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संस्कृति को बढ़ावा देने हुई थी जयंती समारोह की शुरुआत

3 वर्ष पहले
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26 अप्रैल 1963 काे पीठ पर हुई थी भगवान परशुराम की प्राण प्रतिष्ठा

भास्कर संवाददाता | दतिया

श्री पीतांबरा पीठ पर हर साल अक्षय तृतीया पर तीन दिवसीय जयंती समारोह का आयोजन किया जाता है। आयोजन की नींव 87 साल पहले पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज ने मढ़िया के महादेव पर रखी थी। तब से निरंतर जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। वहीं पीठ पर भगवान परशुराम की प्राण प्रतिष्ठा 55 साल पहले परशुराम जयंती पर 26 अप्रैल 1963 को स्वामी महाराज ने कराई थी। भगवान परशुराम को मां पीतांबरा व श्रीविद्या का उपासक माना जाता है।

पीठ के पुजारी डॉ. पं.चन्द्र मोहन दीक्षित के अनुसार पूज्यपाद स्वामी जी महाराज 1929 में दतिया आए थे। वह कुछ समय मढ़िया के महादेव पर रुके। संस्कृत व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मढ़िया के महादेव पर जयंती समारोह की शुरुआत आद्य गुरु शंकराचार्य जयंती के साथ की। पहला समारोह भव्यता पूर्वक मनाया गया था। शहर के प्रमुख मार्गों से चल समारोह निकाला गया। विद्वानों के प्रवचन हुए। पीठ की स्थापना के बाद यह क्रम पीठ पर जारी रहा। पं. दीक्षित के अनुसार 26 अप्रैल 1963 वैशाख शुक्ल तृतीया परशुराम जयंती के दिन पीठ पर पूज्यपाद श्री स्वामी जी महाराज के सानिध्य में भगवान परशुराम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। तब से निरंतर यहां परशुराम की पूजा अर्चना की जाती है। जयंती समारोह पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश भर से आए श्रद्धालु भाग लेकर पुण्य लाभ लेते हैं।

श्री पीतांबरा पीठ पर हर साल अक्षय तृतीया से शुरू होता है तीन दिवसीय जयंती समारोह, 87 साल से हो रहा है आयोजन

अश्वत्थामा की साधना स्थली से जाना जाता है

पं. दीक्षित के अनुसार भगवान परशुराम श्रीविद्या के साथ भगवती बगलामुखी के उपासक थे। भगवान परशुराम ने दत्तात्रेय से दीक्षा ली थी। इसके बाद भगवान परशुराम ने द्रोणाचार्य एवं द्रोणाचार्य ने अश्वत्थामा को मंत्र दीक्षा दी थी। पीठ को अश्वत्थामा की साधना स्थली भी मानी जाती है। माना जाता है कि अभी वे यहां नियमित साधना के लिए आते हैं। कई साधकों को उनके दर्शन लाभ होने का दावा भी करते हैं।

पीठ पर आज होगा परशुराम का अभिषेक

श्री पीतांबरा पीठ पर त्रि दिवसीय जयंती समारोह की शुरुआत 18 अप्रैल को भगवान परशुराम जयंती के साथ होगी। सुबह भगवान परशुराम का पूजन अभिषेक के बाद शाम 6 बजे संस्कृत गोष्ठी व शाम 7 बजे से हिंदी प्रवचन होंगे। जिसमें यमुना नगर हरियाणा के वेदांत व भागवताचार्य पं. कैलाश चन्द्र पंत व चित्रकूट धाम के अनंत जी महाराज प्रवचन करेंगे।

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