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दर्जनों गांवों में मोबाइल सिग्नल न आने पर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | कमाही देवी

आधुनिक युग में अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि उनके घर किसी भी कंपनी के मोबाइल के टावर का सिग्नल नहीं आता है, तो इसमें किसी को भी विश्वास नहीं होगा। परंतु ब्लाक तलवाड़ा के एक दर्जन के करीब ऐसे कई गांव है, जो इस सुविधा से वंचित है।

जानकारी देते हुए एंटी क्राइम ब्यूरो के सदस्य सुखदेव सिंह डडवाल ने कहा की शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित यह गांव जिनमें तुंग, चमुही, सुखचैनपुर, चतरपुर, अलेरा, बाड़ी, धार, बेडिंग, लाकड़ पल्ली, पलीरी आदि ऐसे गांव है जो आज भी मुलभूत सुविधा से वंचित है। इन सभी गांवों में किसी भी कंपनी का सिग्नल पूरा नहीं आता है, अगर गलती से सिग्नल आ भी जाए तो हिमाचल के टावर का आता है, जिससे रोमिंग पड़ती है और कॉल महंगी पड़ती है। इस संबंध में गांव तुंग में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिसमें उनके इलाके के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। लोगों ने कहा की केंद्र सरकार एक तरफ हर घर में तकनीक और संचार सुविधा को पहुंचाने का दावा कर रही है, पर उनके गांव में आज के समय की मुख्य जरूरत मोबाइल का सिग्नल नहीं है, सभी गांवों के लोगों ने रोष जताते कहा कि चुनावों में हर पार्टी उन्हें दिलासा देती है कि चुनावों के बाद उनका मोबाइल टावर लग जाएगा पर आज तक यह सिर्फ चुनावी जूमला ही साबित हुआ है। लोगों ने सभी पार्टियों और सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी समस्या का जल्दी हल ना किया तो आने वाले चुनावों में सभी पार्टियों का बहिष्कार किया जाएगा। जानकारी देते हुए गांव के राकेश शर्मा ने बताया रि उनकी प|ी 6 महीने की गर्भवती थी, की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिस कारण उसे दसूहा अस्पताल लेकर जाना था,परंतु टैक्सी मंगवाने के लिए फोन करने के लिए उनके घर मोबाइल का सिग्नल नहीं था, जिस कारण टैक्सी भी दो घंटे बाद मिली, परंतु तब तक शिशु की मौत हो चुकी थी। ऐसे और भी कई मरीज दुर्घटना होने या बीमार होने पर सिग्नल न होने की बजह से समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते है पर सरकार ने अभी तक अपनी तरफ से सिर्फ आश्वासन ही दिया है।

फोन के सिग्नल न होने से गर्भवती को समय पर टैक्सी न मिलने के कारण शिशु की हो चुकी है मौत

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