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समर्पण|आश्रम के लिए आज दान करेंगी अपना घर

3 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़ | तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा। आरती की ये पंक्तियां सोमवार को आरणी गांव में उदाहरण बन जाएंगी। जब 70 वर्षीय कंकूबाई सांखला करीब 15 लाख रुपए के अपने घर की चाबियां मंदिर के आश्रम के लिए सौंपेंगी। वे खुद भी इसमें भक्त या जरूरतमंद शरणार्थी के रूप में रहने आएंगी।

आरणी की कंकूबाई प|ी भंवरलाल सांखला के पति का निधन दो साल पहले हो गया। उनके कोई संतान नहीं है। उन्होंने अपना घर मंदिर को दान करने का मानस बनाया है। उन्होंने तीन महीने पहले घर की रजिस्ट्री गांव के श्रीगोपाल नृसिंहद्वारा मंदिर के नाम करा दी। अब वे सोमवार को समारोह पूर्वक अपना मकान मंदिर के लिए सौंप देंगी। पूर्व संध्या पर रविवार को भजन संध्या करवाई गई। सोमवार को ब्रह्मभोज व प्रसादी होगी। इन सबका खर्चा भी कंकूबाई वहन कर रही हैं। गांव के बीच यह मकान करीब 15 लाख रुपए का है।

ताकि मरने के बाद पुण्य कार्य में काम आए... कंकूबाई का कहना है कि वे अधिकांश समय कपासन में अपने भाई के पास रहेंगी। गांव आने का मन हुआ तो इसी घर में चलने वाले आश्रम में रहेंगी। फिलहाल घर का एक कमरा उनके लिए रिजर्व रहेगा। उनका सोच है कि मरने के बाद घर का दुरुपयोग न हो और यह अच्छे कार्यक्रमों की स्थली बने। आरणी गांव में इस मंदिर का नाम नृसिंहद्वारा है। कंकूबाई के अनुसार नाम के अनुरूप आश्रम भी होना चाहिए, लेकिन जगह की कमी थी। इसलिए मैंने घर भेंट किया। अब यह नृसिंहद्वारा आश्रम कहलाएगा।

पट्टिका लगवाई, उद‌्घाटन भी किया... कंकूबाई के मकान पर नृसिंहद्वारा आश्रम की पट्टिका भी लग गई है। जिसका विमोचन मंदिर महंत श्यामदास के सानिध्य में किया गया। चांदमल टेलर, माधवलाल नांगला, भैरू जाट, प्रेम शंकर पारीक, भूरालाल टेलर, जगदीश चंद्र लोहार, मुकेश रतन सुखवाल आदि ग्रामीण उपस्थित थे।

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सेवा|20 वर्ष से राहगीरों को निशुल्क पिला रही पानी

कपासन | सदमा कितना ही गहरा हो, दूसरों की सेवा करके भी उससे उभरा जा सकता है। बूरियों का खेड़ा निवासी 65 वर्षीय कंकूबाई बंजारा यही कर रहीं हैं। पिता और भाई की मौत के सदमे से उभरने के लिए उन्होंने 20 वर्ष पूर्व प्याऊ लगाकर लोगों को पानी पिलाना शुरू किया जो अब तक जारी है। वे हर गर्मी में तीन महीने गांव से एक किमी दूर सड़क किनारे प्याऊ लगाती हैं। इसके लिए रोज इतनी ही दूरी से पानी लाती हैं और राहगीरों को खुद पिलाती हैं। कपासन-शनि महाराज वाया हथियाना मार्ग के पास बूरियों का खेड़ा (शंभूपुरा) है। यहां से एक किमी दूर सड़क पर लगी एक प्याऊ तेज गर्मी में आते जाते लोगों का गला तर करने का जरिया है। कंकू प|ी मूलचंद बंजारा हर साल गर्मी में पेड़ की छांव में मटके लगा पानी पिलाने का काम करती हैं। अब बुजुर्ग हो जाने के कारण एक किलोमीटर दूर से पानी लाने में परेशानी आती है, ऐसे में लोग उनकी मदद करते हैं। कंकूबाई प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक की प्याऊ पर लोगों को निशुल्क पानी पिलाती हैं। अब उम्र बढ़ने के साथ कंकूबाई को एक किलोमीटर से पानी लाने में कुछ परेशानी हाेने लगी है, लेकिन उन्होंने निरंतरता नहीं तोड़ी।

पिता व भाई की मौत का सदमा बना सेवा का जज्बा... वार्डपंच रह चुकीं कंकुबाई ने बताया कि 20 वर्ष पूर्व पिता का निधन हुआ। उसके 10 माह बाद ही छोटे भाई की भी अकाल मौत हो गई। इस सदमे में वे उनको याद कर रोती रहती थीं। परिजनों व ग्रामवासियों ने सदमे से उबारने के लिए उन्हें गांव के पास से गुजर रहे मुख्य मार्ग पर प्याऊ लगा जल सेवा के लिए बिठा दिया। कहा कि प्यासे को पानी पिलाने से पिता व भाई की आत्मा को शांति मिलेगी। पहली गर्मी में ढाई महीने प्याऊ लगाने पर यह काम उन्हें ऐसा रास आया कि अब तक छोड़ा नहीं। कहती हैं कि जब तक हाथ पांव चल रहे हैं वे पिता व भाई की याद में यह सेवा जारी रखेगी।

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