भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़
उपनगरीय क्षेत्र मधुवन कॉलोनी में हाथीकुंड पर श्रीरामचरित मानस दिव्य ज्ञान महोत्सव जारी है। श्रीनीलकंठ महादेव महोत्सव समिति व समस्त धर्मप्रेमी मधुवन वासियों की आरे से महोत्सव में कथा वाचन करते हुए पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी जावद ने विवाह में होने वाले रीति-रिवाजों को समझाते हुए उनका महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि पाणिग्रहण का मतलब पाणि यानी एक-दूसरे के हाथों का मिलन है। विवाह में होने वाले सभी रिवाजों का अपना महत्व है। शादी के गीतों में वर पक्ष के धैर्य, सहनशीलता की परख के लिए गालियां दी जाती हैं। वेदों के अनुसार विवाह में चार परिक्रमा (फेरों) का ही उल्लेख है। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष इन चार फेरों में से पहले तीन फेरों में वधु आगे रहती है। पहला फेरा धर्म का होता है। धर्म की पालना के कारण ही उसे धर्मप|ी कहा गया है। दूसरा फेरा अर्थ का है। नारी अपनी संपत्ति को बचा के रखती है। अपने पति से लिए पैसों में से कुछ अंश बचा के चुपचाप रखती है, ताकि संकट में काम आए। तीसरा काम का फेरा, ज्यादा काम करना वधू का ही होता है। संसार चलाना, अपने पराए से व्यवहार बनाए रखना। चौथा फेरा मोक्ष का। चौथे फेरे में वधू-वर से पीछे हो जाती है कि हे पतिदेव मेरा मोक्ष तो आपके ही हाथों में है। नारी की पीड़ा को समझना बहुत कठिन है। नारी की महिमा करते हुए कहा कि नारी नर की खान, नारी से पैदा हुए राम, श्रीकृष्ण भगवान, नारी के आंचल में दूध, आंखों में पानी, लेकिन युगों युगों से इसकी परवाह किसी ने नहीं की। संत ने कहा कि सभी जीव में राम का वास है। तुलसी माता का महत्व भी बताते हुए कहा कि सभी से प्रेम करो। इस कलियुग में प्रेम ही सब से बड़ा मंत्र है। प्रवक्ता ने बताया कि व्यास गादी पर बिराजित पंडित त्रिपाठी का व्यास पूजन दिनेश आगाल ने किया। कमलेश आगाल, डा. योगेश व्यास, शंभूलाल आमेटा, कैलाशचंद्र पाराशर, श्यामलाल शर्मा विजयपुर वाले, अमरचंद व्यास, रामप्रसाद आगाल़, प्रेमदेवी आगाल, अनिल भटनागर, प्रभा शुक्ला, कविता गुप्ता, सुनीता आगाल, रामपाल गदिया, ओमप्रकाश चतुर्वेदी, कनकलता पाराशर, गोविंद जाट इत्यादि ने अभिनंदन किया। इधर शिवलाल शर्मा विजयपुर ने बताया कि कथा महोत्सव प्रतिदिन शाम सवा सात बजे से रात साढ़े दस बजे तक आयोजित हो रहा है।