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जंगलों में आज भी गवाह है राजाओं की विरासत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | तेंदूखेड़ा

शहर से लगभग 40 किमी दूर चंदना गांव के जंगल में हजारों साल पुराने मंदिर हैं। विडंबना यह है कि इस बात की जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं है। या तो जंगल में बसे बुजुर्गों को या इतिहास की जानकारी रखने वालों को ही पता है कि जंगल में राजा-महाराजाओं द्वारा निर्माण कराए गए मंदिर, किले बने हुए हंै।

इसके अलावा पुरातन राजाओं की धरोहर जमीन में अनेक स्थानों पर बिखरी पड़ी हैं। जिनमें प्राचीन मंदिर, मठ, मूर्तियां जमींदोज हो गई हैं। ग्राम के लोगों ने कहा कि यहां से सैकड़ों आकर्षक मूर्तियां हैं। पुरातन धरोहर के निशान एवं अनेक मूर्तियां एवं मठ देवरी ग्राम में बिखरी पड़ी़ं हैं। ग्राम चंदना से लगभग 6 किमी दूर पहाड़ पर हजारों साल पुराना मंदिर है जिसे लोग मंदिर बाला भरका के नाम से जानते हैं। मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है। बुजुर्गों का कहना है कि मंदिर पर भगवान भोलेनाथ की जलहरी थी। इसके अलावा मंदिर में दरवाजों की चौखट लगी थी, लेकिन आज मूर्तियां गायब हैं। मंदिर में 24 दरवाजे हैं। ऊपर जाने के लिए पत्थर की सीढियां बनी हुई हैं। सीढियों के नीचे शयन कोठरी बनाई गई जिसमें नीचे तकियां नुमा पत्थर लगा हुआ था। लेकिन धन के लालचियों ने पत्थर हटाकर यहां गहरा गड्‌ढा खोद दिया है। वर्तमान में मंदिर के नाम पर मात्र लगभग 12 फीट उंची पुरातन दीवारें बचीं हुईं हैं।

फारेस्ट कर्मचारी एवं स्थानीय लोगों के अनुसार तथा मंदिर की स्थिति देखकर मालूम हुआ कि यहां पर हजारों साल पहले राजा ने जंगल में तपस्या कर रहे संत को पहाड़ पर रहने के लिए मंदिर बनाया था। मंदिर में 24 दरवाजे लगाए गए हैं जिससे प्रतीत होता है कि राजा मां गायत्री का भक्त था। यहां के मंदिर का विधिवत इतिहास किसी को मालूम नहीं है। लेकिन अब खंडहर में तब्दील हो गया है वहां पर लोग धन की तलाश में आए दिन गड्‌ढे खोदते रहते हैं। जंगल से होकर गांव से मेन सड़क जाने के लिए लगभग 15 किमी दूर थी। प्रशासन के अफसर भी धरोहरों को सहेजने की दिशा में चुप है। इस संबंध में पुरातत्व विभाग के गाइड सुरेंद्र चौरसिया का कहना है चंदना गांव के पास मंदिरों के संबंध में जानकारी नहीं है। यदि वहां प्राचीन मंदिर हैं तो इसके लिए शासन को पत्र लिखकर सर्वे कराने का प्रयास किया जाएगा।

दमोह जिले के चंदना गांव में प्राचीन प्रतिमाएं यहां-वहां पड़ीं, दफीने की लालच में किले और गुफाओं की खुदाई

दमाेह जिले के चंदना में प्राचीन मंदिर।

मेरे घर निकली प्रतिमा, विराजमान कर दी

देवरी ग्राम के 85 वर्षीय टीकाराम एवं बतीबाई ने बताया कि उसके ससुर कहते थे कि गांव में हजारों साल पुराना मठ मूर्तियां पड़ी हुईं हैं। मठ बिखरा हुआ पड़ा है। यहां से लोग सैकड़ों मूर्तियां कार में भरकर उठा ले गए हैं। मेरे घर की बाड़ी में जमीन के अंदर सें पुरानी मूर्ति निकलीं थीं इसे भी लोगों ने ले जाने का प्रयास किया था लेकिन मैंने ले जाने नहीं दिया और घर के बाहर ही स्थापित कर दिया था। पंडितों ने मूर्ति देखकर बताया कि ये भगवान नर्सिंह की मूर्ति है। हमारे परिवार के लोग प्रतिदिन पूजा करते हैं।

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