डीटीओ का दावा-22 बसों पर कार्रवाई की, हकीकत में 8 के परमिट जब्त किए, 14 को रोका तक नहीं, आज भी दौड़ रही हैं
जिले में निजी बसों के अवैध संचालन में परिवहन विभाग की मिलीभगत सामने अाई है। क्योंकि हाईकोर्ट ने जिन 22 बसों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, विभाग ने उनमें से आठ बसों पर ही कार्रवाई की। 14 बसों को रुकवाया तक नहीं। उनकी जगह दूसरी 14 बसों के खिलाफ कागजी कार्रवाई कर रिपोर्ट सबमिट कर दी। भास्कर की पड़ताल में ये खुलासा हुआ है।
बता दें कि एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 26 फरवरी को परिवहन विभाग को बीकानेर से नापासर, डूंगरगढ़, लाछड़सर, सरदारशहर व बीकानेर, डूंगरगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर तथा सरदारशहर से डूंगरगढ़, नापासर, बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध बस संचालन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें बिना समय सारिणी के चलने वाले वाहन भी शामिल थे। इसकी पालना में अपर परिवहन आयुक्त ने उक्त तीनों रूट पर संचालित 22 बसों के खिलाफ कार्रवाई कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। चूरू डीटीओ ने इनमें से 8 बसों के खिलाफ कार्रवाई की। इनके परमिट तक जब्त किए, लेकिन बाकी 14 बसों की जगह दूसरी 14 बसों पर कागजी कार्रवाई कर रिपोर्ट आरटीओ को भेज दी। इतना ही नहीं परमिट के अनुसार भी बसों का संचालन नहीं हो रहा। भास्कर ने तीन दिन तक कई रूटों पर शिकायत वाली अवैध बसों का पीछा किया। वीडियोग्राफी भी की। पड़ताल में सब कुछ अवैध निकला। हकीकत ये थी कि हाल ही में परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई तक की गई बसें सड़कों पर फर्राटे से दौड़ रही थी। किसी के पास परमिट नहीं था तो कोई बिना आरसी के ही बस चला रहा था। भास्कर के पास सभी बसों के परमिट रूट के कागजात हैं।
भास्कर ने तीन दिन तक कई रूटों पर शिकायत वाली बसों का पीछा किया, परमिट के अनुसार चलती नहीं पाई गईं बस
एक बस, जिसका परिमट, आरसी, इंश्योरेंस, लाइसेंस सब जब्त हैं, लेकिन फिर भी सरदारशहर-डूंगरगढ़ के बीच रोज चलती है
भास्कर स्टिंग के ये तीन सबूत, जिनमें सामने आई अनियमिताएं
केस-1 : आरजे 07 पीए 6465 का परमिट सरदारशहर से रतनगढ़-लाछड़सर है। इसका संचालन तारानगर से बीकानेर हो रहा है। सरदारशहर से बीकानेर के बीच के गांवों में सीधे राष्ट्रीयकृत मार्ग पर चल रही है। सरदारशहर से बीकानेर ग्रामीण मार्ग है, जबकि यह राष्ट्रीयकृत मार्ग पर चल रही है। भास्कर ने ये तस्वीर तारानगर के बुचावास से ली गई, जो परमिट के अनुसार नहीं है।
अवहेलना | परमिट कहां से कहां तक और चलाते हैं दूर तक
भास्कर ने परिवहन विभाग की ओर से 22 बसों पर की गई कार्रवाई को ही जांच में दायरे में लिया। आरजे 10 पीए 6293 का परमिट सरदारशहर से डूंगरगढ़ का है, जबकि संचालित सरदारशहर से बीकानेर तक थी। इसी प्रकार आरजे 13 पीए 5668, आरजे 07 पी 7813 व आरजे 07 पीए 8625 का परमिट बीकानेर से रतनगढ़, रतनगढ़ से लाछड़सर व लाछड़सर से सरदारशहर का है, जबकि ये बसें बीकानेर से डूंगरगढ़ व डूंगरगढ़ से सरदारशहर तक चलती मिली। आरजे 10 पीए 5952 का परमिट भादरा से बीकानेर, संचालन सरदारशहर से मैलूसर से भालेरी पर है, जो राष्ट्रीयकृत मार्ग पर संचालित है। आरजे 07 पीए 6465 का परमिट सरदारशहर से रतनगढ़-लाछड़सर है, जबकि बस तारानगर से बीकानेर चल रही है। आरजे 07 पीए 2200 और आरजे 10 पीए 3421 का परमिट बीकानेर से नापासर, नापासर से डूंगरगढ़, डूंगरगढ़ से लाछड़सर व लाछड़सर से सरदारशहर है, संचालन बीकानेर तक हो रहा है।
22 महीने से शिकायत के बाद भी कुछ नहीं हुआ तब ली कोर्ट की शरण
