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पहाड़ पर चार साल से सूखी खड़ी है टंकी, पानी के लिए सिर पर बर्तन रखकर करते हैं चढ़ाई

3 वर्ष पहले
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जनपद दमोह के ग्राम एरोरा में पेयजल की टंकी होने के बाद भी ग्रामीणों को जलापूर्ति नहीं की जा रही है। गांववासियों को केवल कुओं व हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां पर चार साल पहले करीब 50 लाख रुपए की लागत से पानी की टंकी और नलकूप का खनन किया गया था, लेकिन टंकी एक बार भी चालू नहीं हो पाई है। पहाड़ी पर स्थित करीब 3 हजार ग्रामीणों को सिर पर पानी रखकर चढ़ाई करनी पड़ रही है। तब घरों में पानी पहुंचता है। इस समस्या को लेकर कई बार ग्रामीण पीएचई के विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगा चुके हैं, मगर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। इस बार विधानसभा चुनाव में यहां के ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करने का मन बना चुके हैं।

दरअसल एरोरा में 2014-15 में पेयजल की समस्या को देखते हुए करीब 36 हजार लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी का निर्माण कार्य कराया गया था। इसे भरने के लिए नलकूप भी लगा हुआ है। इसके बाद भी टंकी नहीं भरी जा रहा है। जिससे गांववासियों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को बस्ती से दो किमी दूर स्थित हैंडपंप से पानी भरकर पहाड़ी की चढ़ाई करके घर ले जाना पड़ रहा है। लंबे समय से टंकी चालू न होने के चलते ग्रामीणों ने अब उम्मीद तोड़ दी है। यहां के हाकम सिंह, छात्रा रागिनी और गीता ने बताया कि 4 साल से टंकी बनकर खड़ी है, लेकिन इससे पानी किसी को नहीं मिलता है। यह सिर्फ शोपीस बनकर खड़ी ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा पानी की किल्लत है।

इस संबंध में पीएचई के ईई केएस पवार का कहना है कि गांव में बनी पानी की टंकी का बोर सही न होने के कारण गांव वासियों को पानी नहीं मिल पा रहा है। मैं एक बार जाकर देख लेता हूं क्या हो सकता है। उसके बाद उसे ठीक करने का प्रयास किया जाएगा।

दमोह। एरोरा में चार साल से यह पानी की टंकी सूखी खड़ी है। इस पहाड़ी पर ग्रामीणों को पानी ले जाना पड़ता है। सिर पर बर्तन रखकर पानी ले जाती किशोरी।

चुनाव में वोट डालने

का बहिष्कार करेंग

ग्रामीण छात्र-छात्राएं और महिलाएं दिन भर पानी भरने का काम करती हैं। परेशानी की बात यह है कि बस्ती पहाड़ी एरिया में बसी हुई है। इसलिए सभी को सिर पर पानी के बर्तन रखकर पहाड़ी की चढ़ाई करनी पड़ती है, तब कहीं जाकर घर पर पानी पहुंचता है। एक अन्य रामसेवक यादव ने बताया कि हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन कोई काम नहीं करता है। यदि इस बार भी समस्या हल नहीं हुई तो इस बार विधानसभा चुनाव में वोट डालने का बहिष्कार करेंगे।

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