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इस मंदिर में आठों पहर होती है भगवान की विशेष आरती, रोजाना सुबह से निकलती है हरिनाम संकीर्तन प्रभातफेरी

3 वर्ष पहले
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दमोह। गौर राधा रमण मंदिर में विराजमान भगवान राधा-कृष्ण।

जीवन में अर्पण नहीं समर्पण का भाव होना चाहिए:शास्त्री

परशुराम टेकरी के पास चल रही भागवत कथा

भास्कर संवाददाता | दमोह

शहर के जबलपुर नाका परशुराम टेकरी के पास चल रही भागवत कथा में कथावाचक रवि शास्त्री ने सोमवार को श्रीकृष्ण-रूकमणी के विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि रूकमणी का भाई अपनी बहन का ब्याह शिशुपाल के साथ करना चाहता था, लेकिन रूकमणी भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना पति मानती थीं, इसके लिए उन्होंने दूत के हाथों भगवान को पत्र लिखा।

जिसके बाद भगवान ने रूकमणी का हरण कर उनके साथ विवाह किया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण व रूकमणी की सुंदर झांकी सजाई गई। जिनके दर्शनों के लिए श्रद्धालु लालायित रहे। इस अवसर पर शास्त्री ने कहा कि हमारे पारिवारिक, सामाजिक जीवन के भाव में जब तक समर्पण नहीं है, तब तक व्यक्ति न तो अच्छा पुत्र, पिता, माता एवं भक्त नहीं हो सकती जीवन में अर्पण नहीं समर्पण होना चाहिए। हम मंदिर जाते हैं, प्रसाद की थाली पुजारी के हाथ में देते हैं, लेकिन मन में भाव यही होता कि पुजारी थोड़ा सा प्रसाद भोग के स्वरूप में रखे, शेष ज्यादा वापिस कर दें। यह अर्पण का भाव जब समर्पण का भाव होता है तो शेष कुछ नही बचता। परिवार के प्रति हो या समाज के प्रति या राष्ट के प्रति जब तक अर्पण का भाव रहेगा हम ज्यादा कुछ नही पाएंगे। उन्होंने कहा कि आज हमारी सृष्टि में सामाजिक, पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। हम भौतिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दौड़ रहे हैं।

दमोह। कथा के दौरान कृष्ण-रूकमणी विवाह की झांकी सजाई गई।

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