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खेळियां रीती, आवारा मवेशियों का जीवन संकट में, सब मौन

3 वर्ष पहले
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गर्मियों में पानी की किल्लत होना और लोगों के पानी की मांग करना एक आम बात हो चुकी है। लोगों की मांग पर प्रशासन भी उनके लिए पानी की व्यवस्था करना अपनी पहली प्राथमिकता में रखता है, लेकिन प्यासे मवेशियों की ओर न तो प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न ही भामाशाहों का। इस कारण शहर क्षेत्र में आवारा मवेशी अपनी प्यास गंदी नालियों का पानी पीकर बुझा रहे है। इससे कई मवेशी तो गंदा पानी पीने से बीमार होकर काल के ग्रास बन रहे है।

हालांकि पहले शहर के भामाशाहों को मनुष्य ही नहीं मवेशियों की चिंता भी उतनी ही रहती थी। इसलिए जगह- जगह पर भामाशाहों के मवेशियों के पानी पीने के लिए खेलियों का निर्माण करवाया गया था। इनमें बाकायदा सफाई और पानी भरने का काम नियमित चलता था। खेलियों को पानी से भरने का काम शहर में जलदाय विभाग की पाइप लाइन डालने के बाद भी कई वर्षाें तक चलता रहा। इसके बाद जैसे- जैसे पानी की किल्लत होना शुरू हुई, उसी के साथ ही एक के बाद एक खेली सूखी रहना शुरू हो गई। खेली का रखरखाव नहीं होने के कारण धीरे-धीरे वे जर्जर हालत में आ गई और कुछ तो टूट फूट कर नष्ट हो चुकी है। अब शहर में कुछ खेलियां ही शेष है, लेकिन उनके रखरखाव को ठीक करवाने और उनमें पानी डलवाने वाले लोग नहीं रहे। एेसे में मवेशियों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है।

खेलियों के आगे हो गया अतिक्रमण

प्रशासन के ध्यान नहीं देने के कारण अब तो जो खेलियां बची है, उनके आगे तथा आसपास लोगों ने ठेले व थडियां लगाकर अतिक्रमण कर लिया। इस कारण मवेशी तो क्या, आम आदमी को भी खेलियां दिखाई नहीं देती है।

सैकड़ों गो वंश घूम रहे शहर में आवारा

शहर में अन्य मवेशियों के अलावा सैंकड़ों की तादाद में गो वंश आवारा घूम रहे है। इनके चारे-पानी की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

जरूरत है भामाशाहों के आगे आने की

शहर वासियों ने मवेशियों के पीने के पानी को लेकर चिंता जताई है। बताया कि कई स्थानों पर मकानों के बाहर कुछ लोग पानी की टंकी रखकर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करते है, लेकिन जिन स्थानों पर मवेशियों की तादाद अधिक रहती है और पहले से खेली बनी हुई है, उनके रख रखाव व पानी डलवाने के लिए भामाशाहों को आगे आने की जरूरत है।

जलदाय विभाग को पाबंद करेंगे

एसडीएम प्रियव्रत सिंह चारण ने बताया कि मवेशियों के पीने के पानी की व्यवस्था होना नितांत जरूरी है। इसलिए वे नगरपालिका व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर जल्द क्षेत्र की क्षतिग्रस्त खेलियों को ठीक करवाने तथा उनमें पानी डलवाने के लिए जलदाय विभाग को पाबंद किया जाएगा। इससे खेलियां पानी से नियमित भर सके।

चौमू. बजरंग पाेल के पास बनी खेली, जो जर्जर होने के साथ सूखी पड़ी है।

कार्यालय संवाददाता | चौमू

गर्मियों में पानी की किल्लत होना और लोगों के पानी की मांग करना एक आम बात हो चुकी है। लोगों की मांग पर प्रशासन भी उनके लिए पानी की व्यवस्था करना अपनी पहली प्राथमिकता में रखता है, लेकिन प्यासे मवेशियों की ओर न तो प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न ही भामाशाहों का। इस कारण शहर क्षेत्र में आवारा मवेशी अपनी प्यास गंदी नालियों का पानी पीकर बुझा रहे है। इससे कई मवेशी तो गंदा पानी पीने से बीमार होकर काल के ग्रास बन रहे है।

हालांकि पहले शहर के भामाशाहों को मनुष्य ही नहीं मवेशियों की चिंता भी उतनी ही रहती थी। इसलिए जगह- जगह पर भामाशाहों के मवेशियों के पानी पीने के लिए खेलियों का निर्माण करवाया गया था। इनमें बाकायदा सफाई और पानी भरने का काम नियमित चलता था। खेलियों को पानी से भरने का काम शहर में जलदाय विभाग की पाइप लाइन डालने के बाद भी कई वर्षाें तक चलता रहा। इसके बाद जैसे- जैसे पानी की किल्लत होना शुरू हुई, उसी के साथ ही एक के बाद एक खेली सूखी रहना शुरू हो गई। खेली का रखरखाव नहीं होने के कारण धीरे-धीरे वे जर्जर हालत में आ गई और कुछ तो टूट फूट कर नष्ट हो चुकी है। अब शहर में कुछ खेलियां ही शेष है, लेकिन उनके रखरखाव को ठीक करवाने और उनमें पानी डलवाने वाले लोग नहीं रहे। एेसे में मवेशियों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है।

