गोष्ठी में कवियों ने गुदगुदाया
गोष्ठी में रचना पाठ करते कवि।
कवि साहित्यकार मंच की हुई मासिक काव्य गोष्ठी
भास्कर संवाददाता | दतिया
जीजा चलो मेला में जाने, मोबाइल हमें तुमसे लुवाने । जीजा साली के रिश्तों पर हास्य की कविता अर्चना जाटव ने जैसे ही सुनाई। उपस्थित कवि हंसने के लिए मजबूर हो गए। मौका था कवि साहित्यकार मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का। सुमन साहित्य सदन पर आयोजित गोष्ठी के मुख्य अतिथि संजय रावत रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार महेश लाक्षाकार अनुरागी ने की। सरस्वती पूजन व वंदना क साथ गोष्ठी का शुभारंभ किया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ. हरिसिंह, लोकेंद्र सिंह व राजेन्द्र खेंगर ने किया। इसके बाद शुरू हुआ काव्य पाठ का सिलसिला।
राजेन्द्र सिंह खेंगर ने कहा कि देश पर मर कर सब कुछ खोकर दे गए थे आजादी, जनता तो परतंत्र आज भी, है स्वतंत्र बस खादी। पूरन शर्मा पूर्ण ने अपनी रचना में कहा- हमारे देश की मांटी की खुश्बू यार चंदन है। सुन्दरलाल श्रीवास्तव ने कहा- हम तो हो गए यार रिटार रहे हम बांके थानेदार। हरी सिंह हरीश ने कहा कि - हमारे दिल पर तुम्हारी यादें मचल रही हैं, नींद क्यों रात भर नहीं आती, करवटें बदल रही है। वहीं लक्ष्मी नारायण झा, महेश लाक्षाकार, कालका प्रसाद तिवारी, बालकृष्ण बाथम ने भी काव्य पाठ किया । संचालन लक्ष्मीनारायण झा ने किया। अंत में आभार व्यक्त कवि साहित्यकार मंच के अध्यक्ष हरिसिंह हरीश ने व्यक्त किया।