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सुसाइड से एक दिन पहले ही आरक्षक ने अावेदन देकर कहा था- मैं परेशान हूं, नौकरी नहीं करना...

3 वर्ष पहले
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आरक्षक की खुदकुशी के बाद जांच पड़ताल करते पुलिस अफसर।

2017 में भी की थी कोशिश

29वीं बटालियन में आरक्षक के पद पर पदस्थ किशन सिंह नवंबर 2017 में भी रायफल से गोली मारने का प्रयास कर चुका है। कमांडेंट सुहाने ने बताया कि पिछले साल उसने रायफल लोड कर ली थी लेकिन एनवक्त पर साथी जवानों ने उसे आत्महत्या का प्रयास करते देख लिया था, इस कारण तत्काल रायफल छीन ली थी। जब इस मामले की जांच हुई तो उसमें आरक्षक ने बताया कि पारिवारिक कलह की वजह से वह ऐसा करने पर मजबूर हुआ था। ठीक सात महीने बाद उसने आत्महत्या कर ली।

भोपाल रवाना होना था, लेकिन सुनवाई के कारण रुक गया

आरक्षक किशन एफ कंपनी में तैनात था। एफ कंपनी कर्नाटक चुनाव में गई थी। जब चुनाव खत्म हुए थे एफ कंपनी भोपाल में ही रुक गई थी। इसके बाद एफ कंपनी के शेष जवानों को भी कंपनी के लिए आवश्यक सामान लेकर भोपाल रवाना होना था। इनमें किशन का नाम भी था। चूंकि किशन ने शुक्रवार को वीआरएस के लिए आवेदन दे दिया था और मंगलवार को उस पर सुनवाई होनी थी। इसलिए किशन का भोपाल जाना कैंसिल कर दिया था।

दो साल में तीन की गई जान

29वीं बटालियन में दो साल में तीन जवान खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर चुके हैं। एक नवंबर 2017 को सर्किट हाउस में ठहरे एसएएफ सिपाही अशोक सिंह चौहान ने शासकीय रायफल से खुद को गोली मार ली थी। अशोक सिंह की आत्महत्या के पीछे भी पारिवारिक कारण निकलकर सामने आया था। इसी प्रकार 28 जून 2016 को 24 वर्षीय रवि शर्मा निवासी भिंड ने बबीना में स्थित अपनी ससुराल में खुद को गोली मार ली थी। मृतक रवि शर्मा वर्ष 2011 में भर्ती हुआ था और एसएएफ ड्राइवर था।

मंगलवार को थी वीआरएएस मामले की सुनवाई

मैग्जीन गार्ड पर हमेशा एक-तीन का गार्ड लगा रहता है। सुबह सात बजे गार्ड चेंज होने थे। अशोक कुमार संतरी ड्यूटी पर था। आरक्षक किशन भी ड्यूटी पर था। 11.40 बजे जब बाकी साथी खाना खा रहे थे। तभी गार्ड संदीप ने गोली चलने की आवाज सुनी, अंदर आया तो देखा कि किशन के ब्लड निकल रहा है। उसने मुझे बताया तो मैं भी तत्काल आ गई। मृतक ने वीआरएस के लिए एक आवेदन दिया था और उस पर मंगलवार से सुनवाई होना थी कि आखिर वीआरएस क्यों लेना चाहते हो। लेकिन इससे पहले ही उसने सुसाइड कर लिया। सविता सुहाने, कमांडेंट, 29वीं बटालियन

कमरे में अकेला था आरक्षक, बाहर साथी खाना खा रहे थे

29वीं बटालियन में मैन गेट से करीब चार किमी दूर मैग्जीन गार्ड है। यहां हमेशा तीन-एक का गार्ड तैनात रहता है। मैग्जीन गार्ड के सामने ही गार्ड रूम बना है। गार्ड ड्यूटी देने वाले जवान सामने बने गार्डरूम में ही विश्राम करते हैं। शनिवार को सुबह प्रधान आरक्षक कालीचरण पाल, अशोक कुमार प्रजापति, किशन कुशवाहा और संदीप शर्मा ड्यूटी पर थे। शनिवार को सुबह सात बजे रोटेशन ड्यूटी चेंज होने पर चारों मौजूद थे। निरीक्षण के लिए कमांडेंट सविता सुहाने भी मैग्जीन गार्ड रूम पर पहुंचीं तो किशन ने उन्हें सलामी दी। कमांडेंट ने सलामी का जवाब दिया। इसके बाद वे चंद सेकंड रुकने के बाद चली गईं। ड्यूटी खत्म होने पर किशन गार्ड रूम में अपनी खटिया पर जाकर लेट गया और वहीं पर गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर साथी दौड़कर आए तो किशन लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर तत्काल पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए।

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