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एक किमी दूर नदी से पानी लाना पड़ता था इसलिए पलायन कर गए रूर में रहने वाले अधिकांश परिवार

3 वर्ष पहले
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नदी पर आकर बर्तन धोते ग्राम रूर में रहने वाले बच्चे व दूसरे चित्र में घर के लिए सिर रखकर पानी ले जाते हुए।

विकास कार्यों में भी रूर गांव के साथ हो रहा भेदभाव

गांव के लोग बताते हैं कि रूर गांव भले ही ग्राम पंचायत कुलैथ में शामिल हो लेकिन रूर में विकास कार्य नहीं हुए। पूरे गांव में केवल 200 शौचालय बनवाए गए हैं। जगराम कॉलेज से एक साल पहले आठ लाख की लागत से सड़क का निर्माण होना था लेकिन मिट्‌टी और बजरा डालकर खानापूर्ति कर दी गई। गांव में पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। एक कुलैथ से रूर और दूसरा रास्ता बैना से रूर के लिए जाता है। दोनों की दूरी एक-एक किमी है। लेकिन पक्के मार्ग नहीं हैं। गांव के लोगों ने बताया कि सड़क, पानी, बिजली, शौचालय, यह सभी काम सरपंच ने अपने गांव कुलैथ में कराए थे, रूर गांव के लिए शासन की एक भी योजना नहीं बनी है।

ग्राम पंचायत कुलैथ में शामिल रूर में विकास कार्य ही नहीं हुए, गांव में एक हैंडपंप, वह भी लंबे समय से खराब

पानी संकट की वजह से इन लोगों ने छोड़ा गांव

गांव में सड़क, पानी, बिजली आदि की सुविधा न होने के कारण गांव में रहने वाले रामजी सेन, रमेश, गणेशचंद्र, हरीमोहन, करण सिंह बृजेंद्र झा, हरी झा, रमेश झा सहित कई परिवार गांव से पलायन कर शहरों में जाकर बस गए हैं। इनके घरों पर ताले लगे हैं। गांव के लोग बताते हैं कि यहां केवल वे ही परिवार रह गए हैं जो जिनकी गांव में जमीन है और वे केवल खेती पर ही निर्भर हैं। कृषक परिवारों ने मवेशियों को भी खुला छोड़ दिया है ताकि कम से कम पानी खर्च हो।

गांव में दो हैंडपंप लग जाएं तो हल हो जाएगी समस्या

गांव की सबसे बड़ी समस्या पानी की है। गांव के लोगों को पानी भरने के लिए एक किमी दूर नदी पर जाना पड़ता है। बर्तन धोने हों, चाहे नहाना हो, नदी पर ही जाना पड़ता है। दो हैंडपंप लग जाएं तो समस्या हल हो जाएगी। कु. माया, निवासी रूर

नदी का गंदा पानी पीकर लोग हो रहे हैं बीमार

गांव के लोग नदी का गंदा पानी पी रहे हैं। गंदे पानी से पेट, उल्टी दस्त की परेशानी होती है। मम्मी पापा मजदूरी करने जाते हैं इसलिए हमें ही पानी भरना पड़ता है। कु. मालती, निवासी रूर

हमें हैंडपंप लगवाने की अनुमति नहीं, क्या कर सकते हैं

गांव में 10-12 घर ही रह गए हैं, बाकी तो गांव छोड़कर चले गए। हैंडपंप के लिए दो बार विधायक को बताया और दो-तीन बार ही पीएचई को बताया। लेकिन किसी ने हैंडपंप नहीं लगवाया। हमारे पास पंचपरमेश्वर की राशि है लेकिन उससे हैंडपंप नहीं लगवाने की अनुमति नहीं हैं। अगर अनुमति मिल जाए तो हम उस राशि से भी लगवा देंगे। राजेंद्र जाटव, सरपंच कुलैथ

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