नक्सलियों ने फिर उड़ाया वाहन, सात जवान शहीद
राजनाथ सीएम हाउस में लेंगे नक्सल मुद्दे पर बैठक
दंतेवाड़ा में हुए बड़े नक्सली हमले की रिपोर्ट लेने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह नक्सल मुद्दे पर सोमवार को बड़ी बैठक लेंगे। दोपहर 12 बजे से ये बैठक सीएम हाउस में होगी। इसमें मुख्यमंत्री रमन सिंह, चीफ सेकरेट्री अजय सिंह, डीजीपी एएन उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अमन सिंह,सुबोध सिंह, नक्सल आपरेशंस से जुड़े अफसर और सीनियर पुलिस अफसर मौजूद रहेंगे रविवार शाम अंबिकापुर में कार्यक्रमों शिरकत करने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रमन सिंह से फोन पर चर्चा कर पूरी जानकारी ली।
वे हेलीकाप्टर के जरिये रायपुर आकर मुख्यमंत्री निवास में बैठक लेंगे। राजनाथ सिंह दोपहर बाद दो बजकर 15 मिनट पर सीएम हाउस से सीधे एयरपोर्ट जायेंगे और फिर दिल्ली के लिए रवाना हो जायेंगे। इससे पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही साफ कर दिया है कि सामंजस्य बैठाकर नक्सल उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ा जायेगा।इससे पहले घटना के बाद पीएचक्यू में स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी ने रविवार को दिनभर बैठकें कर रिव्यू किया। माना जा रहा है कि नक्सल आपरेशंस को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये जा सकते हैं।
एसईसीएल की 78 खदानें, इनके आसपास ही चल रहे हैं सैकड़ों अवैध कोल डिपो
और खनिज विभाग सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करते हैं। डिपो बंद करवाते जरूर हैं, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद ही वे दोबारा खुल जाते हैं।
एसईसीएल की अंडरग्राउंड और ओपन कास्ट को मिलाकर कुल 78 खदानें हैं। समय-समय पर तकनीकी कारणों से कुछ खदानों से कोयला निकालने का काम बंद कर दिया जाता है, लेकिन करीब 75-80 खदानों से वर्षभर कोयला निकालने का काम चलता रहता है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2017-18 में एसईसीएल ने 144.70 मिलियन कोयले का उत्पादन किया। पिछले स्टाक को मिलाकर कुल 151.11 मिलियन टन कोयला डिस्पेच किया गया, यानी लिंकेज के माध्यम से उद्योगों को बेचा गया। एसईसीएल कोयला बेचने के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी करता है। कोयला खरीदने वाली कंपनियों, उद्योगों को कोयला एसईसीएल की संबंधित खदान की साइडिंग से उठाना पड़ता है। खरीदी करने वाली कंपनियाें, उद्योगों के प्रतिनिधि भी यहां मौजूद रहते हैं। उनकी मौजूदगी में कोयले की सैंपलिंग यानी जांच होती है। साइडिंग से ट्रेनों की रैकों या हाइवा-ट्रकों के जरिए कोयला संबंधित जगहों के लिए रवाना कर दिया जाता है, लेकिन यहां सिस्टम की कमजोरी का फायदा कोयले की कालाबाजारी करने वाले उठाते हैं। एसईसीएल की सीमा से बाहर निकलते ही बड़े पैमाने पर चोरी का खेल शुरू होता है। चोरी की गई कोयले को अवैध कोल डिपो में डंप कर रखा जाता है। एसईसीएल की हर खदान के पास ऐसे कई अवैध कोल डिपो चल रहे हैं, जहां हर समय कई टन कोयला उपलब्ध रहता है। छोटे उद्योगों, ईंट भट्ठों सहित ईंधन के सहारे संचालित किए जा रहे कारोबार में चोरी के कोयले का उपयोग किया जाता है।
ऐसे चलता है डिपो में खेल
