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पत्नी बोलीं- मुआवजा देकर शहादत की कीमत मत लगाइए, बदला लीजिए

3 वर्ष पहले
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सीताराम उपाध्याय बचपन से ही फौज में जाना चाहते थे। लगातार प्रयास के बाद 2011 में उनका चयन हुआ। अभी वे श्रीनगर में तैनात थे। 2014 में उनकी शादी देवघर जिले के फूलचुआं की रेशमा कुमारी से हुई। उनकी तीन साल की बेटी और दो साल का बेटा है। वे मां किरण देवी और पिता ब्रजनंदन उपाध्याय के छोटे बेटे थे। सीताराम के बड़े भाई सोनू उपाध्याय मधुबन मंदिर के पुजारी हैं।

शहादत से 4 घंटे पहले पति से हुई थी बात, तब चल रही थीं गोलियां

दोनों बच्चों के साथ शहीद की प|ी रेशमा।

डुमरी कॉमर्स कॉलेज में स्नातक पार्ट-3 की पढ़ाई कर रही रेशमा ने कहा-अप्रैल में वे घर आए थे। तीन साल की बेटी और दो साल के बेटे के मुंडन में शामिल होने के बाद 2 मई को श्रीनगर में ड्यूटी ज्वाइन की थी। कहा था कि जुलाई में फिर आऊंगा। शहादत से चार घंटे पहले गुरुवार रात करीब 10 बजे पति ने मुझे फोन किया था। उस समय फायरिंग की आवाज सुनाई दे रही थी। लेकिन वे यह कहकर तसल्ली दे रहे थे कि अभी दूसरे बटालियन के साथ फायरिंग हो रही है। उनकी ड्यूटी रात 12 बजे से तीन बजे तक है। तब तक सब खत्म हो जाएगा। लेकिन शुक्रवार सुबह छह बजे शहीद होने की सूचना आई।

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