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अखंड सुहाग के लिए की वट पूजा

3 वर्ष पहले
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चौपारण | प्राचीन परंपरा के अनुसार सुहागिनों ने उपवास कर अपने पति की लंबी उम्र एवं सुखद दांपत्य जीवन यापन करने के लिए वट वृक्ष की षोड्षोपचार के साथ पूजा-अर्चना की। सत्यवान और सावित्री के जीवन काल से आरंभ हो कर यह वट वृक्ष पूजा की परंपरा चलती आ रही है। सावित्री ने अपने पति सत्यवान के मरणोपरांत यम के बंधन से मुक्त कराकर पुन: उसी मृत शरीर को पुनर्जीवित की थी। इसी पौराणिक परंपरा को व्रतियों की धार्मिक भावना है कि आज के दिन भोमवस्या की युति से इस अमावस्या की महिमा विशेष है। वट पूजा करने वालों में रेणु देवी, देवंती कुमारी, पूनम देवी, शकुंतला देवी, चिंता देवी, सावित्री देवी, माधुरी देवी सहित कई लोग शामिल थी।

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