवेज सेवा से जोड़ा जाएगा, लेकिन अभी भी यह वादा आज भी अधूरा साबित हो रहा है।

जिला मुख्यालय से 15 किमी रेंज में भी रोडवेज बसें नहीं चलती

सरकार बनते ही ग्रामीण बस सेवा शुरू की पर अनुदान नहीं देने से बंद हो गई ... सरकार ने प्रदेश की वंचित ग्राम पंचायतों को रोडवेज सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से 2013 में ग्रामीण बस सेवाएं शुरू की थीं। जिले में उस समय 34 सीटर की 24 बसों का संचालन शुरू किया था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह सेवाएं बंद हो गई। कारण, सरकार द्वारा इन बसों के संचालन के लिए अनुदान की राशि निगम को नहीं दे पाई। बसों का संचालन बंद करना पड़ा और फिर से कई ग्राम पंचायतें रोडवेज सेवाओं से महरुम हो गई।

मांग अाने पर बस चलाने के प्रयास करते हैं : मुख्य प्रबंधक

यह समस्या लंबे समय से चल रही है। जिले की सभी पंचायतों में एक साथ बसों का संचालन इसलिए भी मुनासिब नहीं है कि आगार के पास केवल 117 ही बसें है। इसके अलावा दूसरा कारण यह है कि निगम का नियम है कि 20 रुपए से कम किमी आय देने वाले रुटों से संचालन बंद किया जाए। फिर भी डिमांड मिलती है और पंचायतों में बसें चलाने का प्रयास करते है। ओमप्रकाश चेचाणी , कार्यवाहक, मुख्य प्रबंधक, चित्तौड़गढ़ आगार

जिला मुख्यालय से महज 10 से 15 किमी की रेंज में भी रोडवेज बस सेवाओं से पंचायतें वंचित है। जैसे धनेतकलां, सावा, घोसुंडा, सतपुड़ा, नेतावलगढ़ पाछली, पाल, सादी, कश्मोर, एराल ग्राम पंचायत के लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय पर आना-जाना पड़ता है, लेकिन रोडवेज बसों के अभाव में परेशानियों के दौर से गुजरना मजबूरी बन गई है। जिला मुख्यालय के इन गांवों तक मिनी बसें चलाने के लिए वरिष्ठों ने जिला प्रशासन के समक्ष तीन साल पहले प्रस्ताव रखा था, लेकिन कुछ नहीं हो पाया।

ये पंचायतें अभी भी रोडवेज सेवाओं से वंचित

पंस पंचायतें वंचित पंचायतें

बड़ीसादड़ी 23 14

बेगूं 31 17

भदेसर 25 10

भैंसरोडगढ़ 25 17

भूपालसागर 19 12

चित्तौड़गढ़ 39 24

डूंगला 26 16

गंगरार 21 11

कपासन 23 15

निम्बाहेड़ा 35 25

राशमी 23 8

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