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नौ दिन तक 15 से 20 और दसवें दिन 30 डॉक्टर 12 बजे बाद सीट से गायब

3 वर्ष पहले
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ये तीन तस्वीरें मेडिकल कॉलेज से जुड़े जिले के सबसे बड़े राजकीय डीबी अस्पताल के डॉक्टरों के चैंबर की हैं। यहां 12 या 12:30 बजे हालात कुछ इस तरह ही रहते हैं। रोगी बाहर बैठे डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं। भास्कर के पास पिछले लंबे समय से लगातार डॉक्टरों के सीट पर नहीं मिलने की शिकायतें रोज आ रही थी। रोगियों की पीड़ा थी कि इतने बड़े अस्पताल में सुबह 12 बजे बाद 80 फीसदी डॉक्टर अपने चैंबर में सीट पर नहीं मिलते हैं। शिकायत की पुष्टि के लिए भास्कर ने करीब 10 दिन तक लगातार एक-एक डॉक्टर के चैंबर में जाकर देखा। शिकायतें बिल्कुल सही निकली। हालात वही थे, जो रोगियों की ओर से बताए गए थे। डाॅक्टरों के सीट पर बैठने का समय दोपहर दो बजे तक है। शुक्रवार को भास्कर के स्टिंग के अंतिम दिन मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के करीब 30 डॉक्टर अनुपस्थित मिले। इससे पहले नौ दिन तक ये संख्या 15 से 20 तक थी। भास्कर ने डॉक्टरों के खाली चैंबरों की तस्वीरें खींची। डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर जब जानकारी जुटाई तो कई बहाने और कई कारण बताए गए। कुछ ने कहां डॉक्टर साहब यहीं है, किसी काम से गए हैं, तो किसी ने कहा अभी-अभी तो यहीं थे, अब पता नहीं। कुछ इसी तरह के जवाब नर्सिंग स्टाफ व अन्य से मिलते रहे। हकीकत ये थी कि जब चैंबर के बाहर व अंदर बैठे रोगियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि आधे घंटे से ज्यादा तो हमें बैठे-बैठे हो गई, यहां कोई नहीं है। कुछ रोगियों ने कहा कि पिछले एक घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं।

अस्पताल अधीक्षक को भास्कर के स्टिंग के बारे में पता लगते ही राउंड लेने शुरू किए, उनको भी हकीकत में डॉक्टरों का नहीं था पता
डॉक्टरों के सीट पर नहीं मिलने की शिकायतें रोज आती है, पर कार्रवाई नहीं होने से नहीं बदल रहे हालात
चूरू. चैंबर में डॉक्टर का इंतजार करते रोगी।

तीन से साढ़े चार घंटे बाद गायब हो जाते हैं अधिकतर डॉक्टर
अस्पताल मेडिकल कॉलेज से जुड़ने के बाद यहां बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी बैठने लगे हैं। 10 दिन की पड़ताल में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी अपनी सीट पर नजर नहीं आए। सुबह आठ बजे बाद तीन-साढ़े चार घंटे बैठने के बाद डॉक्टर गायब मिले। 12 बजे बाद तो हालात ये थे कि डॉक्टरों का कोई अता-पता ही नहीं है। 10 दिनों के भीतर पांच-सात दिन तो डॉक्टर अपनी सीट छोड़कर प्रिंसिपल कक्ष व अन्य कमरों में बैठे मिले। हैरानी की बात तो ये है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से दावे किए जा रहे है कि करीब पांच दर्जन डॉक्टर अस्पताल में लगा दिए हैं, जबकि हकीकत ये है कि डॉक्टरों का कोई अता-पता ही नहीं है। अस्पताल के डॉक्टरों ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कहां रहते है और कहां बैठते है भगवान ही जाने।

चूरू. शिशु रोग विशेषज्ञ का खाली पड़ा चैंबर।

इस चैंबर में तीन डॉक्टर बैठते हैं। ये तस्वीर 12 बजकर 32 मिनट की है। तीनों ही गायब

