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ब्लड बैंक में 162 यूनिट, रोज खपत 55, नहीं है निगेटिव ग्रुप

3 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़ | जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड संकट है। ब्लड आपूर्ति कम व सप्लाई अधिक है। नेगेटिव ब्लड ग्रुप तो न के बराबर है। करीब 1200 यूनिट की क्षमता वाले इस ब्लड बैंक मेंं आम तौर पर 500 से 600 यूनिट ब्लड रहता है। अभी मात्र 162 यूनिट ही है।

प्रतिदिन इस बैंक से 50 से 55 यूनिट ब्लड मरीजों को चढ़ाया जाता है, लेकिन अभी 25 यूनिट ही डोनर व रिप्लेसमेंट से मिल रहा है। 15 मई से पहले 20 दिन तक कोई कैंप नहीं लगा। इस कारण पांच दिन पहले तो 80 यूनिट ही ब्लड शेष था। इसके बाद कैंप लगने से अभी 162 यूनिट ब्लड है। खून की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, नेगेटिव में ग्रुप तो ब्लड न के बराबर है।

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को रक्तदाताओं का इंतजार, खपत के मुकाबले आधा रक्त ही संग्रह हो रहा है

जानिए ब्लड वितरण एवं आपूर्ति

महीना वितरण आपूर्ति

जनवरी 1114 1460

फरवरी 1120 773

मार्च 1282 1360

अप्रैल 1378 1089

20 मई तक 880 735

किस ग्रुप का कितना ब्लड बचा है बैंक में

ग्रुप पॉजीटिव नेगेटिव

ओ 45 01

ए 03 02

बी 20 04

ए बी 05 01

नोट: रविवार को हुए कैंप के 81 यूनिट प्लस के बाद अभी 162 यूनिट ब्लड स्टोर में

गत 25 अप्रैल से 15 मई तक कोई रक्तदान शिविर नहीं लगा है। इस कारण ब्लड एकत्रित नहीं हो सका। एक बार तो स्टोर में मात्र 80 यूनिट ही रह गया। अब तीन-चार दिन से वापस कैंप लगने शुरू हुए तो स्टोरेज 162 यूनिट तक पहुंचा, लेकिन स्थिति सुधार के लिए लगातार और शिविरों की जरूरत है। कारण, नेगेटिव ग्रुपों में तो एक-एक यूनिट ही ब्लड है। गर्मियों में रक्त की अधिक आवश्यकता होती है।- डॉ. अनिल सैनी, ब्लड बैंक इंचार्ज

मरीज की जान बचाने के लिए भीलवाड़ा जाना पड़ रहा ... एक दिन पहले महिला एवं बाल अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक महिला को नेगेटिव ग्रुप के ब्लड की आवश्यकता पड़ी। ब्लड बैंक में ब्लड नहीं था। डोनर ढूंढा, लेकिन वो भी नहीं मिला। भीलवाड़ा के अरिहंत अस्पताल से ब्लड लेकर आना पड़ा। ऐसे और उदाहरण भी सामने आ रहे हैं।

भास्कर नॉलेज : शरीर में 5 लीटर ब्लड यानी 12-16 ग्राम हीमोग्लोबिन, 3 से कम होने पर मौत... एमबी अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. रमेश जोशी ने बताया कि शरीर में औसत 5 लीटर ब्लड रहता है। 5 लीटर खून को लगभग 12 से 16 ग्राम हीमोग्लोबिन में मापा जाता है। यह स्तर 2 से 2.5 ग्राम तक गिर जाने पर रोगी की मौत हो जाती है। ऐसे मामले अक्सर किसी हादसे में सामने आते हैं।

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