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52 दिन में सिर्फ 13 हजार किसानों के गेहूं की खरीद, 10 हजार अब भी कर रहे इंतजार

3 वर्ष पहले
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खरीद केंद्र के अंदर जगह नहीं होने के कारण बाहर खड़ी किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां।

पूरे सीजन विवादों में रहे खरीदी केंद्र

जिले में समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी केंद्रों पर 26 मार्च से गेहूं की शुरुआत हो गई थी लेकिन किसान अप्रैल माह से उपज लेकर पहुंचना शुरू हुए। लेकिन जब किसानों का पहुंचना प्रारंभ हुआ तो खरीदी केंद्रों पर किसानों के साथ भेदभाव करने की शिकायतें आने लगीं। इमलिया, परासरी और कामद का खरीदी केंद्र इसका ताजा उदाहरण है। खुद भांडेर विधायक पिरोनिया ने एक वीडियो वायरल कर कामद खरीदी केंद्र की पोल खोलते हुए रिश्तेदारों का गेहूं पहले तौलने और किसानों के साभ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। यही नहीं परासरी खरीदी केंद्र पर गड़बड़ी को लेकर भोपाल से ही केंद्र को बंद कर दिया गया है। यह केंद्र अब उपरांय सोसायटी द्वारा चलाया जा रहा है।

नहीं लगे बेरिकेड्स

इस साल के पहले के वर्षों में गेहूं खरीदी का आंकड़ा 75 से 80 हजार मैट्रिक टन तक सीमित रहा। लेकिन इस बार 1 लाख 32 हजार मैट्रिक टन खरीदी हो चुकी है और खरीदी में आठ दिन शेष हैं। हजारों किसान अभी भी बिना गेहूं बेचे रह गए। जिला प्रशासन ने दीगर जिले से दतिया में गेहूं की आवक का अंदाजा लगाते हुए कुछ टीमें गठित की थीं। यही नहीं दतिया में शिवपुरी, झांसी, ग्वालियर, भिंड सीमा पर बैरियर लगाने के निर्देश दिए थे ताकि किसी भी कीमत पर दीगर जिले से दतिया में गेहूं बिकने के लिए न आए लेकिन कहीं भी बेरिकेड्स देखने को नहीं मिले। रातों रात यूपी से दतिया में गेहूं आ रहा है और बिक रहा है। यही नहीं व्यापारियों के गेहूं की भी जमकर खरीदी हो रही है। करीब 15 दिन पहले खुद एसडीएम वीरेंद्र कटारे ने उदगवां में 150 क्विंटल गेहूं से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पकड़कर जब्त की थी।

खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना है, लगातार हो रही खरीदी

गेहूं की खरीदी लगातार हाे रही है। सभी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है। अब तक एक लाख 34 हजार मैट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। डीएस धाकड़, प्रभारी खाद्य अधिकारी दतिया

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