भास्कर पड़ताल की भनक पर अधीक्षक ने लिए राउंड
अस्पताल अधीक्षक डॉ. जेएन खत्री को जब भास्कर की पड़ताल का पता चला तो उन्होंने पूरे अस्पताल का दोपहर 12 बजे बाद राउंड लिया। इस दौरान उन्हें भी कई डॉक्टर अनुपस्थित मिले। अधीक्षक ने भास्कर संवाददाता से भी इस संबंध में वार्ता की, उन्होंने कहा कि अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों को बक्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने डीसी डॉ. जेपी महायच को तुरंत अपने चैंबर में बुलाकर निर्देश दिए। डीसी ने राउंड लेकर बताया कि सुबह डॉक्टरों को बैठने के लिए पाबंद किया गया था, अब वे सीट पर नहीं है।

दो-तीन डॉक्टरों को अपने चैंबर में बुलाकर लताड़ा : सुबह 12 बजे बाद डॉक्टरों के सीट पर नहीं मिलने की बात को लेकर अधीक्षक डॉ. खत्री ने कई डॉक्टरों को फोन लगाकर पूछा कि आप फिलहाल कहां है। कुछ ने कहां मैं छुट्‌टी पर हूं तो कुछ ने कहां मैं यहीं हूं। दो-तीन डॉक्टरों को अपने चैंबर में बुलाकर लताड़ पिलाई। कहा कि क्या मजाक समझ रखा है सभी ने। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भी फोन कर बताया कि कॉलेज के डॉक्टर अपनी सीट से गायब रहते हैं, उन्होंने कहा कि मैं अभी किसी मीटिंग में हूं। बाद में बात करता हूं।

एमसीएच में 1 बजे पहुंचे तो बंद मिले कमरे
मातृ एवं शिशु अस्पताल में भास्कर ने करीब एक बजे जायजा लिया। इस दौरान डॉ. सुशीला नेहरा, डाॅ. शरद मिश्रा, डॉ. गोगाराम, डाॅ. इकराम हुसैन, डॉ. रेणु अग्रवाल, डॉ. एमएल सोनी सहित कई डॉक्टर नहीं थे। पूछने पर डॉ. मिश्रा का डे-ऑफ था, वहीं डाॅ. नेहरा छुट्‌टी पर बताई गई। डॉ. गोगाराम कैंप में थे। डॉ. अनिता, डॉ. पूजा नजर नहीं आए।

अस्पताल प्रशासन ने बताए हालात, छह को नोटिस भी

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अस्पताल में करीब 44 डाॅक्टर कार्यरत है, जिनमें से करीब 11 छुट्‌टी, कोर्ट एविडेंस, डे-आॅफ आदि पर थे। बाकी ड्यूटी पर थे। जिनमें से शुक्रवार को करीब 15 डॉक्टर साढ़े 12 बजे बाद नहीं दिखे। मेडिकल कॉलेज के डीबी अस्पताल में करीब 30 डाॅक्टर कार्यरत है, जिनमें भी 15 से ज्यादा डॉक्टर गायब मिले। इधर, अधीक्षक ने डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. आमिन, डॉ. मुरलीधर ढाका, डॉ. आनंद प्रकाश, राहुल कस्वा आदि को तो नोटिस भी जारी कर दिए।

रिपोर्ट मांगी है, कार्रवाई करेंगे...

डॉक्टरों की अनुपस्थित मिली है। सभी की अलग-अलग रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए है। प्रिंसिपल को भी बताया गया है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का अता-पता नहीं है, वे कब कहां चले जाते है, इसकी जानकारी नहीं रहती। सभी को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। व्यवस्था में हर हाल में सुधार किया जाएगा। डॉ. जेएन खत्री, अधीक्षक, राजकीय डीबी अस्पताल, चूरू

मैं आज जयपुर हूं। इस तरह की शिकायत है तो डॉक्टरों की मीटिंग बुलाकर पाबंद किया जाएगा। हालांकि ये भी हो सकता है कि जब चैंबर खाली हो तो उस समय डॉक्टर ओटी या किसी राउंड पर गए हुए हो। फिर भी जांच होगी। डॉ. वीबीसिंह, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, चूरू

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