एसईसीएल की खदानों से उद्योगों को कोयला लिंकेज पर मिलता है। उद्योगपतियों के पास रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती इसलिए वह इन्हें डंप कर रखते हैं। कुछ उद्योगपति कोल डंप के लिए वह खनिज विभाग से अपने नाम पर लाइसेंस लेते हैं और अपने परिचित को यह काम सौंप देते हैं। परिचित इसका फायदा उठाता है। वह लिंकेज का कोयला डंप करने के नाम से डिपो में कोयले का अवैध कारोबार शुरू कर देता है। डिपो से वह जरूरत के हिसाब से उद्योग को कोयला तो भेजता है, पर यह मिलावटी होता है। उद्योगों के नाम से खदान से अच्छे ग्रेड का कोयला सप्लाई होता है। इनकी कीमत करीब 6 हजार रुपए टन होती है। वहीं चूरा व पत्थर की मिलावट वाला कोयला आधी कीमत पर मिलता है। डिपो संचालक दोनों तरह का माल रखता है। कोयला उद्योग में भेजते समय वह एक नंबर के कोयले में दो नंबर का कोयला मिला देता है। ट्रक चालक भी इसका फायदा उठाते हैं। वे उद्योगपतियों का एक नंबर का कोयला ऐसे डंपिंग डिपो में 5 रुपए किलो के हिसाब से बेच देते हैं। डिपो संचालक कोयले की जगह उसकी गाड़ी में काला पत्थर या डस्ट मिला देता है। कोयले के अवैध कारोबारियों को पकड़ने का काम पुलिस व खनिज विभाग का होता है, लेकिन कारोबारी दोनों को मिला लेता है।
नियमों का उल्लंघन करने पर वसूला गया था जुर्माना
उन्हें आगे किसी तरह की गड़बड़ी करने पर लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई है।
3. पुलिस: डिपो सील तो करती है, लेकिन वे फिर खुल जाते हैं | अवैध रूप से कोल डिपो संचालित करने, कोयले की कालाबाजारी की जानकारी मिलने पर पुलिस सीधी कार्रवाई कर सकती है। चोरी या गड़बड़ी के संदेह पर वह खनिज विभाग से तस्दीक कराती है और एफआईआर दर्ज कर मामले को कोर्ट में पेश करती है। बिलासपुर की बात करें तो पुलिस ने रतनपुर व हिर्री क्षेत्र के 12 कोल डिपो को छापा मारकर सील कर दिया था। अफसरों ने संबंधित थानेदारों को चेतावनी दी थी कि उनके क्षेत्र में यह कारोबार फिर से शुरू हुआ तो वे जिम्मेदार होंगे। दो माह बाद अचानक सभी डिपो एक-एक कर खुलते गए। यहां पहले की तरह फिर से अवैध कोयले का कारोबार शुरू हो गया है।
सारे डिपो बंद करने की लिखी थी चिट्ठी: एसपी
एसपी आरिफ शेख का कहना है कि हमने सभी डिपो को बंद करने की माइनिंग को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद फिर से खुल जाना समझ से परे है। जांच करने कलेक्टर ने पुलिस व खनिज विभाग की ज्वाइंट टीम बनाई है। अब जहां भी कोयले की कालाबाजारी की सूचना मिलेगी खनिज विभाग को साथ लेकर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार बन गई है पर जारी जुगाड़ है!
और एक तुम हो महाकवि (मुझे लज्जित करने के लिए उनके पास मेरे लिए ‘व्याज-स्तुति’ के जो सम्बोधन हैं, उनमें महाकवि भी एक अचूक तीर है), न दक्खन देख रहे हो न दक्खिन-पंथ!
अमां लानत है इतनी भी ईमानदारी और सत्यवादिता की लत पर!’ उनकी लानत से आदतन अप्रभावित होते हुए मैंने कहा, ‘अब किसी भी दल को बहुमत न मिला तो इसमें गवर्नर साहब क्या करते हाजी भाई? आप भी खामखां ‘लोकतंत्र खतरे में है’ वाले फ़ोबिया से ग्रस्त हो!’ बोले, ‘बात तो तुम्हरी भी ठीक है यार, कर्नाटक में सत्ता की छोकरी अनैतिक निकल गयी तो लगे भाजपाई सिटी मारने और कांग्रेस क्या खा कर पत्थर मारती, जो खुद साठ साल में सौ बार लोकतंत्र और उसकी नैतिकता को चौराहे पर बिठा चुकी है! और तुम्हारे वालों की हनक-हिम्मत-औकात को इसी कांग्रेस का सौ करोड़ी अजगर खा ही गया!’ मैंने कहा, ‘अब तो बहुमत-परीक्षण भी हो गया, सुबह-सुबह काहे ज़माने भर को गरिया रहे हो?’ वे बोले, ‘बहुमत की तो पूछोई मत, बेचारे राहुल को बहू तो मिल नहीं रही, बहुमत भी जैसे-तैसे जुगाड़ से मिलता है, और दूसरा न बहू की सुनता न बहुमत की! खैर, हमें क्या? चलते हैं, ज़रा हम भी अपनी दुकान सजा लें, कर्नाटक में तो ससुर बड़े-बड़े शाहों ने खोल ही ली। तब तुम शेर सुनो महाकवि -
‘वोटर ये सोचता है कि एमएलए जो चुना, उनका कबाड़ है या वो इनका कबाड़ है?
उन्नीस के नाटक का रिहर्सल है कर्नाटक, सरकार बन गई है पर जारी जुगाड़ है!’
मैंने राहत की सांस ली, आप भी लीजिए!
जैकेट व पेज 1 के शेष