खेलियों के आगे हो गया अतिक्रमण

प्रशासन के ध्यान नहीं देने के कारण अब तो जो खेलियां बची है, उनके आगे तथा आसपास लोगों ने ठेले व थडियां लगाकर अतिक्रमण कर लिया। इस कारण मवेशी तो क्या, आम आदमी को भी खेलियां दिखाई नहीं देती है।

सैकड़ों गो वंश घूम रहे शहर में आवारा

शहर में अन्य मवेशियों के अलावा सैंकड़ों की तादाद में गो वंश आवारा घूम रहे है। इनके चारे-पानी की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

जरूरत है भामाशाहों के आगे आने की

शहर वासियों ने मवेशियों के पीने के पानी को लेकर चिंता जताई है। बताया कि कई स्थानों पर मकानों के बाहर कुछ लोग पानी की टंकी रखकर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करते है, लेकिन जिन स्थानों पर मवेशियों की तादाद अधिक रहती है और पहले से खेली बनी हुई है, उनके रख रखाव व पानी डलवाने के लिए भामाशाहों को आगे आने की जरूरत है।

जलदाय विभाग को पाबंद करेंगे

एसडीएम प्रियव्रत सिंह चारण ने बताया कि मवेशियों के पीने के पानी की व्यवस्था होना नितांत जरूरी है। इसलिए वे नगरपालिका व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर जल्द क्षेत्र की क्षतिग्रस्त खेलियों को ठीक करवाने तथा उनमें पानी डलवाने के लिए जलदाय विभाग को पाबंद किया जाएगा। इससे खेलियां पानी से नियमित भर सके।

कार्यालय संवाददाता | चौमू

गर्मियों में पानी की किल्लत होना और लोगों के पानी की मांग करना एक आम बात हो चुकी है। लोगों की मांग पर प्रशासन भी उनके लिए पानी की व्यवस्था करना अपनी पहली प्राथमिकता में रखता है, लेकिन प्यासे मवेशियों की ओर न तो प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न ही भामाशाहों का। इस कारण शहर क्षेत्र में आवारा मवेशी अपनी प्यास गंदी नालियों का पानी पीकर बुझा रहे है। इससे कई मवेशी तो गंदा पानी पीने से बीमार होकर काल के ग्रास बन रहे है।

हालांकि पहले शहर के भामाशाहों को मनुष्य ही नहीं मवेशियों की चिंता भी उतनी ही रहती थी। इसलिए जगह- जगह पर भामाशाहों के मवेशियों के पानी पीने के लिए खेलियों का निर्माण करवाया गया था। इनमें बाकायदा सफाई और पानी भरने का काम नियमित चलता था। खेलियों को पानी से भरने का काम शहर में जलदाय विभाग की पाइप लाइन डालने के बाद भी कई वर्षाें तक चलता रहा। इसके बाद जैसे- जैसे पानी की किल्लत होना शुरू हुई, उसी के साथ ही एक के बाद एक खेली सूखी रहना शुरू हो गई। खेली का रखरखाव नहीं होने के कारण धीरे-धीरे वे जर्जर हालत में आ गई और कुछ तो टूट फूट कर नष्ट हो चुकी है। अब शहर में कुछ खेलियां ही शेष है, लेकिन उनके रखरखाव को ठीक करवाने और उनमें पानी डलवाने वाले लोग नहीं रहे। एेसे में मवेशियों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है।

खेलियों के आगे हो गया अतिक्रमण

प्रशासन के ध्यान नहीं देने के कारण अब तो जो खेलियां बची है, उनके आगे तथा आसपास लोगों ने ठेले व थडियां लगाकर अतिक्रमण कर लिया। इस कारण मवेशी तो क्या, आम आदमी को भी खेलियां दिखाई नहीं देती है।

सैकड़ों गो वंश घूम रहे शहर में आवारा

शहर में अन्य मवेशियों के अलावा सैंकड़ों की तादाद में गो वंश आवारा घूम रहे है। इनके चारे-पानी की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

जरूरत है भामाशाहों के आगे आने की

शहर वासियों ने मवेशियों के पीने के पानी को लेकर चिंता जताई है। बताया कि कई स्थानों पर मकानों के बाहर कुछ लोग पानी की टंकी रखकर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करते है, लेकिन जिन स्थानों पर मवेशियों की तादाद अधिक रहती है और पहले से खेली बनी हुई है, उनके रख रखाव व पानी डलवाने के लिए भामाशाहों को आगे आने की जरूरत है।

जलदाय विभाग को पाबंद करेंगे

एसडीएम प्रियव्रत सिंह चारण ने बताया कि मवेशियों के पीने के पानी की व्यवस्था होना नितांत जरूरी है। इसलिए वे नगरपालिका व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर जल्द क्षेत्र की क्षतिग्रस्त खेलियों को ठीक करवाने तथा उनमें पानी डलवाने के लिए जलदाय विभाग को पाबंद किया जाएगा। इससे खेलियां पानी से नियमित भर सके।

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