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बड़ौनी में उप मंडी नहीं, 80 गांवों के किसान फसल बेचने के लिए दतिया जाने को मजबूर

3 वर्ष पहले
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14 साल पहले बड़ौनी में उप-मंडी खोली गई थी। वहीं 3 लाख रुपए की लागत से भवन एवं किसानों के वाहन लगाने के लिए प्लेट फार्म बनाए गए थे। वहीं तत्कालीन विधायक घनश्याम सिंह ने लोकार्पण किया था। उसके बाद किसानों की फसल की बोली शुरू हुई। वहीं किसानों को दतिया मंडी में नहीं आना पड़ता था, लेकिन विगत पांच साल से बड़ौनी में व्यापारियों द्वारा किसानों के अनाज की बोली नहीं लगाई जा रही है। किसानों को मजबूर होकर 10 किलोमीटर दूर दतिया जाना पड़ रहा है, जबकि कृषि उपज मंडी समिति दतिया को हर साल बड़ौनी के व्यापारियों से 13 लाख की आय हो रही है। फिर दतिया मंडी समिति अधिकारियों द्वारा उप मंडी पर बोली के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस वजह से किसान परेशान हो रहे हैं।

बड़ौनी क्षेत्र से करीब 80 गांव लगे हुए हैं। इन गांव के किसानों को अनाज बेचने के लिए 10 किलोमीटर दूर दतिया जाना पड़ता है या फिर डबरा। वहीं छोटे किसानों के पास अधिक अनाज न होने के कारण सस्ते दाम में व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। उप मंडी में व्यापारियों द्वारा बोली नहीं लगाई जा रही है। जिसकी वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि बड़ौनी में पांच बड़े व्यापारी हैं। जिनके पास अनाज खरीदने का लाइसेंस है। कुछ किसान परेशानी की वजह से बड़ौनी में अपना अनाज व्यापारियों को सस्ते दाम में बेच रहे हैं। किसानों को अनाज का उचित दाम नहीं मिल पाता, जबकि कृषि उपज मंडी दतिया द्वारा एक कर्मचारी सतीश गौतम को तैनात किया गया है। बड़ौनी में उप-मंडी होने के बाद भी किसानों को सुविधा नहीं मिल पा रही है, जबकि शासन किसानों को हर सुविधा मुहैया कराने की बात करता है।

बड़ौनी क्षेत्र उप-मंडी का 2004 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक घनश्याम ने लोकार्पण किया था। उस समय तीन लाख की लागत से इमारत एवं प्लेट फार्म बनवाए गए थे। वहीं किसान अपना अनाज बेचने के लिए आते थे, लेकिन करीब 5 साल से बडौनी में बोली लगाना व्यापरियों ने बंद कर दिया है। जिसकी वजह से किसानों को दतिया या डबरा अनाज बेचने के लिए जाना पड़ रहा है।

बड़ौनी में मंडी के लिए बनाया गया भवन।

कम टैक्स देने के लिए व्यापारी किसान से खरीद लेते हैं उपज

यदि बड़ौनी में कृषि उप-मंडी नहीं है तो हर साल 13 लाख की आय कैसे आ रही है। अधिकारियों और व्यापारियों की साठगांठ की वजह से उप-मंडी पर बोली लगाना बंद कर दिया गया है। वहीं व्यापारी अपने घर पर किसानों से अनाज खरीद रहे हैं, जिससे व्यापारियों को टैक्स भी कम देना पड़ रहा है, और किसानों से सस्ते दामों में अनाज खरीद रहे हैं, जिससे व्यापारियों को अच्छा फायदा हो रहा है। वहीं व्यापारी अधिकारियों को सुविधा शुल्क भेज देते हैं। जिससे अधिकारी भी चुपचाप रहते हैं। अगर बड़ौनी में ही मंडी शुरू हो जाए तो किसानों को उपज का सही दाम मिल सकेगा।

अभी उप-मंडी नहीं है बड़ौनी, हाट बाजार है

बड़ौनी में अभी उप-मंडी की अनुमति नहीं मिली है। अभी वर्तमान में बड़ौनी से 13 लाख की आय हो रही है। व्यापारियों द्वारा जिन किसानों का माल खरीदा जा रहा है, उसका टैक्स व्यापारी जमा करते हैं। बड़ौनी में अभी तो हाट बाजार है। छोटे-छोटे किसान यहां पर अपना अनाज बेचकर चले आते हैं, बड़े किसान तो अपनी उपज बेचने के लिए दतिया आते हैं। राकेश गोस्वामी, सचिव कृषि उपज मंडी दतिया

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