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पानी में सीवरेज का गंदा पानी मिक्स होने से फैला डायरिया

डेराबस्सी में एक गहरे गड्ढे ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सीवर मिक्स पानी का इस्तेमाल करने से इस गली में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 06, 2018, 02:00 AM IST

पानी में सीवरेज का गंदा पानी मिक्स होने से फैला डायरिया
डेराबस्सी में एक गहरे गड्ढे ने लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सीवर मिक्स पानी का इस्तेमाल करने से इस गली में डायरिया फैल गया है। अभी तक 8 मरीज डिटेक्ट हो चुके हैं। हालांकि, हेल्थ टीम ने मौके पर पहुंच कर राहत कार्य शुरू कर दिया है। परंतु, उक्त गड्ढा यहां के लोगों के लिए नासुर बनता जा रहा है। 18 दिन से यहां से प्रशासन गड्ढे से पानी व मल्बा नहीं निकाल पाया है। ऐसे में मरम्म्त कार्य कब शुरू होगा, इसकी भी कोई तय सीमा नहीं है। दूसरी ओर, गली में वाहनों की एंट्री इस गड्ढे के कारण बंद है।

अहम बात यह है कि गली में इसी वार्ड के पार्षद एवं पूर्व प्रधान हरजिंदर सिंह रंगी का मकान भी है। जबकि, पूर्व प्रधान एवं मौजूदा पार्षद भूपिंदर सैनी का गली के प्रवेश पर ही कार्यालय भी है। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान तो एक तरफ, समस्या और विकराल होती जा रही है। कितने दिन और लगेंगे, इसका भी कोई जवाब प्रशासन नहीं दे रहा है। जिससे लोगों का रोष अब गुस्से में बदलने लगा है। डायरिया फैलने से उनके सब्र का बांध टूटने लगा है। लोगों का कहना है कि निराश होकर उन्हें हाईवे पर धरने-प्रदर्शन व जाम का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

प्रशासन के लगातार अनेदेखा करने से लोगों ने धरने व ट्रैफिक जाम करने की दी चेतावनी

घरों की टंकियों में पहुंचा सीवरेज का मिक्स पानी, जिसके इस्तेमाल के बाद पैदा हुई डायरिया की समस्या

इंटिग्रेटेड डिजीस सर्विलेंस प्रोग्राम, मोहाली से डॉ. दीप्ति की अगुवाई में सिविल हॉस्पिटल की हेल्थ टीम ने गली नं 4 व 5 के कुल 30 घरों का सर्वे किया। इनमें से उल्टियां दस्त वाले 8 मरीज डिटेक्ट हुए हैं। जिनमें पांच बुजुर्ग, दो महिलाएं व एक बच्चा है। ओआरएस घोल के 50 पैकेट व क्लोरीन की 600 टैबलेट्स बांटी गईं। कुछ लोगों के ब्लड सैंपल्स भी लिए हैं, जबकि स्टूल सैंपल नहीं उपलब्ध नहीं हो सके हैं। चार घरों से पानी के सैंपल लिए गए हैं, जिनमें तीन घर 4 नंबर गली व एक सैंपल 5 नंबर गली से लिया गया है। मोहल्ले के लोगों को वाटरबोर्ने बीमारियों के लक्ष्य एवं उनकी रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. दीप्ति ने बताया कि पानी की लाइन बदले जाने पर सीवर मिक्स पानी कई घरों की ओवरहेड टैंकों में पहुंच गया है। जिसका इस्तेमाल करने से एक्यूट डायरिया के 8 मरीज सामने आए हैं।

सीवरेज बोर्ड के एक्सीयन मोहित वर्मा ने बताया कि जब तक हाईवे के ड्रेन से बारिश के पानी की लीकेज नहीं दूर होगी, काम पूरा नहीं किया जा सकेगा। बारिश के कारण समस्या और विकराल हो रही है। 13 फीट से अधिक गहरी खुदाई कर जो पानी निकाला जा रहा है, वह वापस ड्रेन में जाकर इसी गड्ढे में बैक आ रहा है। यह समस्या कब तक सॉल्व होगी, इस बारे वे कोई भरोसा नहीं दे सकते। वहीं, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुखजिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि सीवरेज पाइप के लीकेज होने से जमीन धंस गई है। मौके पर काम चालू है, परंतु बारिश बीच में खलल ही नहीं, टीम की मेहनत पर पानी फेर रही है।

सीवरेज लाइन में लीकेज के बाद निकासी बाधित होने से गली खोखली होकर धंस गई थी... यह गली 18 जून को बारिश में अंडरग्राउंड सीवरेज लाइन व ड्रेन में लीकेज के बाद इसकी निकासी बाधित होने से यह गली फिर खोखली होकर धंस गई थी। सीवरेज के मैनहोल की एक तरफ की दीवार ही ढह चुकी है। जबकि, हाईवे की ड्रेन में लगातार पानी की लीकेज ने गली को और खोखला कर दिया है। वीरवार को एक बिजली खंभा भी गिरने लगा था। जिसे आज बदलना पड़ा। बारिश इस समस्या की आग में घी का काम रही है। मौके पर चोक निकासी खोलने वाला कैम्बी वाहन, जनरेटर लगाकर पानी पंप आउट किया जा रहा है, वहीं जेसीबी से मलवा बाहर निकाला जा रहा है। खड्डा 15 फीट गहरा और 20 बाई 20 फीट चौड़ा जरूर हो गया है, परंतु रिपेयर कब मुकम्मल हो पाएगी, इसकी कोई समय सीमा नहीं बताई जा रही है। दरअसल, हाईवे की केयरटेकर कंपनी जीएमआर, नगर परिषद व सीवरेज बोर्ड के बीच आपसी तालमेल से समस्या लंबी खिंचती चली जा रही है।

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