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पहले चौकीदारी की, सब्जी बेची, अब मेडिकल स्टोर की आड़ में घरों में चला रहे अस्पताल, एड्स-कैंसर के इलाज के साथ कर रहे ऑपरेशन

3 वर्ष पहले
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चूरू जिले में सब्जी बेचने वाले और चौकीदारी का काम कर चुके युवा अब अपने अस्पताल चला रहे हैं। इनमें कोई पांचवीं तक पढ़ा लिखा है, तो कोई 12वीं पास है। वे कैंसर और एड्स के मरीजों का इलाज कर उन्हें ठीक करने का दावा भी करते हैं। इलाज के साथ ऑपरेशन भी कर लेते हैं।

हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े-खुलेआम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले इन फर्जी डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि चिकित्सा विभाग खुद स्वीकारता है कि जिले में 150 से ज्यादा फर्जी डॉक्टर हैं। असल में तो ये संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। पिछले दिनों सादुलपुर क्षेत्र में किराणा की दुकान चलाने वाले युवक को इलाज करते पकड़ा गया था। इसके बाद दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। जिले में करीब 20 फर्जी डॉक्टरों के पास पहुंचे। डॉक्टरों ने बाकायदा पर्ची लिखी। इलाज किया। हैरानी ये भी कि इन फर्जी डॉक्टरों ने बिना बीमारी वे दवाएं लिख दीं, जो सिर्फ फिजिशियन ही लिख सकते हैं। ये युवक महज 5वीं से 12वीं तक ही पढ़े लिखे हैं। फर्जी डिग्री और स्वास्थ्य कार्यकर्ता की डिग्री के आधार पर मेडिकल स्टोर खोलने की आड़ में अस्पताल चला रहे हैं। मेडिकल स्टोर के लाइसेंस भी किराये पर लिए हुए हैं। वे प्रतिदिन अपने अस्पताल में 40 से 50 मरीज देखते हैं। चौंकाने वाली बात तो ये है कि फर्जी झोलाछाप डॉक्टर पाइल्स आदि के ऑपरेशन भी कर देते हैं। निमोनिया, चर्म रोग, म्यादी बुखार और हार्ट के रोगी को भी सही करने का दावा करते हैं। स्टीरॉयड इंजेक्शन भी लगाते हैं, जो शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, लेकिन बाद में इसे खत्म कर देता है। कई गांवों में लोगों से बात की तो हर गांव में ऐसे फर्जी डॉक्टरों की बात सामने आई। चूरू तहसील के पीथीसर, झारिया, राणासर, दूधवाखारा और सादुलपुर के सेऊवा, ददरेवा, महलाणा बास सहित सरदारशहर व सुजानगढ़ के हर बड़े गांवों में बात करने पर पता लगा कि हर जगह दो से तीन झोलाछाप डॉक्टर रोगियों के साथ ठगी कर रहे हैं, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है।

केस-1

रोगी को देखता फर्जी डॉक्टर।

केस-2

चिकित्सा विभाग की नाकामी के 3 सबूत : दवा की दुकान खोलते हैं, फिर इलाज शुरू कर देते हैं

1. जिले में सैकड़ों ऐसे फर्जी डॉक्टर हर रोज रोगियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। महकमे की अनदेखी का नतीजा ये है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में व कमरे किराए पर लेकर खुलेआम ठगी कर रहे हैं।

2. चिकित्सा महकमे की आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक कई तहसीलों में इनकी संख्या 150 तक हैं, जो फर्जी क्लिनिक व स्टाेर चला रहे हैं।

3. ये झोलाछाप दवाई भी खुद दे रहे हैं। सबसे ज्यादा ठगी ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है। सुजानगढ़ व सरदारशहर इलाके में सबसे ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर हैं। समय-समय पर इनकी शिकायत भी चिकित्सा विभाग को मिलती है, लेकिन मामला रफा-दफा कर दिया जाता है।

सादुलपुर क्षेत्र में किराणा की दुकान चलाने वाले युवक को अस्पताल चलाते पकड़ा गया था, इसके बाद ‘दैनिक भास्कर’ रिपोर्टर ने खुद मरीज बनकर 3 दिन में ऐसे ही 20 से ज्यादा फर्जी डॉक्टरों को ढूंढ़ा, बीमारी बताकर दवाई तक दी पांचवीं से लेकर 12वीं तक पढ़े लिखे थे यह फर्जी डॉक्टर, बेखौफ मरीजों की जान से कर रहे हैं खिलवाड़