केस-2 : बस नंबर आरजे 10 पीए 5952 की ये तस्वीर सरदारशहर तहसील के गांव मैलूसर से ली गई। परमिट भादरा से बीकानेर तक का है। सरदारशहर से भालेरी के बीच मैलूसर जा रही है, जो राष्ट्रीयकृत मार्ग पर संचालित है। आगे डूंगरगढ़ से धंधेऊ, सेरुणा, नौरंगसर भी परमिट में नहीं है, जहां भी चल रही है। लाइसेंस व आरसी जब्त के बाद भी सड़क पर दौड़ रही है।
सादुलपुर तहसील के गांव श्योपुरा के विक्रमपाल पुत्र दलीपकुमार ने सबसे पहले चार अगस्त 2016 को अतिरिक्त परिवहन आयुक्त जयपुर को सादुलपुर से बीकानेर मार्ग पर अवैध बसों के संचालन की शिकायत की। बाद में 28 दिसंबर 2017 को सीएम पोर्टल, पीएम पोर्टल व परिवहन मंत्री के पोर्टल पर अवैध गाड़ियों के संचालन के बारे में बताया। एक जनवरी 2018 को फिर पीएम पोर्टल पर शिकायत की। इस दरमियान बार-बार चूरू डीटीओ को शिकायत की गई। कहीं से कोई जवाब और समाधान नहीं होने पर 23 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट जयपुर का दरवाजा खटखटाया। 23 फरवरी को कोर्ट ने सेक्रेटरी स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, सेक्रेटरी कम ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, आरटीओ सीकर व चूरू डीटीओ को अवैध गाड़ियों का तीन हफ्ते में संचालन बंद करने के आदेश किए थे। इतनी प्रक्रिया के बाद भी विक्रम का कहना है कि इतनी शिकायत करने के बाद भी उसे आज तक राहत नहीं दी गई। आज भी यूं ही गाड़ियों का संचालन हो रहा है। परिवहन विभाग की मिलीभगत के चलते अवैध बसों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। सरकार को भी नुकसान हो रहा है और परमिट शुदा व सही बस संचालकों को घाटा हा़े रहा है।
केस-3 : बस नंबर आरजे 07 पीए 8382 की ये तस्वीर तारानगर तहसील के गांव बुचावास से ली गई। परमिट के हिसाब से डूंगरगढ़-सरदारशहर, सरदारशहर-डूंगरगढ़ बीकानेर है। बुचावास इस रूट में नहीं आता। बस तारानगर से सीधे बीकानेर चल रही है। तारानगर से बुचावास, तोगावास, मैलूसर, आशासर, आडसर, भौजूसर कुंडिया, धंधेऊ भी चल रही है, जो परमिट में नहीं है।
हकीकत | कार्रवाई के दूसरे ही दिन फिर दौड़ने लगी बसें
कोर्ट ने तीन हफ्ते में अवैध बसों का संचालन बंद करने के लिए कहा था। ये भी कहा था कि पुलिस की जरूरत पड़े तो ली जाए। फिर परिवहन विभाग ने इन अवैध बसों पर कार्रवाई कर चालान काटे, लाइसेंस, आरसी आदि जब्त करने की कार्रवाई की। दूसरे ही दिन बसों का वापस उसी तरह संचालन शुरू हो गया। गैर अधिसूचित ग्रामीण मार्ग का परमिट के बाद वे राष्ट्रीयकृत मार्ग पर संचालित होती पाई गई। डीटीओ की रिपाेर्ट में हर अपराध की डिटेल लिखी गई, जिससे ये स्पष्ट भी हुआ है कि ये बसें अवैध संचालित हो रही हैं। आगे ये तक लिखा गया है कि धारा 86 की कार्रवाई प्रस्तावित है, जबकि आज तक कार्रवाई नहीं हुई। नियमानुसार धारा 86 में अवैध संचालन होता है तो एक माह के लिए परमिट निरस्त होता है, फिर भी बस संचालित होती है तो तीन महीने के लिए आरसी निरस्त होती है। कार्रवाई के बाद बसें रोड पर नहीं चल सकती।
डीटीओ दयाशंकर गुप्ता से सीधी बातचीत..
भास्कर : अवैध बसों की शिकायत की थी, उसका क्या हुआ?
डीटीओ : कार्रवाई की गई है।
भास्कर : हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की, आठ बसों को ही शामिल क्यों किया?
डीटीओ : रूटों की जांच करवाकर रिपोर्ट आरटीओ को भेज दी है। बाकी 14 वैध हैं, परमिट के अनुसार हो सकता है नहीं चल रही होंगी। कार्रवाई करेंगे।
भास्कर : कार्रवाई के बाद भी क्या बस सड़कों पर चल सकती हैं?
डीटीओ : इस तरह की अवैध बसें सड़कों पर नहीं चल सकती।
भास्कर : परमिट के अनुसार बसों का संचालन नहीं हो रहा?
डीटीओ : बस संचालक शॉर्टकट के चक्कर में इधर-उधर से निकल जाते होंगे।