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बालोद के सुरेश योगमुडो के इंटरनेशनल कोच बने

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | बालोद/दल्लीराजहरा

आमापारा बालोद (मूल निवासी दल्लीराजहरा) के 40 वर्षीय सुरेश शांडिल्य अब इंटरनेशनल कोच बन गए हैं। उन्हें हाल ही में नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई अंतरराष्ट्रीय योगमुडो चैम्पियनशिप में भारत की ओर से 50 खिलाड़ियों के साथ भेजा गया था। 3 से 8 अप्रैल तक हुए इस खेल में कोच शांडिल्य के नेतृत्व में भारत के 12 खिलाडियों ने स्वर्ण पदक, 9 ने रजत पदक, 9 ने कांस्य पदक समेत कुल 30 पदक जीते।

छग से डोंगरगढ़ के 10 खिलाड़ी भी इसमें शामिल हैं। बचपन से ही मार्शल आर्ट की दीवानगी सुरेश पर छाई थी। 1992 में अजय देवगन की फिल्म फूल और कांटे देखकर मार्शल आर्ट से प्रेरित हुए। दल्लीराजहरा में कक्षा 6वीं की पढ़ाई के दौरान एक क्लब से जुड़कर खुद मार्शल आर्ट सिखने जाया करते थे। भानुप्रतापपुर व जगदलपुर के प्राइवेट स्कूल में खेल शिक्षक के रूप में बच्चों को नि:शुल्क मार्शल आर्ट सिखाते रहे। 2010 में बालोद में पदस्थ हुए।

सुरेश शांडिल्य के मार्गदर्शन में छग के 30 खिलाड़ियों ने योगमुडो में जीता पदक, जिसमें 12 गोल्ड मिले
बालोद. काठमांडू में योगमुडो में कोच सुरेश के साथ दम दिखाते देश के खिलाड़ी।

दोनों बेटियों सहित 17 स्कूली विद्यार्थी नेशनल प्लेयर

डीईओ बीआर ध्रुव, जिला खेल समन्वयक सपन जेना, सहायक जिला खेल अधिकारी दुर्गेश नंदनी साहू ने बताया सुरेश की दोनों बेटी प्रांजिली व याना के साथ निपानी व अन्य स्कूलों से जिले में 17 बच्चे योगमुडो के नेशनल प्लेयर बन चुके हैं। अब तक इन बच्चों ने नेशनल में 20 गोल्ड मेडल दिलाया है, जो जिले का पहला रिकाॅर्ड है।

महिला कमांडाे को सिखाया
छग योगमुडो एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ शेख हुसैन ने बताया तीन साल पहले बालोद में सामुदायिक पुलिसिंग की शुरुआत की तब सुरेश व उनकी टीम ने ही पुलिस वालों के साथ महिला कमांडो व स्कूली छात्राओं को आत्मरक्षा का गुर सिखाया। उनके प्रयास से महिलाओं व बेटियों में खुद की सुरक्षा करने का विश्वास व साहस बढ़ा।

उपलब्धि से यहां तक पहुंचे
भारतीय याेगमुडो संघ के अध्यक्ष रोहित नारकर व सचिव राणा अजय सिंह ने बताया कि सुरेश के इस खेल में अच्छी उपलब्धि को देखते हुए उन्हें इंटरनेशनल कोच नियुक्त किया गया। इसके पहले उन्हें नेशनल कोच की जिम्मेदारी भी दे चुके हैं। इंटरनेशनल लेवल पर जिम्मेदारी निभाकर उन्होंने सफलता भी दिलाई।

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