आयात शुल्क बढ़ाने का मामला ठंडे बस्ते में
खाद्य तेलों में तेजी-मंदी सटोरियों से नहीं चल सकती है। ग्राहक सर्वोपरी है। यदि ग्राहकी रहेगी तो तेजी आएगी अथवा नहीं। आयात शुल्क बढ़ने का मामला अब ठंडे बस्ते में चला गया है। केंद्र शुल्क बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उद्योग का यह मालूम होना चाहिए कि अगले वर्ष लोकसभा के चुनाव हैं। सरकार किसी भी जिंस में तेजी नहीं चाहती है। आयात शुल्क बढ़ाना समस्या का हल कल भी नहीं था और आगे भी नहीं रहेगा। सरकार को तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने के बाद खाद्य तेलों का आयात सीमित करना चाहिए। सोया तेल खेरची में 83 से 85 रुपए लीटर बिक रहा है, इसे सस्ता नहीं कहा जा सकता।
महंगा तेल नहीं बिकता
जानकार क्षेत्रों के अनुसार सोया तेल में 760 रुपए के आसपास कामकाज हो जाते हैं, जो प्लांट ऊंचे भाव बोलते हैं उनका माल नहीं बिकता है। एक प्लांट ने मंदी में तेल नहीं उठाने वाले व्यापारियों के सौदे ही नहीं लिखे। अक्षय तृतीया जैसी ब्याह-शादी के लिए बड़ी तिथि नजदीक आने के बाद न केवल खाद्य तेलों में वरन अन्य कृषि जिंसों में भी ग्राहकी कमजोर ही चल रही है। केएलसीई 23 माइनस बंद। शिकागो में सोया तेल 7 प्लस चल रहा था। प्लांटों में सोया तेल विप्पी हाजर 762, 25 अप्रैल 765 रुपए केशव 765 अविएग्रो 766 महाकाली बजरंग 768 धानुका एमएस 756 मंदसौर 758 इंदौर पाम 772 से 775 रुपए। कांडला पाम 712 से 715 सोया डीगम 720 से 725 रिफाइन 752 से 753 रुपए।