माइनिंग मेट वेजेस को कुशल कामगार का वेतन मिलेगा
भारतीय मजदूर संघ ने माइनिंग मेटो के वेजेस को लेकर वाद दायर किया था। जिसका फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आया।
राजहरा शाखा के अध्यक्ष किशोर कुमार माइती ने बताया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि डीजीएमएस सर्टिफिकेट प्राप्त माइनिंग मेट कुशल कामगार की श्रेणी में आते हैं। किन्तु वर्तमान ठेके में ठेकेदार उन्हें अर्ध कुशल कामगार मान कर कम वेतन दे रहे थे। समय-समय पर प्रबंधन से सकारात्मक चर्चा करने के बाद हल नहीं निकल रहा था। जिस पर संघ के महामंत्री एमपी सिंह ने मामले को औद्योगिक विवाद के रूप में क्षेत्रीय उप मुख्य श्रमायुक्त केंद्रीय कार्यालय में ले गया था। 11 अप्रैल को सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय कार्यालय ने मजदूरों के हित में फैसला दिया। जिसके आधार पर कामगारों को कुशल श्रमिकों की तरह वेतन दिया जाएगा।
संघ की ओर से संघ के महामंत्री एमपी सिंह, प्रबंधन की ओर से झरनदल्ली के खदान प्रबंधक राकेश कुमार, एवं मेसर्स जेके ट्रांसपोर्ट की ओर से मोहन लाल जैन उपस्थित हुए। प्रबंधन एवं ठेकेदार की ओर से यह पक्ष रखा गया कि ठेके में कार्यरत माइनिंग मेट को कार्यानुभव नहीं है। अतः उन्हें अर्धकुशल वर्ग का वेतन दिया गया। संघ की ओर से आपत्ति दर्ज कर बताया कि माइनिंग मेट पहले ही 2-3 साल का कार्य अनुभव रखते हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने डीजीएमएस सर्टिफिकेट प्राप्त माइनिंग मेट को कुशल कामगार माना है। इसके लिए किसी कार्यानुभव की बात नहीं की गई है। इस पर सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय ने भी संघ के पक्ष का समर्थन किया।