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सात साल पहले बनाई थी 48 सड़कों की कार्ययोजना, 15 गांवों में अब तक अधूरी

3 वर्ष पहले
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भगुवापुरा में मुख्य मंत्री सड़क योजना के तहत डाली गई सड़क एक सप्ताह में उखड़ गई।

एक सप्ताह में उखड़ गई सड़कें

धर्मपुरा निवासी कुलदीप जाटव के अनुसार भगुवापुरा आलमपुरा रोड से धर्मपुरा के लिए डली सड़क निर्माण के सप्ताह भर के अंदर ही गड्ढों में तब्दील हो गई। अभी से सड़क पर वाहन फिसलते हैं। यही हाल भगुवापुरा से गोपालपुरा सड़क का है जो कि अभी से अपना अस्तित्व खो चुकी है। धूल और गड्ढे अभी वाहनों के साथ धूल का गुबार उड़ा रहे हैं। पर आगामी माह जब बारिश प्रारंभ हो जाएगी तो इन गड्ढों में जमा पानी लोगों को निकलना भी दूभर कर देगा। साथ ही बीमारियों को भी परोसेगा। बारिश के वक्त यह सभी कच्ची सड़कें ग्रामीणों का बाइक के साथ निकलना काफी मुश्किल पैदा कर देगी।

सड़क में यह रहीं कमियां

सभी सड़कों में बारीक बजरा एवं मिट्टी की घटिया क्वालिटी तथा मानक के अनुसार कंकड़ नहीं डालने के कारण सड़कों की शिकायतें होने लगीं। स्वयं ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने तय सीबीआर 7 से कम का मटेरियल डालने की सच्चाई को स्वीकार कर कई सड़कों का निर्माण दोबारा तक करवाया।

सभी सड़कों का हाल बेहाल

मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत जो सड़कें डली हैं उनमें मिट्टी का कार्य ही सबसे अधिक है। सड़क पर या तो मानकों के अनुसार मिट्टी नहीं डली जिसके कारण उनमें गड्ढे हो गए। प्रशासन के यहां भौतिक सत्यापन में पूर्ण हो चुकी सड़क की हालत पर गौर किया जाए तो पिछले माह पूर्ण हुई सड़कें भी उखड़ने लगीं हैं।

इन सड़कों का नहीं हुआ निर्माण

15 ऐसी सड़कें जिनके निर्माण का कार्य 7 वर्ष में भी पूर्ण नहीं हुआ उनमें खैरोना से निमोना, महरोली से चंगपुरा, महरोली से सिकरोली, दिगुवां भोवई मार्ग से बिढ़ोरा, रायपुरा से भोवई खुर्द, दिगुवां से सलोचनपुरा, अटरा से रठावली, दतिया सेंवढ़ा रोड से खंजापुरा, देभई से वीरपुरा, देभई से खेरीभाट, दैपुरा से विजयपुरा, रनियापुरा से दैपुरा, सिरसा से रनियांपुरा, देगुवां भोवई से रायपुरा, सेंवढ़ा से मदनपुरा शामिल हैं। इन ग्रामीण सड़कों की निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत राशि का पचास फीसदी भुगतान भी किया जा चुका है। विभाग की साइड पर इन सड़कों को प्रगतिरत दिखाया जा रहा है।

रोलर से कुटाई भी नहीं कराई

सड़क के निर्माण के समय रोड पर रोड रोलर चला कर कुटाई करवानी थी। लेकिन ठेकेदार ने इसे भी हल्के से लिया। हालत यह हुई कि निर्माण के बाद लगभग हर सड़क ऊंचाई निचाई के दर्शन कराने लगी। वर्तमान में सड़कों पर गड्ढे और बारिश के दौरान जमा कीचड़ शासन की मंशा का धता बता रहा है। मालूम हो कि इन सड़कों को मजबूती देने के लिए सड़क पर एक फीट मिट्टी तथा इतना ही सिलेक्ट का बेस डलना था। कुटाई के बाद उस पर बजरा डाला जाना था जिसकी मोटाई भी लगभग 30 सेमी होनी थी। इस प्रकार सड़क भले ही पक्की डामर से युक्त नहीं रहती पर उसका ढाई फीट मोटा बेस उसकी उच्च गुणवत्ता का प्रमाण होती।

सभी सड़कों को दुरुस्त कराएंगे

अधूरी मुख्यमंत्री सड़कों को आगामी 15 दिन में पूर्ण करवाने का लक्ष्य है। जिन सड़कों का घटिया निर्माण हुआ है उनको टीएस नहीं दी गई है। पहले वह दुरुस्त होगी उसके बाद ही टीएस हो सकेंगीं। धनंजय मिश्रा, एसीईओ जिला पंचायत दतिया

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