भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी
मेड़ता-डेगाना के 176 गांवों में नहरी पानी पहुंचाने के जयपुर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले ठेकेदार को कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने ठेकेदार की याचिका पर स्थगन आदेश नहीं दिया। इसे सुनवाई में रखा है। अब सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बैंच 28 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। उधर, नहरी परियोजना के अभियंताओं ने वर्क ऑर्डर के अनुसार ठेकेदार से धरातल पर काम शुरू करवा दिया है। थांवला के पास भूमि पूजन के साथ 2 साल से बंद पड़े नहरी परियोजना के काम का भी श्रीगणेश हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से समय पर केविएट लगाने का फायदा हुआ है और इस महत्वपूर्ण नहरी जल परियोजना पर स्टे नहीं मिल पाया है। इसलिए अब नहर परियोजना के अधिकारियों ने वर्क ऑर्डर मिलते ही अधूरे पड़े कार्यों को शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि मेड़ता व डेगाना विधानसभा के 176 गांवों में नहरी पानी पहुंचाने की योजना के प्रथम चरण को 2012 में मंजूरी मिली थी।
तब केएसएस पेट्रोन इंडिया नामक ठेकेदारी फर्म ने काम शुरू किया। सुस्त कार्यशैली से नाराज होकर जब सरकार ने ठेकेदारी फर्म पर पर पेनल्टी ठोकी तो नाराज फर्म ने परियोजना को अधूरी छोड़ काम रोक दिया। ऐसे में फर्म 176 करोड़ में से मात्र 67 करोड़ रुपए के काम ही कर पाई थी। यानि 60 प्रतिशत नहरी परियोजना का काम अधूरा रह गया था।
डीआई पाइप की खरीदारी के लिए एक्सईएन जलगांव पहुंचे
नहरी परियोजना के तहत गांव-गांव डीआई पाइप बिछाने होंगे। इसकी खरीदारी भी शुरू हो गई है। नहरी परियोजना के अभियंता महाराष्ट्र के जलगांव में डीआई पाइप देखने गए हैं। एक्सईएन मनोहर सोनगरा ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ महाराष्ट्र के जलगांव में हैं तथा यहां से नहरी परियोजना के लिए पाइप खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल भूमि पूजन के साथ काम शुरू करवा दिया है। प्राथमिकता मेड़ता सिटी की आधी अधूरी पड़ी पानी की टंकियों का निर्माण पूरा करवाने की रहेगी।
2016 में दुबारा टेंडर, एक फर्म ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
सरकार ने नए सिरे से नवंबर 2016 में निविदाएं आमंत्रित की। सरकार व परियोजना के अभियंता इन पर कोई निर्णय लेते इससे पहले ही मामला विवादों में आ गया। जोधपुर की फर्म मैसर्स विष्णु प्रसाद पुंगलिया ने जोधपुर हाईकोर्ट में निविदा के खिलाफ रिट लगा दी। उन्होंने मनमर्जी का आरोप लगाते हुए टेंडर प्रक्रिया को गलत बताया। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर ने अतिरिक्त मुख्य सचिव नहर विभाग की ओर से खोले गए टेंडर को सही करार दिया। न्यायालय ने कहा रि-टेंडरिंग के खिलाफ रिट लगाकर मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने सरकार व अदालत का वक्त खराब किया। इसलिए मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया से एक लाख रुपए का जुर्माना वसूलने के भी आदेश दिए। पुंगलिया इसी फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट गए हैं। लेकिन सरकार की ओर से विधि सचिव ने पहले ही कैविएट लगा दी थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में मैसर्स पुंगलिया को कोई स्टे नहीं मिला। अब इस मामले की सुनवाई 28 मई को होगी।
मेड़ता सिटी. नहरी परियोजना के एक्सईएन महाराष्ट्र के जलगांव में डीआई पाइप देखते हुए।
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