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जनसनुवाई में नि:शक्त और विकलागों ने बताया दर्द

3 वर्ष पहले
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दमोह। विकलांग बेटी को पीठ पर लादकर जनसुनवाई में पहुंची मां।

किसी की जमीन का सीमांकन नहीं हो रहा तो किसी की कुटीर स्वीकृत नहीं हुई

भास्कर संवाददाता| दमोह

कलेक्टोरेट जनसुनवाई में मंगलवार को नि:शक्त और विकलांगों ने पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाई। कोई विकलांग को पीठ पर लेकर पहुंचा तो कोई किराए से युवक को लेकर जनसुनवाई में आवेदन देने पहुंचा। इस दौरान दमोह की मायाबाई अपनी विकलांग बेटी सीमा अहिरवार को पीठ पर लादकर सभाकक्ष में पहुंची। सीमा ने बताया कि उनकी एक कमरे की जगह है जिसका सीमांकन नहीं किया जा रहा है। न ही उनकी पेंशन चालू हो रही है ट्राइसाइकिल भी नहीं मिली है।

हटा रमाकवि वार्ड से आए नारायण साहू आंखाें से अंधे हैं जो 200 रुपए दिन का किराया देकर मोनू पटेल को साथ लेकर दमोह जनसुनवाई में आए उन्होंने बताया कि उनके घर के सामने तीन फीट सीढ़ियां बनी थी जो बालकृष्ण साहू ने नगर पालिका में शिकायत करके तुड़वा दी हैं जबकि वह स्वयं नाला के ऊपर कब्जा किए है।

सीढ़ियां टूटने से निकलने में परेशानी हो रही है। वहीं भूरी निवासी विकलांग प्रदीप सोनी ने बताया कि उनकी जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है लेकिन शासन द्वारा उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इसी प्रकार एक पैर से विकलांग महिला अर्चना ने कुटीर स्वीकृति के लिए आवेदन देकर गुहार लगाई। जनसुनवाई में तहसीलदार रूपेश सिंघई ने आवेदन लिए। जनसुनवाई के दौरान 25 आवेदनों पर सुनवाई की गई।

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