कानून क्या है, एफआईआर क्या होती, लाइसेंस कैसे बनता है और क्यों जरूरी है, प्रताड़ना, पाक्सो एक्ट, बाल अपराध ऐसी सभी जानकारियों से समावेश 78 पन्नों व 35 अध्याय में सिमटी एक किताब तैयार की गई है। इस किताब का नाम “न्याय सबके लिए’ रखा गया है।
यह किताब जिले के 9वीं-10वीं के बच्चों को सरल भाषा में कानून की सामान्य जानकारी देगी। बाकायदा इन कक्षाओं के बच्चों के लिए इस पढ़ाई के लिए एक पीरियड भी तय होगा। किताब के आखिरी के पन्नों पर करीब 80 हेल्पलाइन नंबर भी दिए गए हैं।
दंतेवाड़ा प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां बच्चों को कानून की बेहद सामान्य जानकारी देने यह प्रयोग किया गया है। दरअसल इस किताब की परिकल्पना महज दो महीने पहले ही हुई थी। इसके बाद महीनेभर में तैयार की गई “न्याय सबके लिए’ पुस्तक का विमोचन शुक्रवार को न्यायालय परिसर में जिला एवं सत्र न्यायधीश सुधीर कुमार, कलेक्टर सौरभ कुमार व एसपी कमलोचन कश्यप ने किया। किताब डीजे सुधीर कुमार, कलेक्टर सौरभ कुमार के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव महेश बाबू साहू व राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला परियोजना अधिकारी दादा जोकाल ने तैयार की है।
विमोचन के मौके पर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार मिश्रा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश एनके एस ठाकुर, मनोज सिंह ठाकुर, प्रतिभा वर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजया रात्रे, न्यायिक मजिस्ट्रेट जनक कुमार हिड़को सहित अन्य अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद थे।
‘न्याय सबके लिए’ पुस्तक, जिससे 9वीं-10वीं के छात्रों को पढ़ाया जाएगा।
हाईस्कूल के शिक्षकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
कलेक्टर सौरभ कुमार ने कहा कि उद्देश्य केवल बच्चों को कानून की बेहद सामान्य जानकारी देना है। 5000 किताबें छपवाई जा रही हैं। इसका लाभ 9वीं-10वीं के बच्चों को मिलेगा। किताब स्कूलों की लाइब्रेरी में भी उपलब्ध होगी। हाईस्कूल के एक शिक्षक को विशेष तौर पर इस पुस्तक को पढ़ाने की ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में मिलती रही कानूनी जानकारी, अब स्कूलों में बच्चे खुद पढ़ सकेंगे
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव महेश बाबू साहू ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आश्रम, छात्रावासों, स्कूलों में शिविर लगाकर कानून की जानकारी दी जाती है, लेकिन अब शिविर के अलावा बच्चे खुद किताब पढ़कर कानून की संक्षिप्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। अब तक प्रदेश के किसी भी जिले में ऐसा प्रयोग नहीं हुआ है।
संविधान के साथ कानून की जानकारी भी पढ़ेंगे
जिला एवं सत्र न्यायधीश सुधीर कुमार ने कहा कि अब तक बच्चे केवल संविधान के बारे में ही पढ़ते थे, लेकिन दंतेवाड़ा के बच्चे अब कानून की सामान्य जानकारी भी पढ़ेंगे। इस पुस्तक एवं मूल अधिनियम में विरोधाभाष होने पर मूल अधिनियम मान्य होगा। अशोक जैन ने कहा कि मैंने अपनी बेटी को लाइसेंस बनाने आरटीओ दफ्तर भेजा तो उसे जानकारी के अभाव में वापस आना पड़ा। बच्चों को सामान्य जानकारी देना जरूरी है।