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आदेश बना मुसीबत: मंडियों में 10 जून को नहीं, 30 मई को खत्म होगी चना, मसूर और सरसों की खरीदी
नए आदेश आने से किसानों की बढ़ी मुसीबत, 26 मई से पहले 19 हजार किसानों को किए जाने हैं मैसेज
भास्कर संवाददाता | दमोह
कृषि उपज मंडी में चना, मसूर और सरसों की खरीदी के लिए तय की गई 10 जून तक की तिथि में संशोधन कर दिया गया है। अब 10 जून से पहले 30 मई तक ही खरीदी होगी। इसके बाद किसानों की फसलों की खरीदी सरकार नहीं कर पाएगी, उन्हें व्यापारियों को ही अपनी पैदावार बेचनी पड़ेगी। यह आदेश खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की प्रमुख सचिव नीलम शमी राव ने जारी किया है। उन्होंने आदेश में बताया कि मंडियों में अब 30 मई तक ही खरीदी होगी। उसके बाद बंद कर ली जाएगी। उन्होंने समिति प्रबंधकों को 26 मई से पहले सभी बाकी बचे किसानों को चना, मसूर और सरसों बेचने के लिए मैसेज जारी करने का आदेश दिया है।
दरअसल इस बार करीब 63 हजार किसानों का पंजीयन मंडी में अनाज बेचने के लिए किया गया था। किसानों को मंडी अनाज लेकर आने के लिए भोपाल से मैसेज जारी किए जा रहे थे, मगर मंडी में ज्यादा किसान पहुंचने पर बीच में मैसेज भेजना बंद कर दिया गया। बाद में यह व्यवस्था समितियों के हाथ में दे दी गई। अभी भी समितियों को 19 हजार किसानों के लिए मैसेज भेजना है। यह प्रक्रिया 26 मई के पहले करना है। आदेश में लिखा है कि जिन किसानों को अभी तक मैसेज नहीं भेजे गए हैं, उन्हें जल्द जारी कर दिए जाएं, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। यहां पर बता दें कि अब तक 5 लाख 16 हजार टन का उपार्जन अब तक हो चुका है।
मंडी में किसानों के साथ छलावा, किसी की पुरानी मसूर कर रहे पास तो किसी की कर रहे फेल
किसानों ने लगाया आरोप, रुपए लेकर खराब और पुरानी मसूर को पास किया जा रहा है
भास्कर संवाददाता | दमोह
सागरनाका कृषि उपज मंडी में किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। किसी किसान की खराब और पुरानी उपज को भी पास कर खरीदी की जा रही है तो किसी की उपज को खराब बताकर फेल किया जा रहा है। मंगलवार को हिरदेपुर खरीदी केंद्र पर किसानों की उपज को खराब बताकर फेल कर दिया गया। सुबह से शाम तक किसान अपने नंबर के इंतजार में बैठे रहे लेकिन शाम को उपज खराब बताकर फेल कर दी गई। इमलिया लांजी से आए किसान पप्पू विश्वकर्मा ने बताया कि वे 13 क्विंटल मसूर लेकर सुबह मंडी में आ गए थे लेकिन शाम को मसूर रिजेक्ट कर दी गई। उन्होंने बताया कि उनके बाजू वाली ढेरी और मेरी उपज एक जैसी थी लेकिन बाजू वाली खरीदी हो गई।
दूसरे किसानों की उपज जो पुरानी थी उसे भी पास कर दिया गया। लेकिन मेरी उपज को छानकर लाने बोला गया। तीन बार छन्नी लगाने के बाद भी उपज नहीं ली गई है। इसी प्रकार जगदीश वैद्य की फसल को भी नहीं लिया गया। किसानों का आरोप है कि जो किसान और व्यापारी रुपए दे देते हैं उनकी खराब और पुरानी मसूर को भी पास करके खरीदी कर ली जाती है। बाकी के किसानों को परेशान किया जा रहा है।