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जिला अस्पताल में महिला की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप

3 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में रविवार को एक महिला की अत्यधिक रक्तस्राव होने से मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए रोष जताया।

गिलाड़ी निवासी नेहा शर्मा (23) के रक्तस्राव होने पर पति पवन शर्मा ने उसको गीजगढ़ सीएचसी में दिखाया। वहां उपचार के बाद उसको जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पवन शर्मा ने बताया कि दोपहर करीब सवा 12 बजे नेहा को जिला अस्पताल लेकर आया था। इमरजेंसी से नेहा को मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में भेज दिया। पवन शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र में नर्स थी। इस पर उसने डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा, लेकिन डॉक्टर को नहीं बुलाया। नर्स ने इंजेक्शन लाने व पर्ची बनवाने के लिए भेज दिया। नर्स ने उपचार शुरू किया। वह पर्ची व इंजेक्शन लेकर केंद्र में पहुंचा तो नेहा की मौत होना बताया। इसके बाद डॉक्टर को बुलाया गया। पवन शर्मा ने आरोप लगाया कि नेहा की मौत होने के बाद इमरजेंसी भेज दिया। वहां ईसीजी की गई। उसको केंद्र से पर्ची भी नहीं दी गई। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस जिला अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। कोतवाली के एएसआई योगेश व्यास ने बताया कि पवन शर्मा ने मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में नेहा के उपचार में लापरवाही बरतने की रिपोर्ट दी है।

दौसा. जिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद रोष जताते परिजन।

जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. बी. के. बजाज का कहना है कि मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में रेजीडेंट डॉक्टर ने महिला को आते ही संभाला था। उपचार में कोई लापरवाही नहीं बरती। मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में रेजीडेंट डॉक्टर का कहना है कि महिला की हालत गंभीर थी। केंद्र में आते ही उसकी जांच की गई थी। तुरंत डॉक्टर को भी बुला लिया था। तब तक उसकी मौत हो गई।

दो साल पहले हुई थी शादी : नेहा की शादी करीब दो वर्ष पूर्व हुई थी। उसके एक छह माह की बेटी है। नेहा की मौत होने से उसकी छह माह की बेटी के सिर से मां का साया उठ गया।

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