भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़
शहर के उपनगरीय क्षेत्र मधुवन कालोनी में हाथीकुंड पर आयोजित हो रहे श्रीरामचरित मानस महोत्सव में छठे दिन श्रीराम जन्मोत्सव के प्रसंग का मंचन हुआ। श्रीनीलकंठ महादेव महोत्सव समिति सहित धर्मप्रेमी मधुवन वासियों ओर से आयोजित कथा महोत्सव में कथा वाचक पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी ने श्रीराम जन्मोत्सव को चरितार्थ करते हुए भजनों के साथ उसका महत्व बताया।
प्रारंभ में सीताराम व राधेश्याम की वंदना सुनाई। महोत्सव के तहत नियमित रूप से रामायण पाठ पंडित मुरलीधर द्वारा किया जा रहा है। इधर कथा में श्रीरुद्रदेव त्रिपाठी ने बताया कि पुण्य का बखान कभी भी अपने मुख से नहीं करना चाहिए। हमेशा संतों के सानिध्य में रहना चाहिए। संतों के सानिध्य में रहने से अच्छी संगति बनी रहती हैं। आध्यात्मिक सुख पुण्य व दान करने से ही प्राप्त होते हैं।
इधर प्रवक्ता डाॅ. योगेश व्यास व अनिल भटनागर ने बताया कि व्यास गादी पर विराजित पंडित त्रिपाठी का व्यास पूजन व आरती दिनेश आगाल, कमलेश आगाल, मुकेश आगाल, सुनीता, आदि द्वारा की गई। शिवलाल शर्मा विजयपुर, सुखलाल हेडा, नरेंद्र मालू, ओमप्रकाश सुखवाल, झमकलाल, सीताराम मेनारिया, कैलाशचंद्र पाराशर, हरीश धुत, प्रभावती शुक्ला, कविता गुप्ता, सरस्वती मेनारिया, कनकलता पाराशर, महेंद्र जोशी, रूकमणि मेनारिया, उषा देवी, सुशीलादेवी जोशी, सुमन ओझा, समता निगम, पार्षद जगदीश जांगिड़, एसके सचान, भगत सुखवाल, जगदीश काबरा, संतोषनाथ योगी, चेतन गौड़, बंशीलाल मूंदड़ा, जानकीलाल गदिया ने आरती की।

मर्यादा में रहकर दशरथ पुत्र बने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम : आचार्य
शहर के गांधीनगर में रामकुई स्थान पर आयोजित श्रीराम कथा में व्यास पीठ की आरती करते हुए श्रद्वालु
चित्तौड़गढ़ | शहर के गांधीनगर रामकुई मंदिर परिसर में आयोजित रामकथा के छठे दिन अयोध्या निवासी आचार्य दशरथ महाराज ने कथा श्रवण करवाते राम-जानकी विवाह सहित राम राज्याभिषेक, वनवास आदि प्रसंग सुनाए। महाराज ने भगवान श्रीराम- सीता विवाह के बाद अयोध्या नगरी में प्रवेश करने पर अयोध्या नगर वासियों द्वारा उत्साह उमंग के साथ स्वागत करने का प्रसंग सुनाया।
कथा के दौरान राजा दशरथ द्वारा अपने राज्य को संभालने के लिए भगवान श्रीराम के समक्ष रखे प्रस्ताव के प्रसंग को बताया। भरत को राज्य अभिषेक व श्रीराम को 14 साल के वनवास के प्रसंग पर श्रोताओं की आंखें सजल हो गई। महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम अपने पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे। इसीलिए अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राज गद्दी छोड़ कर वनवास चले गए। इधर आरती में बडी संख्या में श्रद्घालुओं ने भाग लिया।
मधुवन में चल रही कथा में पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी के सानिध्य में मनाया मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव, जल संरक्षण की शपथ दिलवाई
मधुवन में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में मौजूद श्रोता।