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3 महीने में बनने वाला मुबारिकपुर रेलवे अंडरपास प्रोजेक्ट 6 महीने बाद भी अधूरा

अंबाला-कालका रेलवे ट्रैक पर घग्गर स्टेशन के नजदीक तीन महीने में बनने वाला मुबारिकपुर पहला डबल लेन रेलवे अंडरपाथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 26, 2018, 02:00 AM IST

3 महीने में बनने वाला मुबारिकपुर रेलवे अंडरपास प्रोजेक्ट 6 महीने बाद भी अधूरा
अंबाला-कालका रेलवे ट्रैक पर घग्गर स्टेशन के नजदीक तीन महीने में बनने वाला मुबारिकपुर पहला डबल लेन रेलवे अंडरपाथ छह महीने बाद भी अधूरा है। यही नहीं, निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार के कारण मानसून के बाद तक प्रोजेक्ट का लटकना तय है। इससे भांखरपुर मुबारिकपुर रोड पर बंद पड़ी वाहनों की आवाजाही से दिक्कतें और बढ़ गई हैं। निर्माण ठेकेदारों के अनुसार रेलवे, फॉरेस्ट व निकाय विभाग का सहयोग न मिलने से काम बंद पड़ा है, वहीं लोगों की पुरजोर मांग है कि प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा कर उनकी परेशानी दूर की जाए।

लिमिटेड हाइट सब-वे (एलएचएस) नामक 5 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत पहला डबल लेन अंडरपास तैयार किया जा रहा है। इसका काम दिसंबर में जोर शोर से शुरू हुआ परंतु रेलवे विभाग की प्राथमिकताओं के चलते ठंडे बस्ते में चला गया। पहले अंबाला-कालका रेलमार्ग का डबल लेनिंग प्रोजेक्ट के पूरा होने तक काम रुका रहा परंतु अब एक महीने बाद भी काम लगभग पूरा होने पर है और महकमे का फोकस इसे पूरा करने पर ही है। अंडरपास प्रोजेक्ट गिरिराज स्टोन क्रशर कंस्ट्रक्शन कंपनी अंजाम दे रही है। काम बंद रहने से कंपनी को मशीनरी समेत भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है जबकि उसका दावा है कि रेलवे विभाग का पूर्ण सहयोग मिला होता तो अंडरपास का काम तीन महीने में पूरा करके दिखाते जबकि अभी करीब तीन महीने में खुदाई कर केवल 22 ब्लॉक्स ही अंडरग्राउंड बिछाए जा सके हैं। दो महीने काम लगभग बंद रहा और अब रिटेनिंग वाल का निर्माण जारी है। दूसरी ओर, रेलवे अंडरपास के निर्माण के चलते भांखरपुर मुबारिकपुर वाला सड़क रूट बंद होने से रामगढ़ समेत मुबारिकपुर का ट्रैफिक भी डेराबस्सी से आने जाने को मजबूर हैं। इससे लोगों का समय, खर्च व परेशानी कहीं अधिक बढ़ी हुई है।

डबल ट्रैक प्रोजेक्ट अंडरपास सुविधा को नजरंदाज कर रहा रेलवे: कंपनी: कंपनी के टेक्नीकल सुपरवाइजर ओपी द्विवेदी ने बताया कि रेलवे विभाग से वांछित सहयोग नहीं मिल रहा। पहले ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन तारें नहीं हटाईं जबकि अब खंभे अड़चन बने हुए हैं। अंडरपास की अप्रोच रोड व रिटेनिंग वाल के बीच वन विभाग के पांच पेड़ भी अड़चन हैं। इन्हें हटाने के लिए प्रोजेक्‍ट शुरु होने से पहले ही रेलवे विभाग ने मंजूरी मुहैया करानी थी जो आज तक नहीं कराई।

इसके अलावा रिटेनिंग वाल के इर्दगिर्द 14 फीट की यू-टर्न में सर्विस सड़क बननी है परंतु यहां रिहायशी कॉलोनियों व दुकानों के लिए वाॅटर सीवर लाइनें बिछी हैं। निर्माण कार्य छेड़ने पर इनके डैमेज होने का खतरा है क्योंकि डेराबस्सी नगर परिषद की ओर से कंपनी के पास कोई ड्राइंग्स मुहैया नहीं कराई गई। यह तीनों काम पूरे होने पर ही रिटेनिंग वाल का फुल प्लेज निर्माण होगा। उसके बाद भी सड़क बनाई जा सकेगी। इस बीच बारिश शुरू हो गईं तो प्रोजेक्ट मानसून के बाद तक लटक जाएगा।

मानसून से पहले एक हिस्सा ही पूरा हो पाएगा: रेलवे

दूसरी ओर, रेलवे महकमे के अफसरों का कहना है कि इलेक्ट्रिफिकेशन तारों में कोई करंट नहीं है और बिजली बोर्ड को खंभे हटाने के लिए लिखा गया है। उसका एस्टीमेट आने पर पैसे जमा करा दिए जाएंगे। पेड़ों को हटाने के लिए वन विभाग की क्लीयरेंस मिल गई है परंतु लैंड ट्रांसफर समेत कई और औपचारिकताएं पूरी की जानी तय है। उसके पैसे जमा करवा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी ये खंभे व पेड़ त्रिवेदी कैंप की ओर रिटेनिंग वाल के निर्माण में बाधा नहीं हैं। अंडरपाथ के लिए इन्हें हटाने की जरूरत नहीं है। खुदाई कार्य लगभग पूरा हो चुका है और श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर रिटेनिंग वाल का निर्माण किया जा रहा है। अफसरों ने मानसून से पहले हर हाल में अंडरपास का एक तरफ का हिस्सा काम पूरा कर आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा जबकि पूरा प्रोजेक्ट मानसून के बाद ही पूरा हो पाएगा।

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