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एटीवीएम पर एक भी फैिसलेटर नहीं, खिड़की पर टिकट लेने के लिए धक्का-मुक्की अाैर हंगामा

3 वर्ष पहले
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रेलवे स्टेशन पर व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। जैसे सूरज निकलने और छिपने में लोगों का कोई योगदान नहीं है, वैसे ही स्टेशन की व्यवस्था स्वत:ही चल रही हैं। स्टेशन परिसर में कई तरह के गिरोह सक्रिय हैं। इसमें एक गिरोह अवैध रूप से एटीवीएम को चला रहा है। एटीवीएम पर अवैध रूप से टिकट देने वाले दिहाड़ी मजदूर और कमीशन के ताैर पर काम कर रहे हैं। दूसरा गिरोह नशेड़ियों का है और तीसरा गिरोह ट्रेनों में अवैध रूप से चलने वाले वेंडरों से उगाई के तौर पर सक्रिय है। एटीवीएम पर शनिवार शाम एक भी फैसलेटर नहीं था, जिससे लोगों को खिड़की पर टिकट लेने के लिए धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी । फिर अारपीएफ स्टाफ ने हंगामा कर रहे लाेगाें काे शांत कराया।

रेलवे स्टेशन पर टिकट घर में तीन एटीवीएम लगी हैं। रेलवे ने एटीवीएम से टिकट देने के लिए अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को फैसलेटर के तौर नियुक्ति किया है। इसमें 6-7 रिटायर्ड कर्मचारी हैं। रेलवे ने अपने जिन कर्मचारियों को फैसलेटर नियुक्त किया है, वे कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। अधिकांश समय कर्मचारियों के बेटे-भतीजे या उनके द्वारा ठेके पर रखे लोग ही रहते हैं। कई कर्मचारियों ने दिहाड़ी पर भी टिकट देने के लिए अपने परिचितों को लगा रखा है।

ऐसी स्थिति में लोगों ने एटीवीएम से टिकट देने को गौरख धंधा बना लिया, लेकिन व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारी जानने-बूझने के बावजूद अनजान बन कर बैठे हैं। फैसलेटर्स ने जिन लाेगाें काे दिहाड़ी/कमीशन पर लगा रखा है, वे मनमानी करते हैं। इससे टिकट के लिए आए दिन अफरा-तफरी का माहौल रहता है। कुछ इसी तरह के हालात शनिवार को देखने को मिले, जब तीनाें एटीवीएम पर एक भी फैसलेटर नहीं था। दोपहर 3:30 से शाम 6 बजे तक 10 ट्रेन आती और जाती हैं। उस समय यात्रियों की भीड़-भाड़ अधिक रहती है।

दौसा. रेलवे स्टेशन पर टिकिट के लिए मारामारी करते यात्री।

रेलवे का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ

रेलवे ने खिड़की पर यात्रियों की भीड़-भाड़ को कम करने के उद्देश्य से एटीवीएम लगाए थी, जहां से यात्री अपने स्मार्ट कार्ड से खुद ही टिकट ले सकें। यात्रियों को टिकट लेने के लिए ट्रेंड करने के सिलसिले में रेलवे ने अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को बतौर फैसलेटर नियुक्त किया, लेकिन फैसलेटरों ने यात्रियों को ट्रेंड करने की जगह अपनी कमाई का जरिया बना लिया। किसी भी फैसलेटर ने यात्रियों को एटीवीएम से टिकट लेने के लिए प्रेरित नहीं किया। रेलवे का उद्देश्य था कि यात्री स्मार्ट कार्ड लें और उसे रिचार्ज कराकर स्वयं ही एटीवीएम से टिकट लेना शुरू करें। रेलवे फैसलेटरों को 5 फीसदी कमीशन देती है। अब कुछ कम करने की बात है। जीएम ने फरवरी माह में दाैसा स्टेशन का निरीक्षण किया था। जीएम के निरीक्षण से पूर्व डीअारएम व सीनियर डीसीएम दाैसा अाए थे। दाेनाें ही अधिकारियाें ने तब अपने मातहत अधिकारियाें काे अादेश दिए थे कि एटीवीएम पर वे ही लाेग कार्यरत रहने चाहिए,जाे अधिकृत हैं। अधिकृत लाेगाें के अार्इ कार्ड भी बनाए जाएं। इसके बावजूद अवैध लाेग एटीवीएम से सरेअाम टिकट दे रहे हैं।

ठेके पर चल रहे हैं एटीवीएम

एटीवीएम पर जिन कर्मचारियों को फैसलेटर नियुक्त किया था, उनकी जगह दूसरे लोग ठेके पर काम कर रहे हैं। इसमें कुछ लोग दहाडी पर और कुछ कमीशन पर एटीवीएम से टिकट देने में लगे हैं। ऐसा नहीं कि इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है, लेकिन जिम्मेदार लोग जानने-बूझने के बावजूद अनजान बने हुए हैं। बताने के बावजूद वह यह मानने के लिए तैयार नहीं कि एटीवीएम अवैध लोग चला रहे हैं। -उम्मेद सिंह जादौन, स्टेशन सुपरिटेंडेंट

एटीवीएम पर नियुक्त फैसलेटर की जगह, दूसरे लोग आए थे। उन्हें भाग दिया। तीनों ही एटीवीएम पर एक साथ फैसलेटर नहीं होने से यात्रियों को टिकट के लिए खिड़की पर कतार में परेशानी झेलनी पड़ी। सवाल: इसका मतलब यह आरोप सही है कि एटीवीएम पर दिहाड़ी/कमीशनखोर लोग सक्रिय हैं। जवाब: हां, लेकिन अब शक्ति से ऐसे लोगों को बाहर करेंगे। आदत से बाज नहीं आएंगे तो केस दर्ज कराएंगे। गिर्राज प्रसाद मीणा, स्टेशन सुपरिटेंडेंट सुपरवाइजर

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