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जब महिलाओं को पढ़ाया ही नहीं जाता था तब उच्च शिक्षा हासिल की

3 वर्ष पहले
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मैडम मैरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर 1868 को पॉलैंड के वार्सा में हुआ था, जो उस समय रूसी सम्राज्य का हिस्सा था। मैरी की मां अध्यापिका और पिता प्रोफेसर थे। शिक्षित परिवार में पैदा होने की वजह से मैरी पढ़ाई-लिखाई में शुरू से ही अच्छी थीं। लेकिन जब उनका जन्म हुआ उस समय पॉलैंड का राजनीतिक वातावरण बहुत खराब था। ज्यादातर लोग महिलाओं के पढ़ने-लिखने के खिलाफ थे। मैरी के पिता सामाजिक व्यक्ति थे। वे लोगों के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाते थे। इसी वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसके बाद उन्हें बहुत कम सैलरी पर कहीं और काम करना पड़ा।

जब मैरी केवल 10 साल की थीं तभी उनकी मां का निधन हो गया और घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। पैसों की कमी होने के बाद भी, मैरी ने अपनी स्कूलिंग पूरी की और वे छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। वे आगे भी पढ़ना चाहती थीं लेकिन उस समय महिलाओं की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता था। स्कूलिंग के बाद ज्यादातर महिलाओं की पढ़ाई पर रोक लग जाती थी। यहां तक की सरकार भी महिलाओं को सीमित शिक्षा की अनुमति देती थी। मैरी ने फ्लाइंग यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। 1885 से 1905 तक गुप्त तरीके से चलाई जा रही यह यूनिवर्सिटी उनके लिए खोली गई थी जो पढ़ने की चाह रखने के बावजूद सामाजिक कारणों से पढ़ नहीं पाते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैरी ने पांच साल तक टीचर के तौर पर काम किया। इसके बाद मैरी को रिसर्च के लिए एक लैब की जरूरत पड़ी। तब फ्रांस के भौतिक शास्त्री पियरे क्यूरी ने उन्हें अपने लैब में जगह दी। वहां एकसाथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे और 26 जुलाई 1895 को उन्होंने शादी कर ली। 12 सितंबर 1897 को मैरी ने एक बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम इरीन रखा। इरीन के जन्म के बाद भी उन्होंने अपनी रिसर्च में कमी नहीं की और कड़ी मेहनत के दम पर दोनों ने संयुक्त रूप से मिलकर रेडियो एक्टिविटी की अद्भुत खोज की। इस खोज के लिए मैरी और पियरे को 1903 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

6 दिसंबर 1904 को मैरी ने एक और बेटी को जन्म दिया जिसका नाम ईव रखा गया। उनके जीवन में सब बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन 1906 में उन्हें जबरदस्त झटका तब लगा जब उनके पति की एक्सिडेंट में मृत्यु हो गई। इस घटना ने मैरी को झकझोर दिया लेकिन उन्होंने अपने आपको सम्हालते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस में प्रोफेसर के तौर पर काम शुरू किया। यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस में प्रोफेसर बनने वाली वे पहली महिला थीं। बिजी शेड्यूल के बाद भी उन्होंने अपने प्रयोग जारी रखे और आगे चलकर 1911 में उन्हें केमिस्ट्री में रेडियम के शुद्धिकरण और पोलोनियम की खोज के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब मैरी विज्ञान के क्षेत्र में दो बार नोबल पुरस्कार जीतने वाली पहली शख्सियत बन गईं थीं।

Âनाम : मैरी स्कोदोस्का क्यूरी

Âजन्म : 7 नवंबर 1868

Âकाम : फ्रेंच फिजिसिस्ट

दो बार पाया नोबल पुरस्कार

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