पहले बहनोई करते थे इलाज, उनके पास रहकर सीखा, खुद 10वीं पास है

दस्त रोगी को पानी में दो बूंद दवा पिलाई

चूरू के सुभाष चौक से नई सड़क रोड के रास्ते पर स्थित चांदसी हैल्थ केयर पर भास्कर रिपोर्टर पहुंचा। यहां हर तरीके के इलाज करवाने के रोगी बैठे थे। बड़े-बड़े बोर्ड लगा रखे हैं कि दाद, खाज, खुजली, मस्सा सहित अनेक रोग के उपचार किए जाते हैं। अस्पताल के अंदर एक बच्ची के चोट लगने पर मरहम पट्‌टी की जा रही थी और दवाई लिखकर सामने स्थित मेडिकल स्टोर पर मिलने की बात कही। रिपोर्टर ने पाइल्स की बीमारी बताई, क्योंकि आस-पास के लोगों ने बताया कि यह पाइल्स रोग का ऑपरेशन भी करता है। जांच के बाद इस फर्जी डॉक्टर ने बाकायदा खुद पर्ची पर दवाई लिखी। पूछा कि दवाई कहां मिलेगी, तो बोला कि सामने मेडिकल स्टोर है। चिकित्सा महकमे के अधिकारियों को जब दवाई लिखी पर्ची दिखाई तो उन्होंने कहा ये दवाई किसी भी सूरत में नहीं लिख सकता। वरुण कुमार रॉय पिछले छह-सात साल से ये क्लिनिक चला रहा है। इससे पहले इसका जीजा रोगियों को देखता था। मूलत: बंगाल का रहने वाला रॉय बहनोई के साथ रहकर काम सीखा। पहले यह वहां दूसरे काम करता था वहां। उनकी मौत के बाद खुद ही रोगियों को देखता है। मस्से आदि की कैंची से काटकर सर्जरी करता है। एंटीबायोटिक व पैन किल्लर सहित कई तरह की दवाइयां लिख देता है। यह दसवीं तक पढ़ा हुआ है। इसके बाद सीसीसीएच डिप्लोमा कर अपनी दुकानदारी शुरू कर दी, जो नियमानुसार गलत है। प्रतिदिन 30-40 रोगी यहां आते हैं।

सरदारशहर तहसील का गांव कालूसर। यहां एक कमरे में संचालित फर्जी क्लिनिक पर गए तो यहां लियाकत अली खां बैठा था। मूलत: चूरू का रहने वाला लियाकत नियमानुसार रोगी नहीं देख सकता। न मर्जी से दवाई दे सकता है। रोगी ने जब दस्त लगने व लू लगने की शिकायत बताई तो उसने बीपी इंस्ट्रूमेंट से चैकअप किया। फिर पेट पर हाथ लगाकर जांच की। रोगी को पानी में घोलकर दो बूंद दवाई पिलाई। रोगी ने जब कहा कि दलिया खाने से परेशानी हो रही है, इस पर डॉक्टर ने कहा कि इसके खाने से पेट गर्म हो गया है। इस दवाई से सही हो जाएगा। वो यहां पर ही दवाइयां भी रखता है। सरदारशहर इलाके में खुद को रामलाल बताने वाला युवक इलाज करते पाया गया। वो 10वीं पास था। घर-घर जाकर लोगों का इलाज करता है।

भास्कर ने दवाओं की पर्ची व वीडियो दिखाए तो जिम्मेदार बोले-ये तो कैसे प्रैक्टिस कर सकते हैं?

एसीएमएचओ डॉ. सुनील जांदू ने बताया कि झोलाछाप डॉक्टर की श्रेणी में आने वाले इन डॉक्टरों को केवल स्वास्थ्य जागरूकता का काम है। यह सामान्य तौर पर मरीजों को देखने, दवाई लिखने व इंजेक्शन लगाने का कोई काम नहीं कर सकते। निदेशालय का ऐसे कोई आदेश में अनुमति नहीं है कि वे इस तरह की प्रैक्टिस कर सकते है। ऐसा करना जुर्म है। उन्होंने बताया कि जीएनएम और अन्य कोर्स करने वाले लोग भी इलाज नहीं कर सकते हैं। यह जो पर्चियां हैं, इस तरह की दवा ज्यादा देने से मरीज की हालत खराब हो जाएगी।

जिले में हर दिन 800 से ज्यादा रोगी हो रहे हैं ठगी के शिकार, सर्वाधिक सुजानगढ़ क्षेत्र में

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों और सर्वे के आधार पर देखे तो जिले में हर महीने डेढ़ लाख से ज्यादा रोगी शिकार हो रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि चूरू शहर में 20, गांवों में 60, सरदारशहर शहर में 15, गांवों में 130, सुजानगढ़ शहर में 20, गांवों में 125, रतनगढ़ शहर में 10 गांवों में 70, बीदासर शहर में आठ, गांवों में 75, तारानगर शहर में 10 व गांवों में 80 के करीब झोलाछाप डॉक्टर प्रतिदिन करीब 800 रोगियों को अपना शिकार बना रहे हैं। सीएमएचओ डिग्री नहीं होने पर तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन नहीं की जा रही है।

(भास्कर टीम ने सभी के वीडियो बनाए हैं। करीब 20 डॉक्टर पकड़े)

भास्कर : जिले में झोलाछाप फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

सीएमएचओ : समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। अभी भी कर रहे हैं...। हाल ही में राजगढ़ एरिया में ऐसी ही एक कार्रवाई की है।

भास्कर : हर तहसील में 100 के करीब ऐसे फर्जी क्लिनिक हैं और झोलाछाप डॉक्टर रोगियों के जीवन के साथ खेल रहे हैै?

सीएमएचओ : अब क्या बताऊं..। कार्रवाई तो कर ही रहे है। चांदगोठी में की तो है, जानकारी मिलने पर आगे भी कार्रवाई करेंगे।

भास्कर : बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि चिकित्सा विभाग को क्या झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में कोई जानकारी नहीं है?

सीएमएचओ : पता कर रहे हैं।

भास्कर : भास्कर ने स्टिंग के जरिए इन झोलाछाप डॉक्टरों को ढूंढ़ लिया, चिकित्सा विभाग ने आज तक सर्वे क्यों नहीं करवाया?

सीएमएचओ : मेरे ख्याल ये शायद सर्वे हुआ है। अरसिदा ने भी सरकार के सामने मांग रखी थी कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ एक्ट होना चाहिए। आप वीडियो और ऑडियो दो, हम कार्रवाई करेंगे।

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