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एटलस बताएगा जिले का प्राकृतिक स्वरूप कैसा है, यहां पर कौन-कौन से संसाधन हैं
21 मई को भोपाल से आएंगे विशेषज्ञ
भास्कर संवाददाता | दमोह
मप्र विज्ञान एवं प्राैद्योगिकी विभाग की ओर से 21 मई को कलेक्टोरेट में जिला स्तरीय मप्र संसाधन एटलस पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला में दमोह जिले के भौगोलिक और संसाधनों के बारे में स्पष्ट समझाया जाएगा। कार्यशाला में जिले के 21 विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और वे विशेषज्ञों से दमोह के स्वरूप का एटलस के माध्यम से समझ सकेंगे।
खास बात यह कि दमोह जिला संसाधन एटलस में शामिल होने के बाद उसकी भौगोलिक संरचना तैयार की गई है। कार्य और परियोजनाओं का उल्लेख एटलस में होगा। यह महत्वपूर्ण जानकारी अधिकारी कभी भी एटलस को देखकर ले सकेंगे। ई- गवर्नेंस के प्रबंधक महेश अग्रवाल ने बताया कि मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मप्र संसाधन एटलस कार्यक्रम के अंतर्गत 21 मई को जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसमें वरिष्ठ कॉलेज प्राध्यापकों, अर्थशास्त्रियों, शोधार्थियों सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।
दमोह की पुरासंपदा एटलस में दिखेगी
उन्होंने बताया कि एटलस में दमोह कैसा है, क्या संसाधन हैं और किस जगह पर कौन सी चीज स्थापित है। इसकी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। उनके मुताबिक पहले पूर्व में एटलस का उपयोग भौगोलिक जानकारियों तक सीमित था। अब इसका स्वरूप बदल गया है। इसका विकास के लिए उपयोग होने लगा है। कार्यशाला में संसाधन एटलस तैयार करने में सहभागिता और अधिक से अधिक उपयोग करने पर बल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप गोयल एटलस को समझाएंगे। वे संसाधन एटलस में प्राकृतिक संसाधनों का सर्वेक्षण, मानचित्रण और तकनीकी के बारे में बताएंगे। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गोयल संसाधन एटलस में वेबसाइट की जानकारियों का प्रस्तुतीकरण भी करेंगे।