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जांभाणी हरिकथा : पाहल लेकर कुरीतियां त्यागने का संकल्प लिया

3 वर्ष पहले
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सदराम की बेरी में भगवान जम्भेश्वर की 9वीं जाम्भाणी हरिकथा का समापन शनिवार को मेले के साथ हुआ। इस दौरान सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों ने आयोजित यज्ञ में घी व नारियल की आहुति देकर पाहल ग्रहण किया। गुरु जंभेश्वर मंदिर के प्रांगण में स्थित कुंड में आचार्य डॉ. गोवर्धनराम शिक्षा शास्त्री, स्वामी हरिदास, स्वामी भगवान दास, बलदेवानंद, हरि विष्णु दास ने भगवान जांभोजी की वाणी के 120 शब्दों से यज्ञ एवं पाहल संपन्न करवाया। हजारों श्रद्धालु ने पाहल ग्रहण कर कुरीतियों को त्यागने का संकल्प दोहराते हुए सुकाल व खुशहाली की कामना की। इस दौरान पक्षियों के चुगे के लिए सैकड़ों लोगों ने बाजरी भेंट की। इस दौरान मुख्य अतिथि चौहटन तहसीलदार तुलसाराम विश्नोई ने कहा कि जांभोजी के 29 नियमों का निष्ठा से पालन करें। उन्होंने बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा दिलाने व सामाजिक कुरीतियों को त्यागने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि रुघनाथराम खीचड़ ने समाज के लोगों को नशे का त्याग करने की अपील की। जगदीश ढाका चौहटन, भाजपा मंडल अध्यक्ष पुरखाराम करड़ा, रामजीवन जांगू पूर्व सरपंच, लाखाराम थोरी व्याख्याता, आसुलाल खिलेरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। शुक्रवार रात को हवन से पूर्व भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें सोमराज मांजू एंड पार्टी ने जांभोजी के व अन्य भजनों की प्रस्तुतियां दी। समिति के साजनराम जांगू ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जम्भेश्वर सेवा संस्थान के हरजेश थोरी, मोहनलाल खीचड़, अशोक खिलेरी, पूनमाराम खिलेरी,लाधुराम जांगू, मांगीलाल थोरी, बालाराम खिलेरी आदि मौजूद रहे। जंभेश्वर मेले में मंदिर परिसर को प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया। पूरे मंदिर परिसर में जम्भेश्वर सेवक दल के सदस्यों ने मेले में लोगो को समझाइश के माध्यम से जागरूक किया और मेले को पॉलीथिन मुक्त रखा गया। इस दौरान मेले में हाट बाजार लगा। जिसमें महिलाओं ने जमकर खरीदारी की।

सेड़वा.सदराम की बेरी में जांभाणी हरिकथा के समापन पर हवन के दौरान घी व नारियल की आहुतियां देते लोग।

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