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नलों से आ रहा गंदा पानी, मजबूरी में लोग खरीद रहे वाटर कैंपर, एक माह में 60% बढ़ गई मांग

3 वर्ष पहले
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कवरगंगा प्लांट से पहले 3 हजार लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई किया जाता था। वहीं इन दिनों 5 हजार लीटर से अधिक पानी सप्लाई किया जा रहा है। प्लांट के मैनेजर चंदन दासवानी का कहना है कि कैंपर के लिए लोगों की लगातार मांग आ रही है, लेकिन कम स्टाफ की वजह से आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

मां बगुलामुखी वाटर प्लांट से भी डेढ़ महीने पहले तक 3 हजार लीटर तक पानी प्रतिदिन सप्लाई होता था। इन दिनों यहां से 4.5 से 5 हजार लीटर पानी सप्लाई किया जा रहा है। प्लांट के मैनेजर अश्विनी तिवारी का कहना है कि नलों में आ रहे दूषित पानी की वजह से डिमांड इतनी बढ़ गई है।

20 रुपए में बिक रहा 15 लीटर का एक कैंपर

भास्कर संवाददाता | दतिया

शहर में नलों से घरों में गंदा पानी आ रहा है। इस पानी को पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दूषित पानी की वजह से बच्चे उल्टी-दस्त के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में मजबूरी में लोगों ने वाटर कैंपर खरीदना शुरू कर दिया है। डेढ़ महीने में वाटर कैंपर की मांग 60 फीसदी तक बढ़ गई है। 15 लीटर का एक वाटर कैंपर 20 रुपए में बिक रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, लगातार मांग बढ़ने से शहर में लगे वाटर प्लांट कैंपर की पूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं नगर पालिका के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।

बारिश होने के बाद से पिछले करीब डेढ़ महीने से नलों से मटमैला और दूषित पानी आ रहा है। यह पानी पीने से पेट से संबंधित बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मजबूरी में स्वच्छ पानी के लिए लोगों को पानी के कैंपर खरीदने पड़ रहे हैं। इन दिनों कैंपरों की मांग 60 फीसदी तक बढ़ गई है। डेढ़ महीने पहले गर्मी के मौसम में शहर में चार हजार कैंपर सप्लाई किए जाते थे, वहीं इन दिनों से यह संख्या 6 हजार से भी अधिक हो गई। लगातार मांग बढ़ने से वाटर प्लांट के संचालक भी पानी की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। अधिकांश घरों में एक-एक दिन छोड़कर कैंपर पहुंचा रहे हैं।

पहले शहर में 4 हजार पानी के कैंपर सप्लाई होते थे, अब छह हजार से अधिक की मांग

फिल्टर के नाम पर औपचारिकता, बिना जांच नपा कर रही पानी सप्लाई

नगर पालिका अंगूरी बैराज बांध से शहर में पानी की सप्लाई करती है। हालांकि सप्लाई करने से पहले पानी फिल्टर करने के लिए नगर पालिका पर ट्रीटमेंट प्लांट है लेकिन यहां न ट्रेंड कर्मचारी तैनात हैं न ट्रीटमेंट के लिए पर्याप्त सामग्री। बस थोड़ी सी एलम, ब्लीचिंग डालकर पानी सप्लाई कर दिया जाता है। हैरानी इस बात की है कि सप्लाई होने वाले पानी की नगर पालिका समय-समय पर जांच भी नहीं कराती। फिल्टर प्लांट पर पानी की जांच के लिए लैब है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। बिना जांच के ही शहर में पानी सप्लाई किया जा रहा है।

बच्चों में उल्टी-दस्त की समस्या बढ़ी

सामान्य दिनों की तुलना में बच्चों में उल्टी-दस्त की समस्या बढ़ गई है। इलाज के लिए आने वाले बच्चों में 60 प्रतिशत बच्चों को यही समस्या है। दूषित पानी और खानपान से ऐसा हो रहा है। लोग खानपान पर विशेष ध्यान दें । डॉ. प्रदीप उपाध्याय, शिशु रोग विशेषज्ञ

अब गंदे पानी की शिकायत नहीं

फिल्टर प्लांट पर पर्याप्त मात्रा में एलम ब्लीचिंग डालकर पानी का ट्रीटमेंट करवा रहे हैं। गंदे पानी की शिकायत नहीं आ रही है। बारिश की वजह से पहले थोड़ी समस्या आ गई थी, जिसके बाद नए सिरे से एलम मंगाई गई थी। एके दुबे, सीएमओ नपा

प्लांट संचालक बोले- मांग इतनी बढ़ी कि हम आपूर्ति नहीं कर पा रहे

ठंडी सड़क पर सप्लाई करने के लिए रखे पानी के कैंपर।

दतिया में छह वाटर प्लांट रजिस्टर्ड

हमारे यहां 6 वाटर प्लांट रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा यदि वाटर प्लांट अवैध तरीके से चल रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। दिनेश निम, फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर

मानकों पर खरे नहीं, फिर भी तेजी से बढ़ रहा पानी का कारोबार

नगर पालिका अफसराें की लापरवाही से शहर में कैंपर से पानी सप्लाई का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। पहले शहर में एक-दो वाटर प्लांट थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 20 हो गई है। ज्यादातर वाटर प्लांट का खाद्य सुरक्षा विभाग में रजिस्ट्रेशन नहीं है। चूंकि मांग अधिक है और लोगों को आसानी से कैंपर भी नहीं मिल रहे, इसलिए लोग इन प्लांट से पानी ले रहे हैं।

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