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साहब! परासरी केंद्र पर पांच दिन से नहीं हो रही खरीदी, पक्की रसीद भी नहीं दे रहे
जनसुनवाई में शिकायत करने पहुंचे किसान।
पांच बार दिया आवेदन फिर भी नहीं हुआ सीमांकन
ग्राम तिलैथा निवासी देवलाल पुत्र घंसू सहारिया ने आवेदन देकर बताया कि उसकी जमीन तिलैथा गांव में है उसका सीमांकन का आवेदन तहसीलदार को दिया था फाइल भी इंदरगढ़ तहसील में चल रही है लेकिन सीमांकन नहीं हुआ। पांच बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुका है। समय रहते सीमांकन न होने के कारण छह बीघा जमीन दूसरे किसानों ने दबा ली है, इसलिए वह सीमांकन कराना चाहता है।
अग्निपीड़ितों को 15 दिन बाद भी नहीं मिली सहायता
ग्राम विजनपुरा निवासी ज्वालाप्रसाद पुत्र नारायणदास कुर्मी, हरगोविंद पुत्र लालाराम बाढ़ई, टुड़ू अहिरवार आदि ने आवेदन देकर बताया कि 30 अप्रैल को नरवाई जलाते वक्त उनके घरों में आग लग गई थी। जिससे सभी घर जलकर नष्ट हो गए थे। कई लोगों को आग लगने से जले घरों के एवज में शासन ने मुआवजा राशि भी दे दी है लेकिन हमें आज तक राशि प्राप्त नहीं हुई है।
खरीदी केंद्र से कच्ची रसीद मिलने से किसान चिंतित
किसान बोले मौसम खराब हो रहा है ऐसी स्थिति में जब गेहूं खुले मैदान में पड़ा हो तो कृषकों की क्या स्थिति होगी। ऐसी स्थिति में किसान धैर्य खोकर आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लेते हैं। किसानों ने कहा कि परासरी का कांटा चालू कराया जाए। ग्राम गुजर्रा के किसान रामदयाल गुर्जर, जुगल किशोर गुप्ता, घनश्याम कुशवाहा, सीताराम राजपूत, लक्ष्मन राजपूत आदि किसानों ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों परासरी केंद्र पर गेहूं डाला था। गेहूं डालने के पश्चात किसानों को कच्ची रसीद प्रदान की गई तथा किसानों से कहा गया कि आपके खाते में राशि आ जाएगी। इस बीच प्रशासन ने केंद्र को सील कर दिया। जबकि जिन किसानों ने गेहूं डाला उनका गेहूं खुले में पड़ा है। कच्ची रसीदें होने के कारण किसानों को आशंका है कि कहीं किसानों द्वारा डाला गया गेहूं गफलत में न पड़ जाए और किसानों का भुगतान अटक जाए। किसान चिंतित हैं। इसलिए पक्की रसीद दिलाई जाकर शीघ्र भुगतान कराया जाए। किसानों ने कहा कि वे चार साल से सूखे की मार झेल रहे हैं। बैंक और प्राइवेट काश्तकारों का कर्ज है। भरण पोषण में भी दिक्कत आ रही है। बता दें कि 10 शेष रह गए हैं। अब तक एक लाख 22 हजार मैट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। लेकिन गेहूं केवल 11 हजार किसानों का ही तुल सका है।