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पीतांबरा माई को संगीत प्रिय, इसलिए जयंती पर होती है संगीत सभा

3 वर्ष पहले
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दतिया | मां पीतांबरा को संगीत प्रिय है। उनके हाथ में जो अस्त्र, शस्त्र हैं, वह शब्दों के भी प्रतीक हैं। उन्हें ब्रह्मानंद प्रदायनी भी कहा जाता है। इसलिए पीठ पर मां पीतांबरा जयंती पर संगीत सभा के आयोजन की परंपरा शुरू की गई। जो अनवरत रूप से जारी है। पीठ के पुराने सेवक व वरिष्ठ न्यासी हरी राम सांवला परंपरा शुरू होने को लेकर बताते हैं। पीठ पर जब भी कोई संगीतज्ञ आता था तो स्वामी महाराज मां पीतांबरा को गायन सुनाने के लिए कहते थे। कारण माई को संगीत प्रिय है। श्री सांवला ने बताया कि माई की चारों भुजाओं में जो आयुध (शस्त्र) हैं वह वाणी से संबंधित हैं। माई के ऊपर के दो हाथों में से एक में गदा व एक में वज्र है। गदा का संबंध भाषा में प्रयोग गद्य व पद्य से है। वज्र यानि कठोर होता है, जो वज्र वाणी का प्रयोग करते है लोग उनसे दूर रहते हैं। उन्हें वज्र भाषी कहा जाता है। नीचे के दो हाथों में पाश व जिव्हा है। पाश यानि बांधना। अच्छी वाणी से लोग वश में हो जाते हैं।

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