घटिया स्टील फर्नीचर सप्लाई की जांच के लिए एसीबी पहुंची
महिला एवं बाल विकास विभाग में स्टील फर्नीचर खरीद में घटिया फर्नीचर सप्लाई के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद एसीबी जयपुर की टीम शुक्रवार को जांच करने दौसा पहुंची। टीम ने सीडीपीओ शहर व ग्रामीण कार्यालय में जांच की। एसीबी जयपुर के डीएसपी हरिनारायण मौर्य व इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा टीम के साथ दौसा पहुंचे।
टीम ने बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय शहर व ग्रामीण में संबंधित फर्मों द्वारा सप्लाई किए गए स्टील फर्नीचर आलमारी, टेबल, कुर्सी आदि के रिकार्ड खंगाला। टीम ने संबंधित अधिकारियों से फर्मों द्वारा सप्लाई किए गए स्टील फर्नीचर के बारे में जानकारी ली। डीएसपी हरिनारायण मौर्य ने बताया कि बजट घोषणा के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में स्टील फर्नीचर सप्लाई के आदेश जारी हुए थे। इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज सीको के माध्यम से विभिन्न फर्मों को स्टील फर्नीचर खरीद के लिए 12 करोड़ 98 लाख रुपए का ऑर्डर दिया था। इसके बाद इन फर्मों द्वारा सीडीपीओ कार्यालयों में स्टील फर्नीचर सप्लाई किया गया था। जो निर्धारित क्वालिटी का नहीं है।
घटिया क्वालिटी की सूचना पर किया था सत्यापन
राजसीको के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्टील फर्नीचर की खरीद के लिए 12 करोड़ 98 लाख रुपए का ऑडर विभिन्न फर्मों को दिया था। इस पर संबंधित फर्मों द्वारा फर्नीचर सप्लाई किया था। इस मामले में इन फर्मों द्वारा राजसीको व महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया क्वालिटी का फर्नीचर सप्लाई करने की सूचना मिलने पर एसीबी की टीम ने राजस्थान में करीब डेढ़ सौ सीडीपीओ कार्यालयों में सत्यापन किया था। जिसमें घटिया क्वालिटी का फर्नीचर पाए जाने पर एसीबी जयपुर ने केस दर्ज किया था। दौसा में सीडीपीओ कार्यालय में एसीबी की टीम ने 9 जनवरी को जांच की थी। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद अब एसीबी जयपुर की टीम दौसा पहुंची तथा दोनों कार्यालयों में जांच की।
ये सप्लाई हुआ था फर्नीचर
फर्मों ने सीडीपीओ कार्यालयों में आलमारी, टेबल, कुर्सी आदि सप्लाई किए थे। फर्मों ने यह सामान निर्धारित वजन, साइज, गेज के अनुसार सप्लाई नहीं किया। डीएसपी हरिनारायण मौर्य ने बताया कि फर्मों द्वारा सप्लाई किया गया स्टील फर्नीचर घटिया क्वालिटी का है। आलमारियों का वजन व गेज निर्धारित नमूने के अनुसार नहीं है। टीम द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है।
कार्यालय संवाददाता | दौसा
महिला एवं बाल विकास विभाग में स्टील फर्नीचर खरीद में घटिया फर्नीचर सप्लाई के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद एसीबी जयपुर की टीम शुक्रवार को जांच करने दौसा पहुंची। टीम ने सीडीपीओ शहर व ग्रामीण कार्यालय में जांच की। एसीबी जयपुर के डीएसपी हरिनारायण मौर्य व इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा टीम के साथ दौसा पहुंचे।
टीम ने बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय शहर व ग्रामीण में संबंधित फर्मों द्वारा सप्लाई किए गए स्टील फर्नीचर आलमारी, टेबल, कुर्सी आदि के रिकार्ड खंगाला। टीम ने संबंधित अधिकारियों से फर्मों द्वारा सप्लाई किए गए स्टील फर्नीचर के बारे में जानकारी ली। डीएसपी हरिनारायण मौर्य ने बताया कि बजट घोषणा के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में स्टील फर्नीचर सप्लाई के आदेश जारी हुए थे। इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज सीको के माध्यम से विभिन्न फर्मों को स्टील फर्नीचर खरीद के लिए 12 करोड़ 98 लाख रुपए का ऑर्डर दिया था। इसके बाद इन फर्मों द्वारा सीडीपीओ कार्यालयों में स्टील फर्नीचर सप्लाई किया गया था। जो निर्धारित क्वालिटी का नहीं है।
घटिया क्वालिटी की सूचना पर किया था सत्यापन
राजसीको के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्टील फर्नीचर की खरीद के लिए 12 करोड़ 98 लाख रुपए का ऑडर विभिन्न फर्मों को दिया था। इस पर संबंधित फर्मों द्वारा फर्नीचर सप्लाई किया था। इस मामले में इन फर्मों द्वारा राजसीको व महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया क्वालिटी का फर्नीचर सप्लाई करने की सूचना मिलने पर एसीबी की टीम ने राजस्थान में करीब डेढ़ सौ सीडीपीओ कार्यालयों में सत्यापन किया था। जिसमें घटिया क्वालिटी का फर्नीचर पाए जाने पर एसीबी जयपुर ने केस दर्ज किया था। दौसा में सीडीपीओ कार्यालय में एसीबी की टीम ने 9 जनवरी को जांच की थी। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद अब एसीबी जयपुर की टीम दौसा पहुंची तथा दोनों कार्यालयों में जांच की।
ये सप्लाई हुआ था फर्नीचर
फर्मों ने सीडीपीओ कार्यालयों में आलमारी, टेबल, कुर्सी आदि सप्लाई किए थे। फर्मों ने यह सामान निर्धारित वजन, साइज, गेज के अनुसार सप्लाई नहीं किया। डीएसपी हरिनारायण मौर्य ने बताया कि फर्मों द्वारा सप्लाई किया गया स्टील फर्नीचर घटिया क्वालिटी का है। आलमारियों का वजन व गेज निर्धारित नमूने के अनुसार नहीं है। टीम द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है।
दौसा. महिला बाल विकास विभाग में जांच करती एसीबी की टीम।