बकायन से खड़ेरी की 15 किमी में से 700 मीटर लंबी सड़क 9 साल से बनने के इंतजार में हैं। लापरवाही के कारण यह सड़क ग्रामीणों के लिए परेशानी का बनी हुई। उक्त सड़क का निर्माण 2009 वर्ष पहले शुरू किया गया था। निर्माण के दौरान मात्र 14 किमी लंबी सड़क पर डामरीकरण के बाद कार्य रोक कर 700 मीटर लंबी सड़क को अधूरा छोड़ दिया गया। छोड़ गए हिस्से में बड़े-बड़े गड्ढे़ मौजूद होने के कारण इस क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सड़क से ग्रामीण खड़ेरी तक आने जाने व करते हैं। ग्रामीणों को इससे अावागमन सीधा भी होता है। मगर कंपलीट न होने से इस क्षतिग्रस्त सड़क से होकर ग्रामीणों को गुजरना पड़ता है।
बारिश में हालात होते हैं खराब: इस मार्ग पर बारिश में इतना अधिक कीचड़ हो जाता है कि इससे गुजरना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण ने गोरेलाल और राधेश्याम अहिरवार ने बताया कि इस मार्ग की खराब स्थिति के कारण बटियागढ़ से जाने के लिए उन्हें 30 किमी लंबे मार्ग से जाना पड़ता है। जबकि उक्त 700 मीटर का हिस्से का निर्माण हो जाए तो यह दूरी मात्र 15 किमी रह जाएगी। जिससे ग्रामीणों का समय व पैसा भी बचेगा। अभी इस मार्ग से बकायन जाने में अाधा घंटा लगता है। सड़क कंपलीट होने पर यह भी आवागमन सरल हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त सड़क बनाने का काम चालू होने वाला है। उक्त मार्ग क्षेत्र को खड़ेरी, केरबना, बंडा शाहगढ़ से जोड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया था कि तत्काल इस सड़क का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। लेकिन अब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका और मानसून आने वाला है। सड़क अब भी अधूरी पड़ी हुई है। जबकि पीडब्ल्यूडी के ईई जेपी सोनकर का कहना है कि डामरीकृत सड़क 30 एमएम मोटी है। कहीं पर भी मोटाई को लेकर समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि एजेंसी के माध्यम से सड़क काम पूरा कराया जा रहा है। जब काम प्रारंभ हुआ था, उस दौरान किसानों ने सड़क नहीं बनने दी थी, लेकिन अब वे सहमत हाे गए हैं। दो माह के अंदर सड़क बनकर तैयार हो गए हैं।
मिट्टी मिली सफेद गिट्टी का हो रहा है इस्तेमाल
ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी सड़क कंपलीट करने में मिट्टी मिली सफेद गिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौके पर काफी मात्रा में सफेद गिट्टी पड़ी हुई है। इसके अलावा सड़क की बकायन के पास हाईवे से जुड़ाव होने के कारण मोटाई ज्यादा रखी गई है। जबकि बीच में एक दम पतली लेयर रखी गई है। सड़क की मोटाई और चौड़ाई में अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के समय यही एकमात्र रास्ता बचता है जिससे हाईवे तक अासानी से पहुंचा जा सके। क्योंकि अन्य जो रास्ते हैं वह बारिश के कारण बंद हो जाते हैं। बाद में केवल बटियागढ़ मार्ग ही बचता है। इन दिनों बटियागढ़ सड़क की हालात इतनी अधिक खराब है कि उसमें सुधार कार्य नहीं हो रहा है।