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पुस्तक गुजलंक में नारी के मन को गहराई से समझकर बताया गया: डॉ. एसपी पचौरी

3 वर्ष पहले
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दमोह। काव्यगोष्ठी के दौरान अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देतीं साहित्यकार।

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की मासिक गोष्ठी संपन्न

भास्कर संवाददाता | दमोह

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के तत्वाधान में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सभाकक्ष में कथा संकलन गुजलंक पर केंद्र पर काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें पूर्व डीईओ डॉ. पीएल शर्मा, वर्तमान डीईओ पीपी सिंह, शिष्पी पुष्पा चिले मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। रामकुमार तिवारी एवं संगीता पांडे द्वारा स्वरचित सरस्वती वंदना के बाद कार्यक्रम की शुरूआत हुई।

प्रो. डॉ. एसपी पचौरी ने गुजलंक पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए कहा लेखिका नारीमन की गहराई में उतर कर उसके उस पक्ष का प्रस्तुतीकरण करने में चतुराई का परिचय देती है, जहां पुरुष वर्ग के अत्याचार और उसकी प्रताड़ना को यहां तक कि उनके द्वारा की गई मारपीट को भी चुपचाप सहन करती जाती हैं। इस आशय से कि पुरूष मन कभी तो बदलेगा। डॉ. श्री कीर्तिकाम दुबे ने लिखा कि लेखिका पुष्पा चिले के पास आधुनिक और लोकजीवन का गहरा अनुभव है इसलिए उनकी अनुभव जन वेदना अधिक यथार्थपरक है। उनका अनुभव और विषय वैविध्य बहुत कुछ प्रेमचंद से मिलता है साथ ही महादेवी जैसी विशिष्ट शैली के उनमें दर्शन होते हैं। कथाकार पुष्पा चिले ने अपनी रचना प्रक्रिया पर कहा कथा लिखने की प्रारंभिक प्रेरणा उन्हें अपनी दादी से प्राप्त हुई। विवाहोपरांत पति डॉ. चिले के मार्गदर्शन में उनकी लेखनी उपरांत पर प्रगति करती गई।

बहुत अच्छा नजरिया है: मुख्य अतिथि डॉॅ. शर्मा ने कहा जिनकी सोच अच्छी होती है उनका नजरिया भी अच्छा होती है।

पुष्पा चिले की कहानियां हमारे समाज की कहानियां हैं। रामकुमार तिवारी ने इन्हें सामाजिक सरोकार वाली कहानियां बताया। कार्यक्रम का सुचार संचालन एवं आभार राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के संयोजक डॉक्टर प्रेमलता नीलम ने किया। इस अवसर पर नारायण सिंह ठाकुर, विमल लहरी, कुसुम खरे, इंद्रजीत भट्‌टी, पिम्मी परिहार, गजेंद्र तिवारी, कमलेश शुक्ला, उषा शिवहरे, रमेश व्यास, रितु अग्रवाल, कविता राय, राजीव अयाची, राजीव बिल्थरे, सदन नेमा, गणेश राय, आराधना राय, नरेंद्र अरजरिया, रामबाबू सेन सहित अन्य पत्रकार मौजूद थे।

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