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संसाधनों के पीछे भागने व धन का संग्रह करने की प्रवृत्ति ठीक नहीं

3 वर्ष पहले
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चूरू | श्रीराम मंदिर में भागवत कथा में प्रवचन करते साध्वी करूणागिरि ने कहा कि प्रत्येक जीवन का संचालन अन्त:करण से होता है। अन्त:करण में काम, क्रोध, मोह, मद, लोभ आिद भव रोग होते हैं। इनका शमन सांसारिक सुख-भोग के संसाधनों के पीछे भागने या भोगने या संग्रह करने से नहीं हो सकता। इसका एक मात्र शमन का सरल साधन निष्काम भाव में खुद को प्रभु के चरणों में समर्पण करना है। अत: भक्त को हृदय से भागवत कथा को निरंतर सुनना चाहिए। कथा सुनने से ही पापों का नाश संभव है। आज की कथा में पूतना उद्धार सहित भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया गया। अंत में गोवर्धन धरएण व छप्पन भोग की झांकी सुंदर प्रदर्शन किया गया। कथा में सुभाष मोदी, भीखमचंद बगड़िया, शिवकुमार बगड़िया, निखिल मोदी, देवकीनंदन शर्मा, श्यामसुंदर शर्मा, मोहनलाल शर्मा, बाबूलाल शर्मा, ओमप्रकाश तंवर, जगदीश प्रसाद शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद थे।

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