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स्कूल के लिए रास्ता नहीं, सिर पर ढोकर लाते हैं रसद सामग्री

3 वर्ष पहले
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31 वर्ष बाद भी नहीं मिला भूमि का स्वामित्व, विद्यालय में विकास कार्य अटके, जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी नहीं दे रहे ध्यान

कंटीले तारों से गुजरते हंै बालक, स्कूल में नामांकन घटा

भास्कर न्यूज | दौसा (ग्रामीण)

बालकों को अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिए 31 वर्ष पूर्व राजकीय प्राथमिक विद्यालय मीणावाड़ा में स्कूल खुला था, लेकिन जनप्रतिनिधियों व सरकारी अधिकारियों की अनदेखी के चलते आज तक न तो इस स्कूल को रास्ता मिल सका और नहीं खेलने के लिए मैदान। मजबूरी में बच्चों को रोज कंटीलें तारों में होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। 31 साल से यह स्कूल खातेदारी भूमी में ही संचालित होने से स्कूल के विकास कार्य बिना खातेदार की अनुमती बिना अवरूद्ध हो रहे है।

जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने बताया कि 31 वर्ष पहले गांव के ही एक किसान ने विभाग को स्कूल खोले जाने के लिए 7 बिस्वा भूमि दान में दिए जाने की घोषणा कर विभागीय अधिकारियों से मिलकर खातेदारी भूमि में स्कूल खुलवाकर तीन-चार कमरों का निर्माण कराया था और स्कूल शुरू करा ली, लेकिन 31 वर्ष बाद भी स्कूल के नाम पर दी गई भूमी का स्कूल के नाम न तो रजिस्ट्री कराई और न ही एग्रीमेंट। इसके चलते आज भी स्कूल खातेदारी भूमी में ही संचालित हो रही है।

हमेशा रहता है अनहोनी का डर

रामजीलाल, कमलेश कुमार व रामचन्द्र सहित कई लोगों ने बताया कि स्कूल एंकात में खेतों में बनी होने के साथ-साथ बालकों को स्कूल आने-जाने के लिए रास्ता नहीं होने व रास्ते में तारबंदी कर दिए जाने से अनहोनी घटना घटित होने का अंदेशा बना रहता है। इसके चलते स्कूल में बालिकाओं को अकेली भेजना अभिभावकों ने बंद कर रखा है, जिसके चलते स्कूल का नामांकन घटकर नगण्य रह गया है। बार-बार अधिकारियों को अवगत कराऐ जाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके चलते आज भी स्कूल खातेदारी में संचालित हो रही है।

कई बार खातेदारों से संपर्क किया, लेकिन भूमि नाम नहीं करवाने से विकास कार्य अटके

स्कूल के नाम भूमी आंवटन के लिए कई बार खातेदार से संपर्क कर प्रस्ताव बनाकर अधिकारियों को भििजवा दिए, लेकिन खातेदार द्वारा भूूमि नाम नहीं कराए जाने के कारण स्कूल के विकास कार्य चारदीवारी सहित मुख्य गेट का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। राजेन्द्र प्रसाद मीणा, ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षाधिकारी

आधा किमी दूर से लाते हैं सामान

स्कूल भवन तक रास्ता नहीं होने के कारण बालकों के मिड डे मिल के लिए आने वाली रसद सामग्री भी आधा किमी दूर ही उतारकर वाहन चालक चले जाते है, जिसके चलते सामग्री को सिर पर रखकर लाना पड़ता है। स्कूल के चहुंओर कंटीले तार लगे होने के कारण आए दिन कपड़े फंसने से बालक घायल हो जाते है। बार-बार अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होने के कारण खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नरेंद्र शर्मा, प्रधानाध्यापक, राप्रावि मीणावाड़ा

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