पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • शराब ठेकों पर सीसीटीवी लगाए जाएं, इससे गड़बड़ करने वालों पर नजर रखना आसान

शराब ठेकों पर सीसीटीवी लगाए जाएं, इससे गड़बड़ करने वालों पर नजर रखना आसान

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पुलिस सुपरिटेंडेंट चूनाराम जाट की छवि पाक साफ है, लेकिन ओवर रेट व ओवर टाइम शराब बिक्री से पुलिस की किरकिरी भी होती है। जिन लोगों के निशाने पर पुलिस रहती है, उनका कहना है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। लोगों का कहना है कि ठेकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इससे कोई गड़बड़ करता है तो उसका बच निकलना मुश्किल होगा।

शहर में शराब की 8 दुकान हैं। शराब के ठेकों का खुले रहने का समय सुबह 8 से रात 8 बजे तक का है। सेवानिवृत्त एडीपी तथा सीनियर एडवोकेट डी.पी. शर्मा का कहना है कि यह समय तो कागजों में है। हां शहर में अधिकांश ठेकों का शटर रात 8:15 बजे तक गिरा दिए जाते हैं। बाहर से शटर का लॉक भी कर दिया जाता है, लेकिन ठेके के अंदर एक-दो लोग होते हैं, जो बाहर खड़े सैल्ममेन की डिमांड पर बोतल शटर के नीचे से सरका देते हैं। फिर सैल्समेन ओवर टाइम में ओवर रेट लेकर ग्राहक को शराब बेच देते हैं। सैल्समेन और ठेकेदारों की इस तरह की पोल पट्टी को रोकने के लिए ठेकों के बाहर लाइट और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए। इसी कड़ी में कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष कमलेश जाकड़ का कहना है कि लोगों को दिखाने के लिए ठेकों का शटर तो रात 8 बजे के आस-पास बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन शटर के नीचे से आधी रात तक शराब धड्ल्ले से बेची जाती है। इस तरह अवैध रुप से शराब बेचने पर राेक लगाने के लिए शटर के नीचे का फर्श टूटा नहीं होना चाहिए। यानी शटर और फर्श के बीच इतनी जगह नहीं होनी चाहिए कि शराब की बोतल निकल सके। इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ आबकारी-पुलिस अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए।

देर रात तक ठेकों पर शराब बिकने की लोग शिकायत करना तो चाहते हैं, लेकिन करे तो किसे। ऐसे में ठेकों के बाहर निकटतम थाने और उसके प्रभारी के टेलीफोन नंबर लिखने चाहिए। साथ ही लोगों को कॉल करते समय रिकॉर्डिंग करनी चाहिए। इससे संबंधित थाना पुलिस और उसका प्रभारी कार्रवाई नहीं करें तो बिग बॉस एसपी को सबूत के साथ शिकायत कर सकें।

ओवर रेट और ओवर टाइम शराब बिक्री दोनों ही पुलिस-प्रशासन के लिए सिरदर्द है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरुरी है। वरना पुलिस की यूं ही किरकिरी होती रहेगी और लेन-देन के आरोप भी लगते रहेंगे। सोमेश्वर गर्ग, रिटायर्ड एडीपी

खबरें और भी हैं...